रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन: ओडिशा से यूपी तक फैले अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, 20 साल की सजा पा चुका मुख्य आरोपी तीन साथियों संग गिरफ्तार
रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने नशे के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक अंतरराज्यीय नशा तस्करी सिंडिकेट का राजफाश किया है। पुलिस ने मामले के मुख्य सूत्रधार किशोर साहू सहित चार शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से भारी मात्रा में गांजा, नशीली टैबलेट, कोडीन सिरप और प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए हैं।

पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो देश के अलग-अलग राज्यों से नशीले पदार्थों की खेप लाकर छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के बाजारों में खपाने का काम कर रहे थे।
इस पूरी कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली कड़ी इस गिरोह का मुख्य सरगना किशोर साहू है। पुलिस जांच में यह बेहद सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि मुख्य आरोपी किशोर साहू कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह पूर्व में एनडीपीएस एक्ट के एक बेहद गंभीर मामले में अदालत द्वारा 20 वर्ष के सश्रम कारावास की कठोर सजा पा चुका है।
वह माननीय उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आया था। लेकिन सुधरने के बजाय उसने जेल से बाहर आते ही दोबारा बेहद शातिर तरीके से अंतरराज्यीय स्तर पर नशे के इस अवैध साम्राज्य को फिर से खड़ा कर लिया और सक्रिय भूमिका निभाने लगा।
अवैध मादक पदार्थों और प्रतिबंधित लाइफ-सेविंग ड्रग्स का जखीरा बरामद
पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किए गए चारों शातिर आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ, प्रतिबंधित नशीली दवाएं और अन्य सामग्रियां जब्त की हैं। पुलिस द्वारा तैयार किए गए जब्ती पंचनामे के अनुसार, आरोपियों के पास से तीन किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा, दो हजार नशीली नाइट्रोटेन टैबलेट (प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक पदार्थ), 30 बोतलें कोडीन आधारित कफ सिरप, 290 नग पेंटाजोसिन नशीले इंजेक्शन, 300 नग डिस्पोजेबल सिरिंज और नशीली दवाओं की बिक्री से अर्जित की गई नगद राशि बरामद की गई है।
इस ताजा और बड़ी कार्रवाई के साथ ही इस पूरे अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क और आपराधिक प्रकरण में अब तक कुल पांच बड़े तस्करों की विधिवत गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस द्वारा अब तक की गई कुल कार्रवाई में पूरे सिंडिकेट से 16.15 लाख रुपये से अधिक आंकी गई कीमत के मादक पदार्थ, प्रतिबंधित नशीली गोलियां, सिरप, इंजेक्शन, तस्करी में प्रयुक्त वाहन और अन्य तकनीकी उपकरण पूरी तरह से बरामद किए जा चुके हैं।
कमिश्नरेट पुलिस की बैकवर्ड लिंक रणनीति से ढहा नशा माफिया का किला
राजधानी रायपुर में नशे की रीढ़ तोड़ने के लिए इस बार पुलिस ने पारंपरिक तरीकों से हटकर एक नई और बेहद आधुनिक पुलिसिंग रणनीति पर काम किया। यह पूरी सफल कार्रवाई रायपुर कमिश्नरेट के पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला तथा पुलिस उपायुक्त (मध्य) उमेश प्रसाद गुप्ता के सीधे और कड़े संयुक्त निर्देशन में संचालित की गई। इस विशेष मिशन को धरातल पर उतारने के लिए एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU), एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और गंज थाना पुलिस की एक संयुक्त जांबाज टीम का गठन किया गया था।
इस बार पुलिस अधिकारियों ने केवल स्थानीय स्तर पर नशीले पदार्थों की पुड़िया बेचने वाले या छोटे पैडलर्स को पकड़कर मामले को शांत नहीं किया। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के इनपुट्स के आधार पर ‘बैकवर्ड लिंक’ (सप्लाई चेन के उद्गम स्थल) पर गहराई से काम करने की रणनीति अपनाई। पुलिस की तकनीकी और खुफिया विंग ने यह पता लगाया कि नशीले पदार्थों की यह खेप छत्तीसगढ़ की सीमा के भीतर कहां से प्रवेश कर रही है और इसका असली सप्लायर कौन है। इसी बेहतरीन रणनीति का परिणाम रहा कि पुलिस सीधे इस बड़े अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचने में पूरी तरह कामयाब रही।
मेरठ के बड़े तस्कर की गिरफ्तारी से खुला देशव्यापी नेटवर्क
इस विशाल ड्रग सिंडिकेट के भंडाफोड़ की शुरुआत बीते दिनों 30 जून को हुई थी, जब गंज थाना पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर गंज थाना क्षेत्र में स्थित राजपूताना होटल के ठीक सामने एक विशेष नाकेबंदी की थी। इस दौरान पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के रहने वाले एक बड़े तस्कर अभिषेक कुमार को घेराबंदी करके दबोचा था। पुलिस ने जब अभिषेक कुमार के बैग और सामान की सघन तलाशी ली, तो उसके पास से कुल 10.710 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया, जिसे वह बहुत ही शातिर तरीके से छिपाकर ले जा रहा था।
पुलिस कस्टडी में लेकर जब तकनीकी विश्लेषकों और विवेचकों ने अभिषेक कुमार से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने इस पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। अभिषेक ने पुलिस को बताया कि वह ओडिशा के नक्सल प्रभावित और सुदूर सीमावर्ती इलाकों से गांजे और नशीली दवाओं की यह बड़ी खेप लेकर सड़क मार्ग के जरिए उत्तर प्रदेश के मेरठ और पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों में सप्लाई करने जा रहा था। इसके साथ ही उसने उन मुख्य नशा सौदागरों के नाम, मोबाइल नंबर और गुप्त ठिकानों की बेहद गोपनीय जानकारियां भी पुलिस के साथ साझा कीं, जिनसे उसने यह माल लिया था और जिन्हें रायपुर में डिलीवरी दी जानी थी।
पुलिस ने बिछाया जाल और ट्रैप लगाकर दबोचे गए चार और बड़े सौदागर
अभिषेक कुमार से मिले बेहद पुख्ता इनपुट्स, साइबर सेल की तकनीकी कड़ियों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और मुखबिरों से लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर संयुक्त पुलिस टीम को यह पुख्ता जानकारी मिली कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य मुख्य सदस्य भी बड़ी खेप की डिलीवरी लेने और वित्तीय लेन-देन का हिसाब करने के लिए रायपुर शहर की सीमा में प्रवेश करने वाले हैं।
इस सूचना पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने रायपुर के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख प्रवेश द्वारों पर योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए जाल में फंसे चार और मुख्य आरोपियों किशोर साहू, अजय विश्वकर्मा, शुभम साहू उर्फ बऊ और प्रिंस प्रजापति को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान इन आरोपियों के पास से बरामद हुई कुल सामग्री की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 10.70 लाख रुपये आंकी गई है।
मुख्य आरोपी किशोर साहू का लंबा आपराधिक इतिहास और सजा का रिकॉर्ड
| आरोपी का नाम और विवरण | आपराधिक इतिहास और कानूनी स्थिति | सिंडिकेट के भीतर प्रमुख भूमिका |
|---|---|---|
| किशोर साहू (मुख्य आरोपी) | महासमुंद के खल्लारी थाने में दर्ज एनडीपीएस केस में 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा प्राप्त, वर्तमान में हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर | अंतरराज्यीय नशा तस्करी सिंडिकेट का मुख्य संचालक, छत्तीसगढ़ में नेटवर्क प्रबंधन |
| अभिषेक कुमार (मेरठ, यूपी) | 30 जून को 10.710 किलो गांजे के साथ रायपुर के राजपूताना होटल के सामने से गिरफ्तार | ओडिशा से उत्तर प्रदेश तक माल का परिवहन और अंतरराज्यीय कूरियर |
| अजय विश्वकर्मा | रायपुर पुलिस द्वारा ताजा नाकेबंदी में गिरफ्तार, पुराना आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है | स्थानीय स्तर पर माल की री-पैकेजिंग और वितरण |
| शुभम साहू उर्फ बऊ | गंज थाना और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार | रायपुर और आस-पास के जिलों में ग्राहकों की तलाश और डिलीवरी |
| प्रंस प्रजापति | तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाकर गिरफ्तार | नेटवर्क के लिए लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और वित्तीय लेन-देन |
ओडिशा से उत्तर प्रदेश तक फैले इस काले साम्राज्य की कड़ियां
पुलिस की अब तक की प्राथमिक और तकनीकी जांच से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि यह कोई स्थानीय स्तर का छोटा गिरोह नहीं है, बल्कि यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों तक फैला हुआ एक बहुत बड़ा और सुसंगत संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क है। नशा माफियाओं ने कानून की नजरों से बचने के लिए उड़ीसा के दुर्गम इलाकों को अपना सोर्सिंग पॉइंट (माल इकट्ठा करने का स्थान) बना रखा था, जहां से छत्तीसगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश तक माल की सुरक्षित तस्करी की जा रही थी।
रायपुर पुलिस की जांच एजेंसियां और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स अब इस गिरोह के पूरे वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के विवरण, हवाला नेटवर्क, सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्टेशन के तरीकों और इन तस्करों को पर्दे के पीछे से संरक्षण देने वाले अन्य सफेदपोश सहयोगियों की बारीक से बारीक जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं और नशा तस्करी से अर्जित की गई अवैध संपत्तियों को भी कुर्क करने की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



