निजी स्कूलों की कथित मनमानी पर फूटा छात्रों का गुस्सा: डीईओ कार्यालय का घेराव, अवैध फीस वसूली और नियम उल्लंघन के आरोपों पर उग्र प्रदर्शन
राजधानी रायपुर में निजी स्कूलों की कथित मनमानी, अवैध फीस वसूली और शिक्षा विभाग की निष्क्रियता के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विभागीय अधिकारियों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां और पावर का चश्मा भेंट कर विरोध दर्ज कराया। संगठन ने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्यव्यापी अभियान का रूप दिया जाएगा।

रायपुर | 8 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था और कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने मंगलवार को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय का घेराव कर निजी स्कूलों पर गंभीर आरोप लगाए और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने उग्र नारेबाजी की और अधिकारियों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां तथा पावर का चश्मा भेंट कर विरोध दर्ज कराया।
एनएसयूआई का आरोप है कि जिले के कई निजी विद्यालय शासन के नियमों का उल्लंघन करते हुए अभिभावकों से विभिन्न मदों में अतिरिक्त राशि वसूल रहे हैं। संगठन का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे निजी स्कूलों का मनोबल बढ़ रहा है और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि खमतराई क्षेत्र स्थित एसएस पब्लिक स्कूल तथा अचीवर्स स्कूल सहित जिले के कई निजी विद्यालय शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों का कथित रूप से पालन नहीं कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि इन विद्यालयों में विद्यार्थियों और अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है तथा विभिन्न नियमों की अनदेखी की जा रही है।
यह उल्लेखनीय है कि ये आरोप छात्र संगठन द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित विद्यालयों अथवा शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना शेष है।
स्कूल परिसर में कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म बिक्री का आरोप
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि एसएस पब्लिक स्कूल परिसर के भीतर ही कॉपी, किताबें और यूनिफॉर्म बेची जा रही हैं।
संगठन का कहना है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या विद्यालय परिसर से ही सामग्री खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है तो यह शिक्षा विभाग और विभिन्न नियामकीय निर्देशों की भावना के विपरीत माना जाता है।
छात्र संगठन ने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
एक्टिविटी फीस और वार्षिक शुल्क को लेकर भी सवाल
एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष एक्टिविटी फीस तथा वार्षिक शुल्क नियमों के विपरीत वसूला जा रहा है।
संगठन का कहना है कि अभिभावकों को शुल्क संरचना की पर्याप्त जानकारी दिए बिना अतिरिक्त आर्थिक भार डाला जा रहा है।
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा के नाम पर लगातार बढ़ती फीस मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
लेट फीस पर प्रतिदिन जुर्माना लगाने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा लेट फीस पेनल्टी को लेकर उठाया गया।
एनएसयूआई का आरोप है कि यदि महीने की 10 तारीख तक फीस जमा नहीं होती तो संबंधित विद्यालय प्रतिदिन 10 रुपये के हिसाब से अतिरिक्त जुर्माना वसूल रहा है।
संगठन ने इसे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बताते हुए तत्काल बंद कराने की मांग की।
हालांकि इस संबंध में संबंधित विद्यालय का पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
भवन और खेल मैदान को लेकर भी लगाए आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित विद्यालय का संचालन ऐसे भवन में किया जा रहा है जहां पर्याप्त खेल मैदान उपलब्ध नहीं है।
संगठन का कहना है कि विद्यालय के संचालन के लिए निर्धारित आधारभूत सुविधाओं का पालन होना आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
यदि किसी विद्यालय में आधारभूत सुविधाओं की कमी है तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए।
शिक्षा विभाग पर निष्क्रियता का आरोप
एनएसयूआई ने केवल निजी विद्यालयों पर ही नहीं बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए।
संगठन का आरोप है कि कई बार शिकायतें दिए जाने के बावजूद विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों की जांच होती और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं बनती।
डीईओ को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में निजी विद्यालयों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा अभिभावकों से कथित रूप से वसूली गई अतिरिक्त राशि की जांच कराने की मांग की गई।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगा।
संगठन ने कहा कि छात्र और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर तक आंदोलन किया जाएगा।
छात्र नेताओं ने दावा किया कि निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था और कथित अनियमितताओं को लेकर अभिभावकों में व्यापक असंतोष है।
निजी स्कूलों की फीस को लेकर पहले भी उठते रहे हैं विवाद
राज्य में निजी विद्यालयों की फीस वृद्धि, अतिरिक्त शुल्क, यूनिफॉर्म और पुस्तकों की अनिवार्य खरीद जैसे मुद्दे समय-समय पर विवाद का विषय रहे हैं।
शिक्षा विभाग समय-समय पर निजी विद्यालयों को शासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डालने के निर्देश जारी करता रहा है।
यदि किसी विद्यालय के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।
अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बढ़ता आर्थिक बोझ
स्कूल खुलने के साथ ही अभिभावकों पर प्रवेश शुल्क, वार्षिक शुल्क, परिवहन शुल्क, यूनिफॉर्म, पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री का खर्च एक साथ आता है।
ऐसे में यदि अतिरिक्त शुल्क अथवा जुर्माना भी लगाया जाता है तो इसका सीधा असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है।
यही कारण है कि फीस से जुड़े मुद्दे हर वर्ष अभिभावकों के बीच चर्चा और विवाद का विषय बनते हैं।
शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा विभाग की जांच होगी।
यदि शिकायतों की जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं यदि जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभाग अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
फिलहाल यह पूरा मामला जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के अधीन है तथा अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की बढ़ी मांग
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी विद्यालयों की फीस संरचना, अतिरिक्त शुल्क और आधारभूत सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है।
यदि प्रत्येक विद्यालय अपनी शुल्क संरचना, अनुमोदित शुल्क, अतिरिक्त शुल्क के आधार और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए तो अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के बीच विवाद की संभावनाएं काफी कम हो सकती हैं।
इसी तरह शिक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था भी शिक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



