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पतझड़ के पत्तों ने कहा ना रौदों हमें पांव में ; पिछली रूत में तुम बैठे थे हमारी छांव में..

शंकर पांडे (वरिष्ठ पत्रकार) ऍमए, बीएस. सी, एलएल.बी, बीजे (पत्रका रिता) हैं।पिछले 46 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैँ, छत्तीसगढ़ पर 6 पुस्तकें भी लिख चुके हैं, इन्होंने प्रिंट मिडिया सहित इलेक्ट्रानिक मिडिया में भी कार्य किया है।



‘आइना-ए-छत्तीसगढ़ ‘

पतझड़ के पत्तों ने कहा
ना रौदों हमें पांव में ; पिछली रूत में तुम बैठे
थे हमारी छांव में….

शंकर पांडेय, रायपुर, 19/09/2026

रायपुर, 19/09/2026, शंकर पांडे ।

दिल्ली के पॉश लुटियंस इलाके में केंद्रीय मंत्रियों केआवासों के रखरखाव पर हुए भारी खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आर टी आई से आए आंकड़ों का हवाला देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार की प्राथ मिकताओं पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुता बिक,पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय मंत्रियों के सर कारी बंगलों के रख रखाव पर करीब ₹547. 68 करोड़ खर्च किए गए।यह खर्च समय के साथ लगातार बढ़ा है।आंकड़ों के अनुसार 20/14/15 में आवासों के रखरखाव पर लगभग ₹27 करोड़ खर्च हुए थे। वहीं, 2025-26 में यह राशि बढ़कर करीब ₹92 करोड़ तक पहुंच गई, जिसे अवधि का सबसे अधिक वार्षिक खर्च बताया जा रहा है।

सीजेपी,सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाया,कॉक रोच जनता पार्टी ने आंकड़ों को लेकरसवाल किया कि जब सरकारी आवासों के रखरखाव पर इतनी बड़ी रकम खर्च की जा रही है, तो इसी तरह के संसाधनों का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में नहीं किया जा सकता ? पार्टी का तर्क है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर भवन, साफ-सफाई, शौचालय, पेय जल, प्रयोगशालाएं और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर खर्च का लाभ बच्चों को मिल सकता है ! मंत्रियों के आवासों पर खर्च को लेकर आए आंकड़ों ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, क्या सरकारी सुविधाओं के रखरखाव पर बढ़ता खर्च और आम जनता की बुनियादी जरूरतों पर होने वाला खर्च सही संतुलन में है हालांकि, बंगलों के रखरखाव से जुड़े खर्च में मरम्मत, नवीनीकरण अन्य सर कारी कार्य शामिल हो सकते हैं इस लिए केवल कुल राशि के आधार पर खर्च को अनावश्यक बताना भी पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।फिलहाल, सीजेपी के सवाल ने सर कारी खर्च बनाम शिक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं की प्राथमिकता को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।

हसदेव बचाओ, तारा कोल, ब्लाक नीलामी का विरोध

छत्तीसगढ़ के जैव विवि धता से भरपूर हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित तारा कोल ब्लॉक (तारा कोयला खदान) इस समय अपनी नीलामी पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर भारी राजनीतिक और सामाजिक विवादों के केंद्र में है। हाल ही में वाणिज्यिक कोयला खदानों की 15 वें दौर की नीलामी के तहत तारा (संशोधित) कोल ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिसे सीजी सिन एंड गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड (अडानी एंटर प्राइजेज की सहायक कंपनी) को आवंटित किया गया है।छग के हसदेव अरण्य में तारा (संशोधित) ब्लॉक की नीलामी को ले राज नीतिक, पर्यावरणीय विरोध शुरू हो गया है।अभियान चलानेवाले समूहों और कांग्रेस का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने खुद 2023 में केंद्र से औपचारिकरूप से अनुरोध किया था कि तारा समेत 9 कोयला ब्लॉकों को नीलामी की प्रक्रिया से बाहर रखा जाए। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन (सीबीए), हस देवअरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने नीलामी रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है वन क्षेत्र में एक कोयला ब्लॉक खोलना जुलाई 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव और राज्य सर कार द्वारा पहले दिए गए ज्ञापनों के विपरीत है।खास बात यह है 23 जून, 2023 को छग खनिज संसाधन विभाग ने केंद्रीय कोयला मंत्रा लय को भेजे गए एक पत्र से पता चलता है राज्य ने नीलामी की प्रस्तावित सूची से 9 कोयला ब्लॉकों कोबाहर रखने का अनुरोध किया था।इन ब्लॉकों में तारा, केरेकोमा कोंडर, टेंडुआ मुडी, झिलगा बारपाली, बारपाली करमी टिकरा, बताती कोलगा नॉर्थईस्ट बताती कोलगा ईस्टऔर फतेहपुर साउथ शामिल थे, राज्य सरकार के पत्र में 26 जुलाई, 2022 को विधानसभा में सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव का उल्लेख किया गया था, जिसमें हसदेव क्षेत्र में आवंटित कोयला ब्लॉकों को रद्द करनेकी मांग की गई थी।कांग्रेस के महासचिव, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य की भाजपा सर कार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हसदेव अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी की गई है, सीधे तौर पर आदिवासियों के जीवन और पर्यावरण के साथ खिल वाड़ है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि हसदेव और बांगो बांध इलाके की जीवनदायिनी हैं।इस क्षेत्र में उत्खनन होता है, लाखों पेड़ काटे जाएंगे और यहाँ का पर्यावरण भारी रूप से प्रभावित होगा। याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने लेमरू एलीफेंट अभ्यारण्य के लिए 1950 वर्गकिमी क्षेत्र को संरक्षित किया था। बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि एक आदिवासी सीएम होने के बावजूद विष्णु साय आदिवासियों, जंगलों के हित का ध्यान न रख ‘अडानी समूह ‘ के हितों का ख्याल रखा है और खुद केंद्र को पत्र लिख कर ‘ताराकोल’ ब्लॉक की नीलामी की अनु शंसा की।बघेल ने स्पष्ट किया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 26जुलाई 2022 को छग विधान सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पासकर हसदेव अरण्य में किसी भी कोल ब्लॉक का आवंटन नीलामी न हो। इसके अलावा 23 जून 2023 को तारा सहित 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने का पत्र भेजा गया था,19 अक्टू बर 23 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारासहित 40 कोल ब्लॉकों कोडी नोटिफाई कर दिया था।इसके बावजूद भाजपा सरकार ने दिसंबर 2025 में इसके लिए फिर से पत्र लिखा। कांग्रेस नेता ने बतायाकि तारा कोल ब्लॉक लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र मेंफैला है,जिसमें 4 हजार एकड़ सेअधिक घना जंगल है। जिससे 10 लाख से अधिक पेड़ों को काटा जाएगा जिससे लेमरू एलीफेंट रिजर्व के चारों ओर खनन होने सेराष्ट्रीय धरोहर पशु हाथियों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही, कई अन्य दुर्लभ वन्य जीव प्रजातियां खतरे में पड़ जाएंगी। यह ब्लॉक अडानी एंटरप्राइजेज की सहयोगीकंपनी कीसब्सि डियरी को मिला है।

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झीरम घाटी हादसा, सभी को फांसी

जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने 13 साल पुराने झीरम घाटी हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। 25 मई 2013 को हुए इस नक्सली हमले में कांग्रेस केबड़े नेताओं समेत 28-29 लोग मारे गए थे। देशके बहुचर्चित 13 साल पुराने झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में एनआईए की अदालत के विशेष न्याय धीश अजय सिंह राज पूत ने 10 आरोपियों प्रमिला मोडियम उर्फ ज्योति, चैतू लेकाम सुमि त्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम,मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मडकम,मडकम देवा, जोगा मडकमी, बंजामी सना, महादेव नाग को 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों के हत्या के प्रयास का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए आरोपियों को एक माह का समय दिया गया है। उल्लेखनीय है कि 25 मई 2013 को सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को दरभा थाना की झीरम घाटी में नक्सलियों ने निशाना बनाया था। घात लगा किये गए इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठनेताओं कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियों समेत 32 लोगों की मौत हुई थी। हमले में तब के कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई लोगों की जान गई थी। इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया था।

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फाँसी की सजा, आपदा में अवसर

रायपुर सेंट्रल जेल में फिलहाल 4 कैदी फाँसी की सज़ा के क्रियान्वयन का इंतज़ार कर रहे हैं। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट भी उनकी मौत की सज़ा बरकरार रख चुका है। इनमें एक पति-पत्नी नरबलि मामले में दोषी हैं, जबकि अन्य दो कैदी अलग-अलग जघन्य हत्या के मामलों मेंफाँसी की सज़ा पाए हुए हैंअब इनके पास अंतिम विक ल्प केवल राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका ही बचा है। जेल मैन्युअल में फाँसी सज़ा पाए कैदियों को भोजन की मात्रा पर कोई निर्धारित सीमा नहीं होती। वे अपनी इच्छा से हीं भोजन ले सकते हैं। इसके विपरीत, अन्य कैदियों को तय संख्या में रोटियाँ तथा निर्धारित मात्रा मेंचावल, दाल, सब्ज़ी दी जाती है। ये चारों कैदी सामान्य कैदियों की तुलना में लगभग चार गुना भोजन लेते हैं। जितना खा नहीं पाते,उसका एक हिस्सा जेल के भीतर संपन्न कैदियों को बेच देते हैं। यानी मौत का इंतज़ार कर रहा व्यक्ति आपदा में अवसर ढूँढ़कर व्या पार करना नहीं भूलता।रायपुर सेंट्रल जेल में आख़िरी बार फाँसी 1978 में बैजू नामक कैदी को दी गई थी।

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और अब बस

* पीएम नरेंद्र मोदी के जन्म दिन,सार्वजानिक सेवा के 25 साल पूरे होने पर छ्ग में भी कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

* धमतरी में सांड से परेशान लोगों ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

* छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग पेपर लीक मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के तत्का लीन ओएसडी चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया था। इडीके अनुसार चेतन के बैंक खाते में 170 ट्रांजेक्शन के जरिए 66. 64 लाख कैश जमा हुए। चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं।

‘आईना-ए-छत्तीसगढ़’

(कॉलम 21सालों से लगातार)

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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