कार खरीदने से लेकर सर्विस तक बदल गए सारे नियम: जानिए कैसे AI बदल रहा है गाड़ियों का भविष्य
ऑटोमोबाइल उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दौर। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और एक्जोटेल के अधिकारियों से जानिए कैसे स्मार्ट कारें, डिजिटल सर्विसेज और पूर्व-अनुमानित देखभाल बदल रही है गाड़ियों का भविष्य।
रायपुर। जब आप कोई नई कार खरीदने जाते हैं, तो आमतौर पर दिमाग में क्या आता है? शायद गाड़ी की रफ्तार, उसका माइलेज, सुंदर लुक्स या फिर उसकी मजबूती। लेकिन अब समय तेजी से बदल चुका है। आज की नई पीढ़ी की गाड़ियों में सिर्फ इंजन की ताकत नहीं देखी जाती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि गाड़ी कितनी समझदार और डिजिटल रूप से कितनी एडवांस है। भारतीय ऑटोमोबाइल जगत इस समय एक बहुत बड़े और बेहद दिलचस्प बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे वाहन चलाने और उनकी देखभाल करने के अंदाज को ही बदल रही है।
हाल ही में इकोनॉमिक टाइम्स ऑटो के मंच पर हुई एक खास बातचीत में देश की जानी-मानी कार कंपनियों के दिग्गज चेहरे एक साथ नजर आए। मारुति सुजुकी इंडिया के डिजिटल प्रमुख डॉक्टर तपन साहू, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी स्वेन पाटुश्का और एक्जोटेल के मुख्य विपणन अधिकारी उदित अग्रवाल ने विस्तार से चर्चा की कि किस तरह यह नई तकनीक शोरूम की पहली पूछताछ से लेकर कार की बिक्री के बाद मिलने वाली हर एक सर्विस को बेहद सहज और इंसानी अहसास से भरपूर बना रही है।
पहियों पर चलता-फिरता कंप्यूटर, क्या हैं सॉफ्टवेयर संचालित वाहन
आज की आधुनिक गाड़ियां अब सिर्फ लोहे और पुर्जों से बनी मशीनें नहीं रह गई हैं, बल्कि वे एक तरह से पहियों पर चलते-फिरते स्मार्ट कंप्यूटर बन चुकी हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ इन्हें सॉफ्टवेयर संचालित वाहन कहते हैं।
टाटा मोटर्स के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी स्वेन पाटुश्का का मानना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि आपकी कार शोरूम से बाहर आने के बाद पुरानी नहीं पड़ती, बल्कि वक्त के साथ और भी स्मार्ट होती जाती है। ठीक उसी तरह जैसे हम अपने स्मार्टफोन को समय-समय पर अपडेट करते हैं, वैसे ही अब कार में लगे सॉफ्टवेयर भी घर बैठे ही इंटरनेट के जरिए अपडेट हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि कार की बैटरी परफॉर्मेंस, म्यूजिक सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े फीचर्स बिना किसी सर्विस सेंटर के चक्कर लगाए अपने आप बेहतर हो जाते हैं। भारतीय खरीदार भी अब इस डिजिटल बदलाव को खुशी-खुशी अपना रहे हैं और इन नए फीचर्स के लिए सहर्ष तैयार दिखते हैं।
अक्सर कार ड्राइवरों के साथ ऐसा होता है कि बीच रास्ते में अचानक कोई पुर्जा खराब हो गया या गाड़ी अचानक बंद पड़ गई। लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से अब ऐसा नहीं होगा। इसे पूर्व-अनुमानित रखरखाव कहते हैं। कार में लगे सैकड़ों छोटे-छोटे सेंसर और कंप्यूटर दिमाग चौबीसों घंटे गाड़ी की सेहत पर नजर रखते हैं।
मान लीजिए कि आपकी कार का ब्रेक पैड धीरे-धीरे घिस रहा है या फिर इंजन में कोई छोटी सी परेशानी जन्म ले रही है, तो कार का सिस्टम पहले ही ड्राइवर को डैशबोर्ड पर प्यार से आगाह कर देगा। इतना ही नहीं, यह समझदार सिस्टम खुद ही आपके नजदीकी ऑथराइज्ड वर्कशॉप में सर्विस का समय तय करने की सलाह भी दे देता है और वहां जरूरी सामान पहले से मंगवाने का इशारा कर देता है। मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां इस व्यवस्था को लागू कर रही हैं, ताकि ग्राहकों का कीमती समय बचे और वर्कशॉप में गाड़ी की तुरंत मरम्मत हो सके।
आपकी बोली समझेगी आपकी कार, व्यक्तिगत अहसास की नई शुरुआत
आजकल ऑटो कंपनियां हर ग्राहक को एक ही नजर से देखने के बजाय उनकी अपनी पसंद और सहूलियत के हिसाब से सुविधाएं तैयार कर रही हैं।
1. अपनी भाषा में बात कीजिए
मारुति सुजुकी इंडिया के डिजिटल हेड डॉक्टर तपन साहू बताते हैं कि जब आप गाड़ी के बारे में जानकारी लेने या टेस्ट ड्राइव बुक करने के लिए कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर जाते हैं, तो वहां मौजूद डिजिटल सहायक आपकी अपनी स्थानीय भाषा में बातें करते हैं। चाहे हिंदी हो, तमिल हो या बंगाली, आपको ऐसा महसूस ही नहीं होता कि आप किसी निर्जीव सिस्टम से बात कर रहे हैं।
2. मूड और जरूरत को समझने वाला साथी
कार के केबिन में बैठते ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वॉयस असिस्टेंट ड्राइवर की आवाज और उसकी आदतों को समझने लगता है। आपको बस अपनी आवाज में कहना होता है और कार का एसी तापमान ठीक कर देता है, आपका पसंदीदा संगीत बजा देता है या फिर रास्ते में मिलने वाले भारी ट्रैफिक से बचाकर आपको सही रास्ते पर ले जाता है।
बिक्री के बाद का सफर हुआ बेहद आसान
कस्टमर कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म एक्जोटेल के मुख्य विपणन अधिकारी उदित अग्रवाल का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री के बाद मिलने वाली सेवाओं में इस तकनीक ने बहुत बड़ा सुखद बदलाव लाया है। पुराने जमाने में सर्विस सेंटर के कस्टमर केयर पर लंबे समय तक फोन लगाए रखना या अपनी शिकायत का इंतजार करना अब बीते दिनों की बात होती जा रही है।
अब डिजिटल वॉयस असिस्टेंट ग्राहकों को बिल्कुल सही समय पर याद दिलाते हैं कि कार की सर्विस का समय आ गया है, इंश्योरेंस रिन्यू कराना है या वारंटी अपडेट करनी है। अगर कभी रात-बिरात आपकी गाड़ी रास्ते में खराब भी हो जाए, तो तकनीक तुरंत आपकी सही लोकेशन पहचान कर निकटतम मदद और सर्विस वैन को आपकी तरफ रवाना कर देती है।
नए दौर के स्टार्टअप्स और सुरक्षा की चुनौतियां
भारत के बड़े ऑटोमोबाइल ब्रांड्स इस तकनीकी क्रांति को और बेहतर बनाने के लिए देश के युवा टेक स्टार्टअप्स का सहारा ले रहे हैं। मारुति सुजुकी ने कई ऐसे नए स्टार्टअप्स के साथ हाथ मिलाया है जो गाड़ियों के सही मूल्यांकन, कारखानों की सुरक्षा और वर्कशॉप को स्मार्ट बनाने में नई सोच के साथ काम कर रहे हैं। वहीं टाटा मोटर्स अपनी गाड़ियों की गुणवत्ता सुधारने और खराबी का सटीक पता लगाने के लिए डिजिटल जुड़वां और आधुनिक जांच उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है।
तमाम सुविधाओं के बीच एक बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, और वह है ग्राहकों की निजता और डेटा सुरक्षा। जब कारें लगातार इंटरनेट से जुड़ी रहती हैं और हमारी लोकेशन या प्राथमिकताओं का डेटा दर्ज करती हैं, तो उपभोक्ताओं के मन में सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए ऑटोमोबाइल कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे तकनीक में नए प्रयोग करने के साथ-साथ ग्राहकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाएं।
कैसा होगा आने वाले दिनों का सफर
भारतीय ऑटो उद्योग अब केवल लोहे की बॉडी और पहियों को जोड़ने तक सीमित नहीं रहा; यह एक जीवंत और डिजिटल अनुभव बन चुका है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने ऑटो कंपनियों और आम कार मालिकों के बीच एक दोस्ताना और भरोसेमंद रिश्ता बना दिया है। आने वाले समय में भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियां केवल रफ्तार का जरिया नहीं होंगी, बल्कि वे हमारे सफर की एक समझदार, सुरक्षित और सच्ची साथी साबित होंगी।



