रायपुर के देवेंद्र नगर थाने में ई-मालखाना 2.0 शुरू, बारकोड से एक क्लिक में मिलेगा जब्त सामानों का पूरा डिजिटल ब्योरा
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने देवेंद्र नगर थाने में ई-मालखाना 2.0 की शुरुआत की है। अब अपराधों में जब्त संपत्ति पर बारकोड लगेगा और ऐप से त्वरित निगरानी होगी। जानिए इस नई डिजिटल व्यवस्था से पुलिसिंग में क्या बदलाव आएंगे।

रायपुर । राजधानी में पुलिसिंग को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की कवायद अब धरातल पर तेजी से उतरती दिख रही है। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने जब्त सामग्रियों के रख-रखाव और उनके डिजिटल प्रबंधन के लिए एक और कदम आगे बढ़ाया है। मध्य जोन के अंतर्गत आने वाले थाना देवेंद्र नगर में ‘ई-मालखाना 2.0’ का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले ने इस नई तकनीक आधारित प्रणाली का उद्घाटन किया।
इस मौके पर पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विवेक शुक्ला, सहायक पुलिस आयुक्त रमाकांत साहू और देवेंद्र नगर थाना प्रभारी दीपेश सैनी समेत पूरा पुलिस स्टाफ मौजूद रहा। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था पुलिस की साख, अदालती कार्रवाई और मालखाने के पारंपरिक प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
बरसों से थानों के मालखानों की छवि धूल फांकती फाइलों, जंग लगी अलमारियों और सालों-साल पड़े रहने वाले सामानों के ढेर के रूप में रही है। कई बार मुकदमों की सुनवाई के दौरान समय पर जब्त सामान या साक्ष्य का न मिलना बड़ी कानूनी अड़चन बनता रहा है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से रायपुर पुलिस कमिश्नरेट चरणबद्ध तरीके से सभी थानों को ई-मालखाना प्रणाली से जोड़ रहा है। देवेंद्र नगर से पहले कोतवाली, गंज और मौदहापारा थानों में भी इसे सफलता पूर्वक लागू किया जा चुका है।
तस्वीर बदल रही है और अब थानों के मालखाने किसी कॉरपोरेट वेयरहाउस की तरह व्यवस्थित नजर आने लगे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही शहर के अन्य सभी बचे हुए थानों को भी इसी मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।
ई-मालखाना 2.0 केवल एक सॉफ्टवेयर भर नहीं है, बल्कि यह भौतिक रखरखाव को पूरी तरह डिजिटल डेटाबेस में बदलने की प्रक्रिया है। इस ऐप के जरिए थाने में रखे प्रत्येक जब्त सामान का पूरा ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया जा चुका है। इसमें अपराध क्रमांक, धाराएं, जब्ती की तारीख, जब्त करने वाले अधिकारी का नाम और सामान का सटीक विवरण शामिल रहता है।
सबसे खास बात यह है कि हर जब्त संपत्ति पर एक विशेष बारकोड लगाया गया है। जब भी किसी सामान की स्थिति जांचनी हो या उसे कोर्ट में पेश करना हो, तो पुलिसकर्मी केवल उस बारकोड को स्कैन करेंगे। स्कैन करते ही संबंधित केस और संपत्ति की पूरी हिस्ट्री मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर खुलकर सामने आ जाएगी।
इससे न केवल सामान खोजने में बर्बाद होने वाला कीमती वक्त बचेगा, बल्कि साक्ष्यों के गुम होने या आपस में बदलने की गुंजाइश भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। मुकदमों के निस्तारण के बाद जब अदालतों से माल वापसी या जब्ती के विनष्टीकरण का आदेश आता है, तब यह डिजिटल रिकॉर्ड प्रक्रिया को कई गुना तेज बना देगा।
कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ई-मालखाना 2.0 से आपराधिक न्याय प्रणाली में भी तेजी आएगी। अक्सर ट्रायल के दौरान मालखाने से माल समय पर कोर्ट न पहुंचने के कारण सुनवाई टल जाती थी। अब बारकोड-आधारित ट्रैकिंग से जांच अधिकारियों को कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का मुख्य जोर अब स्मार्ट और टेक-सैवी पुलिसिंग पर है। तकनीक के इस इस्तेमाल से विभागीय जवाबदेही तय होगी और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित होगी। आने वाले दिनों में जब रायपुर के सभी थानों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी, तो राजधानी का मालखाना प्रबंधन प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर साबित होगा।



