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राजस्व व्यवस्था में बड़ा डिजिटल बदलाव: अब किसानों को व्हाट्सएप पर मिलेंगे बी-1, खसरा और ऋण पुस्तिका के दस्तावेज, तहसील पटवारी कार्यालय के चक्कर होंगे कम

छत्तीसगढ़ सरकार राजस्व सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों और आम नागरिकों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका सहित भूमि संबंधी दस्तावेज व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आरबीसी 6-4 मामलों के ऑनलाइन निराकरण, पंचायतों के माध्यम से अविवादित फौती नामांतरण और अबूझमाड़ सहित असर्वेक्षित गांवों के सर्वेक्षण कार्य में तेजी लाने पर भी विशेष जोर दिया गया।







रायपुर | 8 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ में राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों और आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर से राहत दिलाने की तैयारी में है। जल्द ही किसान अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका और भूमि से संबंधित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। इससे तहसील और पटवारी कार्यालयों में लगने वाली भीड़ कम होगी और राजस्व सेवाओं की पारदर्शिता तथा समयबद्धता में भी उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक तकनीकी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, डिजिटल नवाचारों और नागरिक सेवाओं को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने की प्रगति की समीक्षा भी की गई।

राजस्व सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर सरकार का फोकस

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी राजस्व व्यवस्था विकसित करना है जो पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त हो।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक आवेदन का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग होने से मानव हस्तक्षेप कम होगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं में भी कमी आएगी।

व्हाट्सएप पर उपलब्ध होंगे भूमि संबंधी दस्तावेज

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय किसानों को व्हाट्सएप के माध्यम से राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराने को लेकर सामने आया।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसान अपने मोबाइल से ही बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें बार-बार पटवारी या तहसील कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

यह व्यवस्था राज्य में पहले से विकसित डिजिटल राजस्व सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। राज्य में पहले से भुइयां पोर्टल के माध्यम से कई ऑनलाइन राजस्व सेवाएं उपलब्ध हैं और अब व्हाट्सएप आधारित सुविधा से इन सेवाओं की पहुंच और व्यापक होगी।

भुइयां व्हाट्सएप चैटबॉट से मिलेगा सीधा लाभ

राज्य सरकार ने इस वर्ष भुइयां व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा भी शुरू की है, जिसके माध्यम से नागरिक मोबाइल पर ही अनेक राजस्व सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इस डिजिटल प्रणाली के जरिए भूमि संबंधी जानकारी, नामांतरण आवेदन, किसान पुस्तिका, आधार लिंकिंग, मोबाइल नंबर अपडेट तथा अन्य राजस्व सेवाओं तक पहुंच आसान बनाई जा रही है।

सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक सेवाओं को मोबाइल आधारित बनाकर नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर से राहत दिलाना है।

डिजिटल किसान पुस्तिका से भी मिलेगी बड़ी सुविधा

राज्य सरकार ने डिजिटल किसान पुस्तिका की शुरुआत भी की है, जिसे भुइयां पोर्टल से जोड़ा गया है।

इस व्यवस्था के तहत किसान पुस्तिका में दर्ज जानकारी स्वतः अपडेट होती रहेगी। साथ ही पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।

नई व्यवस्था लागू होने से रिकॉर्ड अपडेट कराने के लिए किसानों को अलग से आवेदन देने या कार्यालयों के कई चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी।

आरबीसी 6-4 मामलों का होगा ऑनलाइन निराकरण

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में आरबीसी 6-4 के मामलों के शीघ्र निपटारे पर भी विशेष जोर दिया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की जाए जिसमें आवेदक स्वयं अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकें।

ऑनलाइन आवेदन होने से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी तथा आवेदन की प्रत्येक स्थिति डिजिटल माध्यम से देखी जा सकेगी। इससे समयबद्ध सेवा वितरण सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी।

पंचायतों के माध्यम से होगा अविवादित फौती नामांतरण

बैठक में अविवादित फौती नामांतरण प्रक्रिया को भी अधिक सरल बनाने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायतों के माध्यम से अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।

यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को छोटे-छोटे नामांतरण मामलों के लिए तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी।

अबूझमाड़ सहित असर्वेक्षित गांवों के सर्वेक्षण में तेजी

मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित गांवों विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में भूमि सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सर्वेक्षण पूरा किया जाए ताकि राजस्व अभिलेख तैयार किए जा सकें तथा भूमि रिकॉर्ड नियमित रूप से अद्यतन किए जा सकें।

भूमि अभिलेख तैयार होने के बाद स्थानीय लोगों को विभिन्न शासकीय योजनाओं, बैंक ऋण, कृषि सहायता तथा अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी।

तकनीक आधारित राजस्व प्रशासन से बढ़ेगी पारदर्शिता

विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि सुशासन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से दस्तावेजों में छेड़छाड़ की संभावना कम होती है। साथ ही आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाणपत्र और समयबद्ध सेवा वितरण जैसी व्यवस्थाएं नागरिकों का भरोसा भी मजबूत करती हैं।

किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ

राज्य में बड़ी संख्या में किसान आज भी बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका अथवा अन्य भूमि दस्तावेज प्राप्त करने के लिए तहसील और पटवारी कार्यालयों पर निर्भर रहते हैं।

नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। दस्तावेजों की उपलब्धता तेज होगी तथा बैंक ऋण, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कृषि योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज समय पर प्राप्त हो सकेंगे।

ई-गवर्नेंस की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

राजस्व विभाग द्वारा किए जा रहे ये सुधार राज्य में ई-गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

यदि व्हाट्सएप आधारित दस्तावेज सेवा, ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और डिजिटल राजस्व अभिलेखों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले समय में नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें अधिकतर राजस्व सेवाएं नागरिकों के मोबाइल तक पहुंचें और कार्यालयों में व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता न्यूनतम रह जाए।

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Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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