रायपुर में CA दफ्तर से 7.80 लाख की चोरी का पर्दाफाश, पुलिस ने 30 घंटे में बिलासपुर से पूर्व कर्मचारी को दबोचा
रायपुर के सिविल लाइन स्थित सीए तारवानी एंड एसोसिएट्स दफ्तर में हुई 7.80 लाख रुपये की चोरी की गुत्थी पुलिस ने महज 30 घंटे में सुलझा ली है। बिलासपुर से पूर्व कर्मचारी और उसके साथी को गिरफ्तार कर पूरी चोरी की रकम बरामद कर ली गई है।

पुलिस ने इस पूरी वारदात का खुलासा घटना के महज 30 घंटे के भीतर कर दिया। मामले का मुख्य सूत्रधार कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि उसी दफ्तर में काम कर चुका एक पूर्व कर्मचारी निकला।
पुलिस की विशेष संयुक्त टीम ने बिलासपुर में योजनाबद्ध दबिश देकर मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से चुराई गई 7.80 लाख रुपये की शत-प्रतिशत नकदी बरामद कर ली गई है।
यह पूरी वारदात 21 जुलाई की सुबह सामने आई। सुंदर नगर निवासी अपर्णा नायक इस सीए फर्म में बतौर कैशियर तैनात हैं। मंगलवार की सुबह रोज की तरह जब ऑफिस का ड्राइवर दफ्तर पहुंचा, तो वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए।
दफ्तर के दरवाजे और कैश काउंटर के ताले कटे पड़े थे। सामान बिखरा हुआ था। ड्राइवर ने बिना वक्त गंवाए तुरंत कैशियर अपर्णा नायक को फोन पर सूचना दी। खबर मिलते ही अपर्णा नायक और फर्म के संचालक सीए चेतन तारवानी मौके पर पहुंचे।
कैश काउंटर की जांच करने पर पता चला कि उसमें रखे 7.80 लाख रुपये गायब थे। इसके तुरंत बाद सिविल लाइन थाना पुलिस को सूचना दी गई।
शहर के पॉश इलाके में लाखों की चोरी से हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत सक्रिय हुए। पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (मध्य क्षेत्र) तारकेश्वर पटेल खुद मौके पर पहुंचे।
फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और सिविल लाइन पुलिस की एक विशेष संयुक्त जांच टीम का गठन किया।
जांच अधिकारियों ने सबसे पहले दफ्तर और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू किए।
रात के सीसीटीवी फुटेज में संदिग्धों की आवाजाही नजर आई। हालांकि, नकाब और अंधेरे के कारण चेहरे साफ नहीं थे। पुलिस समझ चुकी थी कि चोर को दफ्तर के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी। उसे पता था कि कैश काउंटर कहां है और भारी नकदी कब रखी जाती है।
इसी बिंदु से जांच की दिशा बदल गई। पुलिस ने अंदरूनी किसी व्यक्ति की संलिप्तता की आशंका पर काम करना शुरू किया। दफ्तर के मौजूदा कर्मचारियों से पूछताछ की गई।
पुराने और नौकरी छोड़ चुके कर्मचारियों की सूची तैयार की गई। जांच की सुई बिलासपुर निवासी उमेश पोर्ते पर जाकर टिक गई, जो कुछ समय पहले तक इसी दफ्तर में काम करता था।
बिलासपुर में तड़के दबिश और 100% रिकवरी
संदेह गहराते ही पुलिस की एक विशेष टीम को बिलासपुर रवाना किया गया। उमेश पोर्ते के छिपने के ठिकाने का पता लगाया गया। साइबर सेल ने उसके मोबाइल लोकेशन और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली।
पुलिस टीम ने बिलासपुर के एक ठिकाने पर घेराबंदी कर उमेश पोर्ते को हिरासत में ले लिया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर उमेश टूट गया। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
उसने बताया कि सीए दफ्तर में नौकरी के दौरान उसने देखा था कि रोज लाखों रुपये का लेन-देन होता है। भारी नकदी कैश काउंटर में ही रखी जाती थी। नौकरी छोड़ने के बाद भी उसकी नजर उस तिजोरी पर टिकी हुई थी।
पैसे कमाने की लालच में उसने चोरी की खतरनाक साजिश रची। इस साजिश में उसने अपने बिलासपुर निवासी दोस्त लक्ष्मीनारायण ध्रुव को भी शामिल कर लिया।
योजना के मुताबिक दोनों आरोपी 20 जुलाई की रात औजार लेकर रायपुर पहुंचे। सिविल लाइन स्थित दफ्तर के पास उन्होंने रेकी की।
रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर वे दफ्तर में घुसे। कटर की मदद से कैश काउंटर का ताला मिनटों में काट दिया गया। काउंटर में रखे 7.80 लाख रुपये बैग में भरे और दोनों बिलासपुर की ओर भाग निकले।
मुख्य आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसके साथी लक्ष्मीनारायण ध्रुव को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से चोरी किए गए पूरे 7 लाख 80 हजार रुपये नकद बरामद कर लिए गए।
पुलिस की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई ने व्यापारियों और दफ्तर संचालकों में सुरक्षा का भरोसा बहाल किया है। इतनी बड़ी रकम की शत-प्रतिशत रिकवरी को पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और बीएनएस की कड़ी धाराएं
जांच के दौरान मुख्य आरोपी उमेश पोर्ते के बारे में और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए। पुलिस पड़ताल में पता चला कि वह कोई सीधा-साधा कर्मचारी नहीं था।
उसके खिलाफ बिलासपुर जिले के विभिन्न थानों में पहले से मारपीट और गुंडागर्दी के संगीन मामले दर्ज हैं। वह पूर्व में जेल की सजा भी काट चुका है।
आपराधिक पृष्ठभूमि छुपाकर उसने सीए दफ्तर में नौकरी हासिल की थी।
दोनों आरोपियों के खिलाफ सिविल लाइन थाना रायपुर में अपराध क्रमांक 388/26 दर्ज किया गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और धारा 305 के तहत मामला पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
अदालत में पेश कर आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
रायपुर पुलिस ने इस मामले के बाद शहर के व्यापारिक संस्थानों, सीए फर्मों और निजी कार्यालयों के लिए एडवाइजरी जारी करने का फैसला लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यावसायिक संस्थानों को अपने कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराना चाहिए।
अक्सर व्यावसायिक प्रतिष्ठान कर्मचारियों की पुरानी पृष्ठभूमि जांचे बिना उन्हें वित्तीय जिम्मेदारियां सौंप देते हैं, जिससे इस तरह की वारदात का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा दफ्तरों में उच्च गुणवत्ता वाले नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक अलार्म सिस्टम लगाने की सलाह दी गई है। बड़ी नकद राशि को रोजाना बैंक में जमा कराने और दफ्तरों में ज्यादा नकदी न रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
30 घंटे के भीतर अंधी चोरी का यह मामला सुलझाकर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और जमीनी मुखबिर तंत्र के बेहतरीन सामंजस्य की मिसाल पेश की है। सिविल लाइन और साइबर पुलिस की टीम को इस सफलता के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुरस्कृत करने की घोषणा भी की गई है।



