रायपुर में बाहुड़ा रथयात्रा की भव्य तैयारी: 9 दिनों के प्रवास के बाद आज मौसी घर से श्रीमंदिर लौटेंगे भगवान जगन्नाथ, उमड़ेगा आस्था का सैलाब
रायपुर के गायत्री नगर में आज भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा निकाली जाएगी। 9 दिनों के प्रवास के बाद महाप्रभु श्रीमंदिर लौटेंगे। दोपहर 3 बजे से शुरू होने वाली इस यात्रा में डॉ. रमन सिंह, चरणदास महंत समेत कई दिग्गज शामिल होंगे।

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित मंदिर प्रांगण से आज आस्था और भक्ति का एक अलौकिक दृश्य दिखाई देगा। श्री जगन्नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित बाहुड़ा रथयात्रा के पावन अवसर पर भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा नौ दिवसीय प्रवास पूर्ण करने के बाद अपने मूल निवास श्रीमंदिर के लिए रवाना होंगे।
गुँडेचा (मौसी) मंदिर में नौ दिनों तक श्रद्धालुओं को दर्शन देने के बाद आज दोपहर 3 बजे से महाप्रभु की वापसी यात्रा शुरू हो जाएगी। दोपहर होते ही पूरा गायत्री नगर और शंकर नगर क्षेत्र ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरी बोल’ के जयघोष से गूंज उठेगा। हजारों श्रद्धालु प्रभु का रथ खींचकर पुण्य लाभ कमाने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
सनातन परंपरा में बाहुड़ा यात्रा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि यह समर्पण और सामाजिक समरसता की गहरी भावना को दर्शाती है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपने भक्तों के करीब आने के लिए मंदिर से बाहर निकलते हैं। नौ दिनों तक मौसी घर में रहने के बाद जब वे लौटते हैं, तो उनका रथ खींचने के लिए हर वर्ग का इंसान एक साथ जुटता है।
नौ दिनों के इस प्रवास के दौरान गायत्री नगर स्थित मौसी मंदिर में हर दिन उत्सव जैसा माहौल रहा। भगवान का विशेष श्रृंगार, महाआरती, भजन-संध्या और छप्पन भोग का आयोजन किया गया। सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। हजारों लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया और इस सांस्कृतिक व धार्मिक संगम के साक्षी बने।
आयोजन की भव्यता को देखते हुए समिति ने सुरक्षा और जन-सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। रथ मार्ग को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और सुगम यातायात के विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि किसी को परेशानी न हो।
रायपुर की यह रथयात्रा अब केवल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरे छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान में एक खास जगह बना ली है। हर गुजरते साल के साथ यहाँ जुटने वाली भीड़ इस बात का सबूत है कि लोगों की आस्था किस कदर गहराई से जुड़ी हुई है।
इस बार की बाहुड़ा यात्रा में राजनीति और समाज के कई बड़े चेहरे एक साथ एक मंच पर नज़र आएंगे। आयोजन में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
इनके अलावा हरिभूमि समाचार पत्र और INH न्यूज चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी सहित छत्तीसगढ़ के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, नागरिक और सामाजिक-धार्मिक संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि इस पावन अवसर पर महाप्रभु का आशीर्वाद लेंगे।
नेताओं की मौजूदगी और भारी जनसैलाब को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है। ट्रैफिक पुलिस ने गायत्री नगर और उससे जोड़ने वाले रास्तों के लिए वैकल्पिक रूट जारी किए हैं ताकि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो और यात्रा भी शांतिपूर्वक निकल सके।
जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष और रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने यात्रा की पूर्व संध्या पर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बाहुड़ा रथयात्रा भारतीय संस्कृति में सेवा और लोककल्याण का सबसे जीवंत उदाहरण है।
पुरंदर मिश्रा ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने परिवार के साथ आएं और इस अलौकिक पल का हिस्सा बनें। उन्होंने बताया कि समिति हर साल इस आयोजन को पहले से अधिक सुव्यवस्थित और भव्य बनाने का प्रयास करती है, जिससे हमारी गौरवशाली सनातन परंपराएं आने वाली पीढ़ी तक सही रूप में पहुंच सकें।
रायपुर में आयोजित होने वाली इस रथयात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर की प्राचीन परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन किया जाता है। स्नान पूर्णिमा से लेकर ‘छेरा पहरा’ (स्वर्ण झाड़ू से रथ की सफाई) और बाहुड़ा यात्रा तक, हर अनुष्ठान को वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार ही संपन्न कराया जाता है।
उत्कल संस्कृति और छत्तीसगढ़ी जनजीवन का यह मेल रायपुर को एक अलग ही सांस्कृतिक रंग में ढाल देता है। इतिहासकार बताते हैं कि रायपुर में जगन्नाथ पूजा की परंपरा दशकों पुरानी है, लेकिन गायत्री नगर का यह आयोजन बीते कुछ वर्षों में एक विशाल प्रादेशिक उत्सव का रूप ले चुका है।
जब दोपहर में सुभद्रा, बलभद्र और जगन्नाथ जी के विग्रहों को ‘पहांडी बीजे’ (परंपरागत तरीके से हिलाते-डुलते हुए रथ तक लाना) के जरिए रथ पर विराजमान कराया जाएगा, तो माहौल भक्तिरस से सराबोर हो जाएगा। इस दौरान शंखध्वनि, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नर्तक दलों की प्रस्तुति पूरे वातावरण को दिव्य बना देगी।
बाहुड़ा यात्रा के समापन के साथ ही भगवान पुनः अपने मुख्य मंदिर के गर्भगृह में विराजेंगे। हालांकि, इसके बाद भी दो दिनों तक ‘सुना भेश’ (भगवान का सोने के आभूषणों से श्रृंगार) और ‘अधर पाना’ जैसी रस्में निभाई जाएंगी, जिसके बाद यह वार्षिक उत्सव पूर्णता को प्राप्त करेगा।
आज की यह वापसी यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से खास है, बल्कि यह रायपुर शहर में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का एक सुखद संदेश भी देती है।



