सक्ती-खरसिया रेलखंड पर शुरू हुई ऑटोमैटिक सिग्नलिंग, बिलासपुर रूट पर अब तेज रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
सक्ती-खरसिया रेलखंड पर 32 नए स्वचालित सिग्नलों के साथ आधुनिक ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू हुई, जिससे बिलासपुर रूट पर ट्रेनों का परिचालन तेज और सुरक्षित होगा।

रायपुर, 06 नवंबर 2026, न्यूज डेस्क। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग स्थित बिलासपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन के अंतर्गत सक्ती-झाराडीह-खरसिया रेलखंड पर अत्याधुनिक ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का संचालन शुरू कर दिया है। तकनीकी बदलाव से लाइन क्षमता बढ़ गई है। कुल 16 रूट किलोमीटर लंबे इस रेलखंड में चार समानांतर लाइनें बिछाई गई हैं, जो 32 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर परिचालन क्षमता प्रदान करती हैं। अब ट्रेनें बिना अनावश्यक रुकावट के नियंत्रित दूरी पर एक-दूसरे के पीछे लगातार चल सकेंगी।
रेलवे प्रशासन ने इस पूरे सेक्शन में 32 नए स्वचालित सिग्नल स्थापित किए हैं, जिन्हें अत्याधुनिक कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग नेटवर्क से जोड़ा गया है। यह व्यवस्था पुरानी सिग्नलिंग से अधिक सुरक्षित है। ट्रेनों की वास्तविक गति और ट्रैक पर उनकी सटीक स्थिति का पता लगाने के उद्देश्य से मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर के 180 डिटेक्शन पॉइंट लगाए गए हैं। तकनीकी खराबी रोकने के लिए सिग्नलिंग और क्वाड केबलों से अर्थ लीकेज डिटेक्टर जोड़े गए हैं। सिस्टम 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी करता है।
ऑटोमेशन के साथ सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के लिए आधुनिक डेटालॉगर, स्वचालित फ्यूज चेंजओवर और केंद्रीय फायर अलार्म सिस्टम भी तैनात किए गए हैं। ऊर्जा और औद्योगिक माल ढुलाई को बड़ी गति मिलेगी। इस व्यस्त रेलमार्ग से होकर प्रतिदिन गुजरने वाली कोयला, इस्पात, सीमेंट और पावर प्लांट की मालगाड़ियों को ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधा मिलने से बिलासपुर मंडल में यात्री ट्रेनों का समयपालन भी सुधरेगा। अगले चरण में बिलासपुर से आगे के संवेदनशील ब्लॉकों में इंटरलॉकिंग टेस्टिंग पूरी की जाएगी।



