छत्तीसगढ़ POLICE प्रशासन में TRANSFER: विष्णुदेव साय सरकार की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, 24 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के अचानक TRANSFER से मचा हड़कंप
राज्य शासन ने प्रशासनिक स्तर पर कसावट लाने और कानून-व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए एक आईजी रेंज सहित 12 जिलों के पुलिस कप्तानों का रातों-रात किया तख्तापलट, मानसून सत्र से ठीक पहले गृह विभाग का यह कदम बेहद संवेदनशील और दूरगामी रणनीतिक बदलाव का संकेत है।

इस वृहद प्रशासनिक सर्जरी के केंद्र में न केवल मैदानी इलाकों के शांत जिले शामिल हैं, बल्कि धुर नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा कमान को भी पूरी तरह से बदल दिया गया है। राज्य विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक तीन दिन पहले उठाए गए इस कदम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही गलियारों में बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय में सामने आई कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने और मैदानी पुलिसिंग को अधिक आक्रामक व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के स्तर पर इस बड़ी सर्जरी को हरी झंडी दी गई है।
आईजी रेंज और पुलिस मुख्यालय के शीर्ष स्तर पर चौंकाने वाले बड़े बदलाव
शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल: इस पूरे फेरबदल की सबसे बड़ी और प्रमुख सुगबुगाहट पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी स्तर पर देखने को मिली है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय कुमार यादव को एक बार फिर से मैदानी मोर्चे पर बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे अब तक नेताजी सुभाषचंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी के निदेशक पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे, जहां से हटाकर उन्हें अब राजनांदगांव रेंज का नया पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। राजनांदगांव महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटा होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और वहां अजय कुमार यादव की तैनाती सुरक्षा तंत्र को नया आयाम देगी।
इसके विपरीत, राजनांदगांव रेंज के निवर्तमान पुलिस महानिरीक्षक बालाजी राव सोमावर को मैदानी जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर में महानिरीक्षक के पद पर लूप लाइन में भेज दिया गया है। ठीक इसी तरह, बस्तर क्षेत्र में सीएएफ के आईजी के रूप में तैनात रहे प्रशांत कुमार अग्रवाल को भी मैदानी मोर्चे से हटाकर पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर में नई पदस्थापना दी गई है। इन दोनों बड़े अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय बुलाए जाने को लेकर प्रशासनिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नक्सल मोर्चे और मैदानी इलाकों के 12 जिलों को मिले नए पुलिस कप्तान
एसपी स्तर पर व्यापक फेरबदल: सरकार ने जमीनी स्तर पर जनता के बीच पुलिस की छवि सुधारने और अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए 12 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पूरी तरह से बदल दिया है। बस्तर संभाग के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जिलों में शामिल दंतेवाड़ा की कमान अब चंद्रमोहन सिंह के हाथों में होगी। वहीं, बीजापुर जिले के नए एसपी के रूप में उमेश प्रसाद गुप्ता को नियुक्त किया गया है, जबकि सुकमा जिले की अत्यंत चुनौतीपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी मयंक गुर्जर को सौंपी गई है। नारायणपुर जैसे घने जंगलों वाले और अबूझमाड़ से सटे जिले की कमान अब संदीप कुमार पटेल संभालेंगे।
मैदानी और कृषि प्रधान जिलों की बात करें तो भावना पांडेय को धमतरी जिले का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है, जहां उनके सामने स्थानीय अपराधों और वन क्षेत्रों की सुरक्षा को संतुलित करने की चुनौती होगी। कोयलांचल क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध कोरिया जिले की जिम्मेदारी हरीश राठौर को दी गई है। बलौदाबाजार-भाटापारा जैसे औद्योगिक और पिछले दिनों सामाजिक तनाव का केंद्र रहे जिले में कानून व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए राय गौरव रामप्रवेश को नया एसपी नियुक्त किया गया है।
इसके अतिरिक्त, चव्हाण किरण गंगाराम को बालोद जिले का पुलिस कप्तान बनाया गया है, जबकि सूरजपुर जिले की सुरक्षा व्यवस्था अब योगेश कुमार पटेल के कंधों पर होगी। बेमेतरा जिले में कानून का राज स्थापित करने के लिए त्रिलोक बंसल को तैनात किया गया है, और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे नवगठित जिले की कमान सुनील शर्मा को सौंपी गई है, जो अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
कबीरधाम जिले का तबादला फिर बना राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का मुख्य विषय
गृहमंत्री के गृहक्षेत्र में बड़ा कदम: इस पूरी तबादला सूची में सबसे ज्यादा ध्यान जिस एक जिले ने खींचा है, वह है कबीरधाम (कवर्धा)। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा का गृहक्षेत्र होने के कारण यह जिला हमेशा से ही प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रहा है। इस फेरबदल के तहत जितेंद्र कुमार यादव को कबीरधाम जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
कवर्धा में पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रशासनिक तालमेल और स्थानीय कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार विपक्ष के निशाने पर रहने के कारण यह बदलाव किया गया है। गृहमंत्री के अपने ही क्षेत्र में बार-बार एसपी के बदले जाने को राजनीतिक विश्लेषक इस रूप में देख रहे हैं कि सरकार किसी भी कीमत पर अपने सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक गढ़ में कानून व्यवस्था की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करना चाहती है। जितेंद्र कुमार यादव के सामने कवर्धा में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और पुलिस और जनता के बीच के विश्वास को दोबारा मजबूत करने की एक बड़ी चुनौती होगी।
पुलिस मुख्यालय में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पदस्थापना और डीआईजी स्तर पर कसावट
अन्य महत्वपूर्ण नाम: 24 अधिकारियों की इस बड़ी सूची में केवल जिलों के एसपी और आईजी ही प्रभावित नहीं हुए हैं, बल्कि पुलिस मुख्यालय के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए डीआईजी और एआईजी स्तर के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत कुमार ठाकुर और रामकृष्ण साहू को पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर में पुलिस उपमहानिरीक्षक यानी डीआईजी के पद पर पदस्थ किया गया है।
इसी क्रम में, धर्मेंद्र छबाई को आठवीं वाहिनी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (SAF), राजनांदगांव का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण फील्ड और प्रशासनिक पद दिए गए हैं, जिसके तहत श्वेता राजमणि को डीआईजी, एसएएफ, जगदलपुर (बस्तर) बनाया गया है, जो बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के समन्वय में बड़ी भूमिका निभाएंगी। राजेश कुकरेजा को पुलिस मुख्यालय में डीआईजी की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि भावना गुप्ता को एआईजी के रूप में पुलिस मुख्यालय में अटैच किया गया है। तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी सूरज सिंह परिहार को चौथी वाहिनी का कमांडेंट नियुक्त किया गया है।
आगामी मानसून सत्र और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की दूरगामी रणनीति
रणनीतिक बदलाव: प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार का यह बड़ा कदम केवल नियमित स्थानांतरण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। विधानसभा का मानसून सत्र तीन दिनों के भीतर शुरू होने वाला है, जहां विपक्ष लगातार राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, चोरी, डकैती और नक्सली गतिविधियों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे समय में इतनी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करके सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह अपराध नियंत्रण को लेकर पूरी तरह से गंभीर है।
नए और युवा अधिकारियों को कप्तानी सौंपकर सरकार ने मैदानी पुलिसिंग में नई ऊर्जा और तकनीकी समझ को शामिल करने का प्रयास किया है, जिससे आने वाले दिनों में अपराधियों पर नकेल कसी जा सके और आम नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल का अहसास हो सके।



