AdministrationBig BreakingChhattisgarhFeaturedHealth

कटघोरा के हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल पर गिरी गाज, आयुष्मान योजना में गड़बड़ी पर एक साल के लिए हुआ निलंबित

कोरबा के कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल पर आयुष्मान योजना में नकद वसूली और फर्जी मोबाइल नंबर दर्ज करने पर कार्रवाई हुई है। अस्पताल का पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित किया गया।



रायपुर, 06 नवंबर 2026, न्यूज डेस्क। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गरीबों के नि:शुल्क इलाज में सेंधमारी करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा हंटर चलाया है। कोरबा के कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का आयुष्मान पंजीयन एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया है। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केशरी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के जुलाई 2026 में जारी मार्गदर्शी सिद्धांतों की कंडिका 6.4.1 के तहत यह सख्त दंडात्मक आदेश जारी करते हुए अस्पताल में योजना के तहत नए मरीजों की भर्ती पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अस्पताल परिसर से आयुष्मान के सभी प्रचार बोर्ड तत्काल हटाने का फरमान जारी किया गया है। लापरवाही अब भारी पड़ चुकी है।

कार्रवाई की नींव 30 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग के विशेष जांच दल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान पड़ी। जांच अधिकारियों ने जब इनडोर पेशेंट विभाग के अभिलेखों और भर्ती फाइलों का भौतिक सत्यापन शुरू किया, तो वित्तीय जालसाजी की परतें देखकर सब दंग रह गए। फाइलों में भारी हेराफेरी मिली। अस्पताल की पंजिकाओं में दर्ज मरीजों के विवरण में से 68 ऐसे मोबाइल नंबर दर्ज मिले, जो या तो पूरी तरह फर्जी थे अथवा लंबे समय से सेवा से बाहर पाए गए। यह साजिश शासन की टेली-वेरिफिकेशन और क्रॉस-चेकिंग प्रणाली को ठप करने के लिए रची गई थी। टीम ने जब पैथोलॉजी और सोनोग्राफी रिपोर्ट मांगी, तो प्रबंधन कोई दस्तावेज नहीं दे सका। रिकॉर्ड गायब थे।

मुफ्त इलाज के नाम पर गरीबों की जेब काटी जा रही थी। योजना के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रबंधन द्वारा भर्ती मरीजों के परिजनों से दवाओं, जांच और ऑपरेशन के नाम पर खुलेआम नकद राशि की वसूली की जा रही थी। नवजात शिशुओं के इलाज में भी बड़ा खेल हुआ। स्वास्थ्य परीक्षण में सामान्य पाए गए नवजात बच्चों को भी कई दिनों तक नर्सरी और एनआईसीयू में भर्ती दिखाकर शासन के खजाने से भारी-भरकम पैकेज क्लेम मंजूर कराने की कोशिश की गई। नोटिस पर अस्पताल का जवाब गोलमोल रहा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रबंधन के स्पष्टीकरण को आधारहीन बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।

कोरबा और बिलासपुर के पूरे अंचल में निजी अस्पतालों की मनमानी लगातार गहराती जा रही है। कटघोरा, दीपका और गेवरा जैसे कोयला खदानों से घिरे ग्रामीण इलाकों के भोले-भाले कामगारों को बड़े-बड़े बोर्ड दिखाकर फांसा जाता है। ग्रामीण आसानी से झांसे में आ जाते हैं। अस्पताल में कदम रखते ही उनका आयुष्मान कार्ड स्वाइप कराकर सरकारी फंड ब्लॉक कर दिया जाता है और फिर गंभीर बीमारी का डर दिखाकर परिजनों से नकद पैसे भी ऐंठ लिए जाते हैं। हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल इसी तरह की कार्यशैली पर चल रहा था। अब सख्ती शुरू हो चुकी है।

निलंबन आदेश जारी होते ही अस्पताल परिसर में संचालित आयुष्मान हेल्पडेस्क को तत्काल प्रभाव से सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्य द्वार, प्रतीक्षालय और वार्डों में लगे योजना के सभी फ्लेक्स बोर्ड चौबीस घंटे के भीतर हटाने का कड़ा निर्देश जारी हुआ है। कोई नया मरीज भर्ती नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल वर्तमान में दाखिल पात्र मरीजों का उपचार योजना के तहत पूरा कराया जाएगा, ताकि किसी की जान जोखिम में न पड़े। स्थानीय नागरिकों ने अब अस्पताल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की आवाज बुलंद की है। आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग अब हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल द्वारा पिछले दो सालों में पास कराए गए सभी संदिग्ध क्लेमों का ऑडिट कराएगा। स्टेट एंटी-फ्रॉड यूनिट को अस्पताल के सभी डिजिटल बिलों और वाउचरों की तकनीकी जांच का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे हड़पी गई राशि की वसूली सुनिश्चित की जा सके। फर्जी भुगतान की रिकवरी तय है। जिला स्वास्थ्य महकमे के तीन विशेष उड़नदस्ते सोमवार सुबह दस बजे से कटघोरा और कोरबा शहर के अन्य सभी निजी नर्सिंग होमों के रिकॉर्ड्स का औचक निरीक्षण शुरू करेंगे।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button