भगवा वस्त्र, कांधे पर कांवड़: BJP विधायक भावना बोहरा की 151 किमी पदयात्रा, सनातन में लौटे 16 बैगा आदिवासी भी शामिल
बीजेपी विधायक भावना बोहरा अमरकंटक से भोरमदेव तक 151 किमी की कांवड़ यात्रा निकाल रही हैं। इसमें सनातन धर्म में लौटे 16 बैगा आदिवासियों समेत 700 से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हैं।

इस कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात इसमें शामिल श्रद्धालुओं की विविधता है। यात्रा में उन 16 बैगा आदिवासियों की विशेष भागीदारी देखी जा रही है, जिनकी हाल ही में सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ हुई है। कभी किसी वजह से अपनी मूल परंपराओं से दूर हो चुके ये विशेष संरक्षित जनजातीय (PVTG) समुदाय के लोग अब कांधे पर कांवड़ उठाए बोल बम के जयकारों के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत 10 अगस्त को अमरकंटक में नर्मदा पूजन और जलाभिषेक के साथ हुई थी। पहले दिन करीब 500 कांवड़िए इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए थे, लेकिन यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, श्रद्धालुओं का कारवां बढ़ता ही जा रहा है। यात्रा के दूसरे और तीसरे दिन अचनाकमार टाइगर रिजर्व के घने जंगलों और लमनी गांव जैसे बीहड़ इलाकों से गुजरते हुए कांवड़ियों की संख्या बढ़कर 700 के पार पहुंच गई।
घने जंगलों, नुकीले पत्थरों, नालों और कीचड़ भरे उबड़-खाबड़ रास्तों के बीच नंगे पांव चल रहे शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। विधायक भावना बोहरा खुद हाथों में कांवड़ थामे सबसे आगे चल रही हैं। उन्होंने बताया कि रोज औसतन 25 से 30 किलोमीटर की पैदल दूरी तय की जा रही है।
अपनी इस यात्रा पर बात करते हुए भावना बोहरा ने कहा, “रास्ता भले ही पथरीला और दुर्गम है, लेकिन भक्तों के मन में भगवान भोलेनाथ और मां नर्मदा के प्रति अटूट विश्वास है। जब कंधे पर कांवड़ होती है, तो शारीरिक थकान का अहसास गायब हो जाता है। हमारे साथ ‘घर वापसी’ करने वाले 16 बैगा भाई-बहन भी पूरी निष्ठा से चल रहे हैं। उनकी यह शिवभक्ति उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है जो किसी भ्रम या प्रलोभन में आकर अपनी संस्कृति और सनातन जड़ों से दूर हो जाते हैं।”
यात्रा में शामिल बैगा समुदाय के श्रद्धालुओं का उत्साह भी देखने लायक है। बैगा समाज के एक सदस्य चतुरसिंह ने बताया कि वे विधायक भावना बोहरा को केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि अपनी माता और अभिभावक के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में वापस लौटकर और कांवड़ उठाकर भोरमदेव बाबा का जलाभिषेक करने जाने में उन्हें असीम आत्मशांति का अनुभव हो रहा है।
इस कांवड़ यात्रा में लैंगिक और सामाजिक रूढ़ियों को टूटते हुए भी देखा जा सकता है। यात्रा में भारी संख्या में गृहिणी महिलाएं, कॉलेज और स्कूल की छात्राएं तथा दूर-दराज के गांवों से आई ग्रामीण महिलाएं शामिल हैं। आमतौर पर चौखट के भीतर रहने वाली महिलाएं भी भारी कांवड़ उठाकर बोल बम के नारे लगाते हुए जंगलों और पहाड़ियों को पार कर रही हैं।
भावना बोहरा लगातार दूसरे साल अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक इस 151 किलोमीटर लंबी विशाल कांवड़ यात्रा का आयोजन कर रही हैं। उनका मानना है कि इस आयोजन का मकसद केवल धार्मिक अनुष्ठान पूरा करना नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों को एक सूत्र में पिरोना और पूरे छत्तीसगढ़ की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है।
कांवड़ियों का यह जत्था आगामी दो दिनों में अपनी यात्रा पूरी कर कबीरधाम के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर पहुंचेगा। वहां भगवान शिव के बाल रूप ‘छत्तीसगढ़ के खजुराहो’ कहे जाने वाले भोरमदेव बाबा को अमरकंटक से लाया गया पवित्र नर्मदा जल अर्पित किया जाएगा। यात्रा के समापन पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और महाभंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।



