धमतरी में धर्म परिवर्तन के दबाव से त्रस्त युवक ने की खुदकुशी, पत्नी और ससुराल वालों को पांच साल की सजा
धमतरी जिले के पोटियाडीह में धर्म परिवर्तन का दबाव झेल रहे युवक लीनेश साहू की आत्महत्या मामले में अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी, सास-ससुर और साली समेत पांच लोगों को जेल भेज दिया है।

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026, न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां धर्म परिवर्तन के लगातार बढ़ते दबाव के कारण एक युवक को अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ी। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पोटियाडीह में रहने वाले लीनेश कुमार साहू ने पारिवारिक प्रताड़ना और मानसिक तनाव से तंग आकर फांसी लगा ली। इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई और ठोस सबूतों के आधार पर धमतरी के अपर सत्र न्यायालय ने मृतक की पत्नी, सास, ससुर, डेढ़ सास और साली को दोषी करार देते हुए सभी को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के मामलों में न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। यह घटना केवल एक परिवार के बिखरने की त्रासदी नहीं है, बल्कि उस मनोवैज्ञानिक दबाव को भी उजागर करती है जो धर्मांतरण के नाम पर लोगों पर थोपा जा रहा है।
पूरी घटना की शुरुआत अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम पोटियाडीह से हुई जब मृतक के चाचा खूबचंद साहू ने पुलिस को अपने भतीजे की मौत की सूचना दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि छह और सात दिसंबर 2024 की दरमियानी रात लीनेश कुमार साहू ने अपने मकान की ऊपरी मंजिल पर स्थित कमरे के वेंटिलेशन से लटककर फांसी लगा ली। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मर्ग कायम कर विवेचना शुरू की। कमरे की बारीकी से जांच करने पर जांच टीम को मृतक का मोबाइल फोन मिला जो इस पूरे मामले का सबसे अहम सुराग साबित हुआ। इस मोबाइल फोन ने उस मानसिक यातना की परतें खोल दीं जो लीनेश पिछले कई महीनों से अपने ही घर में बर्दाश्त कर रहा था। पुलिस की जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ा, मृतक की पत्नी करुणा साहू और रायपुर में रहने वाले उसके परिजनों की संदिग्ध भूमिका साफ होती चली गई।
मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को मृतक द्वारा आत्महत्या से ठीक पहले लिखा गया एक भावुक और सनसनीखेज मैसेज मिला। लीनेश ने अपने इस अंतिम संदेश को व्हाट्सएप स्टेटस पर भी लगाया था और इसे अपनी बहन के पति गुलशन साहू को भी भेजा था। इस विस्तृत संदेश में उसने साफ तौर पर लिखा था कि उसकी पत्नी करुणा साहू, सास गौरी साहू, ससुर राजकुमार साहू, डेढ़ सास किरण साहू और साली कनिष्का साहू उसे लगातार दूसरा धर्म अपनाने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं। इन सभी आरोपितों का संबंध रायपुर से है और ये लगातार धमतरी आकर या फोन के माध्यम से लीनेश और उसके बूढ़े माता-पिता पर धर्मांतरण का मानसिक दबाव बना रहे थे। पुलिस ने तुरंत इस डिजिटल साक्ष्य का स्क्रीनशॉट लेकर पंचनामा तैयार किया और मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया। इस अहम साक्ष्य ने पूरे मुकदमे की दिशा तय कर दी और आरोपितों को कानून के शिकंजे में लाने का रास्ता साफ कर दिया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने मृतक के पिता प्रेमनाथ साहू, मां सुमित्रा साहू और अन्य गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए, जिनसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि लीनेश और करुणा का विवाह सितंबर 2023 में पोटियाडीह के संत कबीर आश्रम में पारंपरिक तरीके से हुआ था। शादी के शुरुआती तीन-चार महीने सब कुछ ठीक-ठाक चला, लेकिन उसके बाद रायपुर निवासी ससुराल वालों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। पत्नी करुणा ने अपने मायके वालों के साथ मिलकर लीनेश और उसके माता-पिता पर अपना पैतृक धर्म छोड़ने और दूसरे धर्म की आस्था को अपनाने का दबाव डालना शुरू किया। जब भी लीनेश या उसके परिजन धर्मांतरण से इनकार करते, तो उनके साथ घर में भयंकर लड़ाई-झगड़ा किया जाता था और उन्हें अपमानित किया जाता था। इस रोज-रोज की कलह और मानसिक यातना ने लीनेश को इस कदर तोड़ दिया कि उसने मौत को गले लगाना ही एकमात्र रास्ता समझा।
पुलिस ने सभी गवाहों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाते हुए आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत गंभीर अपराध दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। अपर सत्र न्यायाधीश अर्चना भास्कर की अदालत में इस मामले की लंबी सुनवाई चली जिसमें शासन की ओर से लोक अभियोजक गितेश प्रजापति ने मजबूत पैरवी की। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद रायपुर के गंज थाना क्षेत्र अंतर्गत चूनाभट्ठी वार्ड निवासी ससुर राजकुमार साहू, सास गौरी साहू, पत्नी करुणा साहू, फाफाडीह निवासी डेढ़ सास किरण साहू और साली कनिष्का को आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी पाया। अदालत ने सभी पांचों दोषियों को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा मुकर्रर की और प्रत्येक पर पांच-पांच सौ रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।



