Big BreakingChhattisgarhFeaturedछत्तीसगढ़रायपुर
Trending

संकटमोचन के दरबार में सेवा ही सच्ची साधना: कुबेर राठी के संकल्प से 17 साल से अविरल जारी है महाभंडारे की पावन परंपरा

'नर सेवा ही नारायण सेवा' के भाव से पिरोया 17 वर्षों का अटूट सफर; 5 से 6 हजार भक्तों ने एक पंगत में पाई प्रभु कृपा



रायपुर। सनातन संस्कृति में सेवा को परमात्मा की प्रत्यक्ष आराधना और भक्ति का सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्मयोग और गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की चौपाई—‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ का सजीव दृश्य रायपुर रेलवे स्टेशन परिसर स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर में देखने को मिला। यहाँ सेवा समिति द्वारा विगत 17 वर्षों से बिना रुके, अनवरत संचालित हो रही महाभंडारे की पावन परंपरा इस शनिवार भी पूरी श्रद्धा, गरिमा और भव्यता के साथ संपन्न हुई।

समिति के संस्थापक कुबेर राठी के नेतृत्व में आयोजित इस महाभंडारे में दोपहर से लेकर देर रात तक आस्था और सेवा का अविरल प्रवाह बहता रहा। रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थल पर जाति, वर्ग, धर्म और पद की तमाम सीमाओं को लांघकर लगभग 5,000 से 6,000 श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर महाप्रभु का पावन प्रसाद ग्रहण किया।

यह भी पढ़ें  छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन में 'कागजी पानी' पर घमासान: CAG रिपोर्ट और विधानसभा में हंगामे के बाद भाजपा-कांग्रेस में छिड़ी सियासी जंग

​कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ समिति के संस्थापक कुबेर राठी द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अनन्य सेवक, संकटमोचन पवनपुत्र हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना, आरती और स्तुति के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और हनुमान चालीसा के पाठ के बीच उन्होंने समूचे प्रदेश और देशवासियों के आरोग्य, सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना की।

​इस अवसर पर कुबेर राठी ने कहा कि यह कोई मानवीय सामर्थ्य नहीं, बल्कि साक्षात संकटमोचन वीर हनुमान जी की असीम अनुकंपा है कि उन्होंने मुझे और हमारे सेवाभावी साथियों को इस पुनीत कार्य का माध्यम बनाया। 17 वर्षों का यह सफर प्रभु इच्छा और भक्तों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। जब सेवा का संकल्प सच्चा हो, तो साधन और सामर्थ्य स्वयं ईश्वर जुटाते हैं।

यह भी पढ़ें  बिलासपुर IG रामगोपाल गर्ग को राष्ट्रपति पुलिस पदक, स्वतंत्रता दिवस पर द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

प्रसाद वितरण शुरू होने के साथ ही परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। संस्थापक कुबेर राठी ने स्वयं अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और कतारबद्ध वितरण की संपूर्ण व्यवस्थाओं का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया और स्वयं भक्तों को प्रसाद परोसा।

उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं और सेवादारों को संबोधित करते हुए कहा कि भूखे को अन्न और प्यासे को जल देना किसी भी मंदिर निर्माण या तपस्या से कम फलदायी नहीं है। भारतीय संस्कृति में अन्न को ब्रह्म माना गया है, और जब वही अन्न प्रभु के भोग के बाद महाप्रसाद बनता है, तो वह केवल क्षुधा शांत नहीं करता बल्कि अंतरात्मा को भी तृप्त करता है। समिति का संकल्प है कि यह सेवा-यज्ञ भविष्य में भी बिना किसी अवरोध के इसी गति से चलता रहेगा।

यह भी पढ़ें  Aaj Ka Panchang 12 August 2026: हरियाली अमावस्या पर साल का आखिरी खग्रास सूर्य ग्रहण, जानिए शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया का पूरा हिसाब

​दोपहर के समय शुरू हुआ यह महाभंडारा देर रात तक चलता रहा। दूर-दराज से आने वाले रेल यात्रियों, स्थानीय नागरिकों, श्रमिकों और राहगीरों ने कतारबद्ध होकर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी स्वयंसेवकों ने तन-मन-धन से सहयोग दिया और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा। पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयघोषों से गुंजायमान रहा।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button