श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति में ‘रक्षासूत्र’ का महापर्व, संस्थापक कुबेर राठी को सैकड़ों बहनों ने बांधी राखी
हर धर्म की बहनों ने समाजसेवी कुबेर राठी को बांधा रक्षासूत्र,कुबेर राठी बोले-यह केवल धागा नहीं, विश्वास का अमर कवच है

रायपुर । छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जहां का इतिहास समरसता और भ्रातृत्व के अमर प्रसंगों से सुशोभित रहा है, वहां इस वर्ष रक्षाबंधन का महापर्व पौराणिक वैभव और अप्रतिम सामाजिक सौहार्द के साथ संपन्न हुआ। जिस प्रकार सतयुग में माता शची ने देवराज इंद्र को तथा द्वापर में द्रौपदी ने द्वारकाधीश श्री कृष्ण के घाव पर अपनी साड़ी का आंचल बांधकर अभेद्य रक्षा-कवच निर्मित किया था, ठीक उसी भक्ति और विश्वास के भाव के साथ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रक्षासूत्र बांधने का यह पावन अनुष्ठान आयोजित किया गया।

राजधानी स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति में रक्षाबंधन पर्व अभूतपूर्व हर्षोल्लास एवं गरिमा के साथ मनाया गया। इस पुण्य अवसर पर समिति के संस्थापक एवं प्रख्यात समाजसेवी कुबेर राठी की कलाई पर विभिन्न सम्प्रदायों की सैकड़ों बहनों ने रक्षा-सूत्र पिरोकर पौराणिक परंपराओं को जीवंत कर दिया।

संस्थापक एवं समाजसेवी कुबेर राठी ने भावविभोर होकर कहा कि यह भाई-बहन का पवित्र त्योहार मात्र एक भौतिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, मर्यादा और असीम निष्ठा का अमर प्रतीक है। पौराणिक काल से ही रक्षासूत्र का अर्थ अपने जन की विपत्तियों से रक्षा करने का संकल्प रहा है। आज जब बहनें अपने भाई की कलाई पर यह धागा बांधती हैं, तो वे उसमें अपने संपूर्ण विश्वास को समाहित कर देती हैं।

समाज सेवी कुबेर राठी ने आगे कहा कि यह रक्षासूत्र कोई साधारण सूत का धागा नहीं, अपितु एक ऐसा आत्मिक कवच है जो समाज की कुरीतियों, संकीर्णताओं और संकटों को परास्त करने की शक्ति देता है। मेरा यह दायित्व है कि मैं इस रक्षासूत्र की मर्यादा को अपने प्राणों से बढ़कर संभालूं और प्रत्येक बहन के अधिकार, सम्मान तथा सुरक्षा के लिए सदैव ढाल बनकर खड़ा रहूं।

इस पावन अवसर पर समरसता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां धार्मिक और सामाजिक भेद पूरी तरह तिरोहित हो गए। समारोह में लगभग 200 से 250 महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई—सभी धर्मों तथा हर आयु वर्ग की बहनों ने अत्यंत श्रद्धा से समाजसेवी कुबेर राठी की कलाई पर राखी बांधी।

कुबेर राठी ने भी सनातन परंपरा के अनुसार सभी बहनों के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया, उन्हें रक्षा का अटल संकल्प दिया और उपहार स्वरूप अपना स्नेह भेंट किया ।



