रायपुर के सरकंडा में शुरू हुआ ग्रेन एटीएम, अब लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, बायोमेट्रिक लगाते ही मशीन से मिलेगा राशन
रायपुर के सरकंडा में शुरू हुए अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम से अब बायोमेट्रिक लगाते ही मिनटों में मिलेगा राशन, लंबी लाइनों से मिलेगी राहत।

13 अगस्त 2026 | रायपुर: राशन दुकान पर घंटों लाइन में खड़े रहना अब रायपुर के लोगों के लिए पुरानी बात होने वाली है। शहर के सरकंडा इलाके में शुरू हुई अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम व्यवस्था ने राशन वितरण के पूरे तरीके को बदल दिया है। अब हितग्राही बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करते ही स्क्रीन पर अपनी पात्रता देख सकते हैं और कुछ ही मिनटों में तय मात्रा का अनाज मशीन से सीधे थैले में भरवा सकते हैं। यह पहल छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस में तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक नया कदम मानी जा रही है।
अभी तक राशन दुकानों पर वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह मैनुअल रही है। दुकानदार या कर्मचारी हाथ से अनाज तौलते थे, कई बार लाइन लंबी होने पर हितग्राहियों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। तौल को लेकर भी अक्सर शिकायतें आती रही हैं कि तय मात्रा से कम अनाज मिलता है। इसी तरह की समस्याओं को दूर करने के मकसद से डिजिटल और मशीन आधारित वितरण प्रणाली की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और अब सरकंडा से इसकी शुरुआत कर दी गई है।
ग्रेन एटीएम की कार्यप्रणाली को समझें तो यह प्रक्रिया बेहद सीधी और सरल रखी गई है। हितग्राही सबसे पहले मशीन पर अपना बायोमेट्रिक यानी फिंगरप्रिंट स्कैन कराता है। प्रमाणीकरण होते ही स्क्रीन पर उसकी पात्रता के अनुसार मिलने वाले राशन की पूरी जानकारी और मात्रा दिखाई देने लगती है। हितग्राही जानकारी देखकर पुष्टि करता है, इसके बाद डिस्पेंसर के ठीक नीचे अपना थैला रखता है। पुष्टि मिलते ही मशीन तय मात्रा में चावल सीधे थैले में भर देती है। पूरी प्रक्रिया में न तो कोई हाथ से तौल होती है और न ही किसी तरह का मैनुअल हस्तक्षेप, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश काफी कम हो जाती है।
चिंगराजपारा की रहने वाली हितग्राही प्रीति मानिकपुरी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि अब उन्हें लंबी लाइन में खड़े होकर इंतजार नहीं करना पड़ता। उनके मुताबिक मशीन के जरिए राशन मिलने से पूरी प्रक्रिया आसान हो गई है और तौल को लेकर जो पहले संदेह रहता था, वह अब पूरी तरह खत्म हो गया है। इसी तरह एक और हितग्राही दुर्गेश कुमार यादव ने बताया कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद स्क्रीन पर उनकी पात्रता के अनुसार मिलने वाले राशन की मात्रा साफ तौर पर दिख जाती है। उनका कहना है कि पुष्टि करने के बाद डिस्पेंसर के नीचे थैला रखते ही तय मात्रा में चावल सीधे थैले में भर जाता है, जिससे मात्रा को लेकर उनका भरोसा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।
इस नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने और रोजाना संचालित करने का जिम्मा संभाल रहीं ग्रेन एटीएम की संचालिका रिंकू सिंह ठाकुर ने बताया कि मशीन आधारित प्रक्रिया शुरू होने से पूरा वितरण कार्य पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो गया है। उनके अनुसार इस सिस्टम से भीड़ को नियंत्रित करना आसान हुआ है, समय की बचत हो रही है और हर हितग्राही को निर्धारित मात्रा में ही राशन मिल पा रहा है। दुकान संचालन से जुड़े लोगों के लिए भी यह व्यवस्था राहत की तरह आई है, क्योंकि मैनुअल तौल-भराई में लगने वाला समय अब काफी कम हो गया है।
रायपुर जैसे शहर के लिए यह पहल खासतौर पर मायने रखती है, जहां राशन दुकानों पर हर महीने हजारों की संख्या में हितग्राही राशन लेने पहुंचते हैं। सरकंडा में इसकी सफल शुरुआत के बाद अब यह देखा जाना बाकी है कि आने वाले महीनों में इसी तरह की मशीनें शहर के दूसरे इलाकों में भी लगाई जाती हैं या नहीं। बायोमेट्रिक आधारित प्रमाणीकरण होने से फर्जीवाड़े और गलत हाथों में राशन जाने की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाती है, क्योंकि हर लेनदेन हितग्राही की पहचान से जुड़ा होता है।
तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता और जवाबदेही, दोनों मोर्चों पर फायदा मिलता दिख रहा है। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से लेकर स्क्रीन पर पात्रता दिखने और मशीन से सीधे तय मात्रा में अनाज मिलने तक, पूरी प्रक्रिया हितग्राही की आंखों के सामने ही होती है। इससे न सिर्फ वितरण व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है बल्कि दुकान स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की गुंजाइश भी घटती है। शुरुआती दौर में ही मिली प्रतिक्रिया से साफ है कि हितग्राहियों ने इस बदलाव को हाथोंहाथ लिया है।
फिलहाल यह व्यवस्था नई-नई शुरू हुई है, इसलिए इसका पूरा असर आने वाले समय में ही सामने आएगा। लेकिन शुरुआती अनुभव बताते हैं कि राशन लेने में लगने वाला समय काफी घट गया है और हितग्राहियों का सिस्टम पर भरोसा पहले से बेहतर हुआ है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल दिखाती है कि योजनाओं का लाभ सिर्फ उपलब्ध कराना काफी नहीं, बल्कि उसे सम्मानजनक, सरल और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले वक्त में रायपुर के दूसरे इलाकों के साथ-साथ प्रदेश के अन्य शहरों में भी ऐसी मशीनें लगाई जा सकती हैं, जिससे पूरे पीडीएस सिस्टम की तस्वीर बदल सकती है।



