मूसलाधार बारिश भी नहीं रोक सकी संकट मोचन हनुमान मंदिर का विशाल भंडारा, 6 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
भारी बारिश के बीच 6 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद:भंडारे के बाद संस्थापक कुबेर राठी ने की गौ-सेवा, खिलाया छप्पन भोग।

रायपुर । राजधानी के रेलवे स्टेशन परिसर स्थित ऐतिहासिक श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर में श्रद्धा, सेवा और समर्पण का एक अनूठा अध्याय रचा गया। सन् 2009 से अनवरत चले आ रहे सेवा संकल्प के क्रम में इस शनिवार को भी विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया। आसमान से बरसती मूसलाधार आफत भी भक्तों के इस महा-अनुष्ठान को डिगा नहीं सकी। भारी बारिश के बीच लगभग 5000 से 6000 श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रभु का दिव्य प्रसाद ग्रहण किया और तृप्त हुए।

शनिवार की अलसुबह से ही मंदिर परिसर का वातावरण ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा था। एक ओर जहां सेवादार महाभंडारे की वृहद् तैयारियों में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर दोपहर होते-होते स्टेशन परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर से शुरू हुआ प्रसाद वितरण का यह अनवरत सिलसिला रात तक चलता रहा, जहां समाज के हर वर्ग के लोगों ने समभाव से बैठकर महाप्रसाद पाया।

महाभंडारे के पावन अवसर पर श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति के संस्थापक कुबेर राठी ने मंदिर पहुंचकर सिंदूरी हनुमान जी महाराज की विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती की। उन्होंने प्रभु के चरणों में शीश नवाकर समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगल कामना की।

मंदिर की महिमा पर प्रकाश डालते हुए संस्थापक कुबेर राठी ने कहा कि भगवान बजरंगबली का यह अलौकिक धाम एक सिद्ध पीठ है। शास्त्रों में ‘दक्षिणमुखी हनुमान’ को संकटों का संहारक और साक्षात जाग्रत देव माना गया है। इस दरबार से आज तक कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटा, यहाँ हर सच्ची मुराद पूरी होती है। आज उन्हीं महाबली की असीम कृपा है कि उन्होंने मुझे और हमारी समिति को इस महाभंडारे की सेवा के योग्य समझा। सच तो यह है कि मैं कुछ नहीं कर रहा, करने वाले वही हैं, मै तो सिर्फ उनका एक साधारण सा निमित्त मात्र हूँ।

‘नर सेवा ही नारायण सेवा है’ के इसी सनातन सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए भंडारे के उपरांत समिति के संस्थापक कुबेर राठी ने गौ-सेवा का पावन संकल्प भी पूरा किया। उन्होंने गौ-शाला पहुंचकर गौ-माताओं को अपने हाथों से श्रद्धापूर्वक भोजन (हरा चारा ,भाजी,रोटी,चना,गुड व मिष्ठान) कराया और उनका आशीर्वाद लिया।

संस्थापक कुबेर राठी ने कहा कि पौराणिक मान्यताओं में गौ-माता को साक्षात कामधेनु माना गया है, जिनके भीतर 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। संकट मोचन हनुमान जी महाराज की कृपा के बिना गौ-सेवा का यह सौभाग्य संभव नहीं है। जहां गौ-माता प्रसन्न होती हैं, वहां साक्षात लक्ष्मी और नारायण का वास होता है। आज भंडारे के साथ-साथ गौ-सेवा की यह संस्तुति पाकर जीवन धन्य हो गया।

यह महाभंडारा और सेवा कार्य देर रात प्रभु की आरती और सेवादारों के आभार प्रदर्शन के साथ संपन्न हुआ। मंदिर समिति का यह अटूट सेवा संकल्प आज रायपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए आस्था और सामाजिक समरसता की एक मिसाल बन चुका है।




