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लापरवाही की भेंट चढ़ा करोड़ों का स्मार्ट ट्रैफिक प्रोजेक्ट: रायपुर में छह महीने से ठप पड़ा आईटीएमएस सिस्टम, आठ करोड़ का भुगतान अटकने से बंद हुए 372 सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों की हवा निकल गई है। संचालन करने वाली कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) का लगभग आठ करोड़ रुपये का भुगतान अटकने के कारण पिछले छह महीने से इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) पूरी तरह बंद है। शहर के वीआईपी चौराहों समेत प्रमुख मार्गों पर लगे 372 आधुनिक कैमरे और स्मार्ट उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे पुलिसिंग और सुरक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में आ गई है।







रायपुर, 5 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को हाईटेक और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से स्थापित किया गया इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) प्रशासनिक उदासीनता और वित्तीय विवाद की भेंट चढ़ गया है। पिछले छह महीने से यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद पड़ा है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से चरमरा गए हैं। सिस्टम के ठप होने की मुख्य वजह इसका संचालन और मेंटेनेंस करने वाली देश की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) का बकाया भुगतान होना बताया जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड प्रबंधन द्वारा कंपनी का लगभग आठ करोड़ रुपये का वित्तीय भुगतान लंबे समय से अटका कर रखा गया है। बार-बार पत्राचार और नोटिस देने के बाद भी जब राशि जारी नहीं हुई, तो कंपनी ने अंततः सिस्टम के संचालन और तकनीकी मेंटेनेंस का काम पूरी तरह से रोक दिया। इस बड़े वित्तीय गतिरोध का सीधा और घातक असर अब राजधानी की सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक और असुरक्षित हो चुके सुरक्षा घेरे के रूप में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

राज्यपाल के काफिले के दौरान खुली पोल, कलेक्ट्रेट चौक पर लगा लंबा जाम

आइटीएमएस प्रोजेक्ट के बंद होने का सबसे गंभीर और चिंताजनक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब राजधानी के कलेक्ट्रेट चौक पर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल का काफिला गुजर रहा था। चूंकि ऑटोमैटिक और स्मार्ट सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका है, इसलिए वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान डिजिटल और मैनुअल ट्रैफिक कंट्रोल के बीच कोई तालमेल या समन्वय स्थापित नहीं हो सका।

इसके परिणामस्वरूप राज्यपाल के काफिले के निकलते ही कलेक्ट्रेट चौक के चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और देखते ही देखते पूरा इलाका भारी जाम की चपेट में आ गया। इस घटना ने वीवीआईपी सुरक्षा को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का दबी जुबान में मानना है कि यदि भुगतान संबंधी इस गंभीर समस्या का तुरंत स्थायी निराकरण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में राजधानी की कानून-व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियां और अधिक विकराल रूप ले सकती हैं।

वीआईपी चौक समेत इन प्रमुख चौराहों पर केवल भ्रम पैदा कर रहे सिग्नल

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत रायपुर के जिन चौराहों को सबसे पहले हाईटेक किया गया था, आज वही सबसे ज्यादा खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। शहर के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील माने जाने वाले वीआईपी चौक (राम मंदिर मार्ग), वीआईपी चौक (विधानसभा मार्ग), कालीबाड़ी चौक, पंडरी कपड़ा मार्केट तिराहा, श्यामनगर, कमल विहार प्रवेश मार्ग और देवेंद्र नगर जैसे प्रमुख चौराहों पर लगे स्मार्ट सिग्नल महीनों से बंद पड़े हैं।

इन चौराहों पर स्थिति और भी बदतर तब हो जाती है जब कई स्थानों पर चार में से केवल एक ही दिशा का सिग्नल अचानक चालू दिखाई देता है और बाकी तीन तरफ की बत्तियां गुल रहती हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण वाहन चालकों के बीच भारी भ्रम की स्थिति निर्मित हो रही है। वाहन चालकों को समझ नहीं आता कि उन्हें रुकना है या आगे बढ़ना है, जिसके कारण पीक आवर्स यानी सुबह और शाम के समय इन चौराहों पर घंटों लंबा जाम लग रहा है और रोजाना छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं।

करोड़ों की लागत से खरीदे गए 372 कैमरे और स्मार्ट उपकरण अब महज शोपीस

आईटीएमएस प्रोजेक्ट के पूरी तरह ठप होने से रायपुर स्मार्ट सिटी के अंतर्गत स्थापित किए गए करोड़ों रुपये के आधुनिक उपकरण धूल खा रहे हैं। इस सिस्टम के बंद होने से पूरे शहर में लगे 372 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, गाड़ियों की नंबर प्लेट को ऑटोमैटिक रीड करने वाले 36 एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे, सड़कों पर किसी भी आपात स्थिति में सीधे पुलिस से संपर्क साधने के लिए लगाए गए 83 इमरजेंसी कॉल बॉक्स (ECB), आधुनिक स्मार्ट पोल और सड़कों पर सूचनाएं प्रदर्शित करने वाले डिजिटल साइन बोर्ड पूरी तरह से निष्क्रिय और कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।

जिस व्यवस्था को शहर की रीढ़ की हड्डी मानकर प्रचारित किया गया था, वह आज विभागीय लापरवाही के कारण आम जनता के किसी काम नहीं आ रही है। सरकारी धन का इस तरह से दुरुपयोग होने को लेकर अब आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों में भी गहरा आक्रोश पनपने लगा है।

अपराधियों पर नजर रखना हुआ नामुमकिन, पुलिसिंग फिर लौटी पुराने ढर्रे पर

इस पूरे प्रोजेक्ट के बंद होने का सबसे बड़ा झटका रायपुर पुलिस की अपराध नियंत्रण इकाई और यातायात पुलिस को लगा है। रायपुर के बूढ़ातालाब स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से होने वाली पूरे शहर की लाइव मॉनिटरिंग और डिजिटल सर्विलांस पूरी तरह से ठप हो चुका है। इसके कारण शहर में होने वाली हिट एंड रन की घटनाओं, दिनदहाड़े होने वाली वाहन चोरियों, चेन स्नेचिंग और सरेराह ट्रैफिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने वाले शरारती तत्वों की पहचान करना अब पुलिस के लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है।

विशेष रूप से एएनपीआर कैमरों के बंद रहने से शहर के भीतर प्रवेश करने वाले संदिग्ध वाहनों, चोरी की गाड़ियों और विभिन्न मामलों में फरार चल रहे आदतन अपराधियों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग पूरी तरह से बंद हो गई है। डिजिटल सर्विलांस का मजबूत सुरक्षा कवच छिन जाने के बाद, रायपुर पुलिस को मजबूरन फिर से सड़कों पर उतरकर मैनुअल चेकिंग और पुराने ढर्रे वाली पारंपरिक पुलिसिंग व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिसमें जनशक्ति भी ज्यादा लगती है और परिणाम भी सटीक नहीं मिलते।

भुगतान रोकने पर अधिकारियों और कंपनी के बीच तनातनी की स्थिति बरकरार

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे गतिरोध के पीछे नगर निगम रायपुर, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों और लार्सन एंड टुब्रो कंपनी के बीच चल रही तनातनी है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि कंपनी द्वारा मेंटेनेंस के कुछ तय मापदंडों (SLA) का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके कारण भुगतान में कटौती की गई है। वहीं दूसरी ओर, कंपनी प्रबंधन का साफ कहना है कि बिना पर्याप्त फंड और पिछले छह महीने से रुके हुए आठ करोड़ रुपये के बड़े भुगतान के बिना इतने बड़े स्तर के तकनीकी ढांचे का दैनिक संचालन और बिजली-इंटरनेट का खर्च उठा पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

अधिकारियों की आपसी खींचतान और इस प्रशासनिक गतिरोध के कारण नुकसान सिर्फ और सिर्फ रायपुर की जनता का हो रहा है, जो टैक्स का भुगतान करने के बाद भी सड़कों पर जाम से जूझने और असुरक्षित माहौल में जीने को विवश है। यदि जल्द ही शासन स्तर पर हस्तक्षेप कर इस विवाद को नहीं सुलझाया गया, तो रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर जाएगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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