नव्या मलिक एमडीएमए ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश: एसआईटी और ईडी के शिकंजे में सफेदपोश चेहरे, करोड़ों के मनी ट्रेल और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन से कांपी राजधानी
रायपुर के बहुचर्चित नव्या मलिक एमडीएमए ड्रग्स रैकेट में सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। नशीले पदार्थों की तस्करी के इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने के लिए जहां विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया है, वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस रैकेट की वित्तीय कड़ियों और ब्लैक मनी नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और शहर के रसूखदार परिवारों से जुड़े होने के कारण यह मामला अब छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े संगठित अपराधों में शुमार हो चुका है।

पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में बनी इस उच्च स्तरीय एसआईटी में एक सहायक पुलिस आयुक्त यानी एसीपी स्तर के अधिकारी को कमान सौंपी गई है। इस टीम में दो अनुभवी निरीक्षकों सहित कुल पांच विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
एसआईटी का प्राथमिक उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह टीम अंतर-राज्यीय ड्रग सिंडिकेट, मुंबई-दिल्ली-गोवा रूट और इसके पीछे काम करने वाले भूमिगत आपराधिक नेटवर्क की गहरी परतों को पूरी तरह से बेनकाब करेगी।
काले कारोबार की वित्तीय जड़ों पर चोट, प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी एंट्री
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब केंद्रीय वित्तीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी इस मामले में अपनी समानांतर जांच शुरू कर दी। ईडी ने स्थानीय पुलिस से अब तक की जांच से जुड़ी केस डायरी, गिरफ्तार आरोपियों के बयान और कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट के प्रमुख दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। जांच एजेंसी का पूरा ध्यान नशीले पदार्थों के इस अवैध व्यापार से अर्जित की गई बेहिसाब संपत्ति और अवैध कमाई को लोकेट करने पर है।
एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत इस बात की पड़ताल कर रही है कि ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले कैश को किस प्रकार से वैध व्यापारों या संपत्तियों में निवेश किया गया। ईडी की इस एंट्री के बाद रायपुर के कई बड़े व्यापारियों, पब संचालकों, होटल मालिकों और कथित सफेदपोशों की धड़कनें तेज हो गई हैं, क्योंकि प्राथमिक वित्तीय कड़ियों में कई रसूखदार बैंक खातों की ओर संदेहास्पद ट्रांजैक्शन मिलने के संकेत मिले हैं।
कैसे हुआ था इस देशव्यापी हाई-प्रोफाइल रैकेट का भंडाफोड़
नशीली दवाओं के इस खतरनाक नेटवर्क का खुलासा पिछले साल 23 अगस्त 2025 को हुआ था, जब रायपुर की गंज थाना पुलिस ने एक खुफिया सूचना के आधार पर देवेंद्र नगर चौक के पास घेराबंदी की थी। पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध सफेद रंग की कार को रोका, जिसमें सवार तीन मुख्य आरोपियों हर्ष आहूजा, मोनू बिश्नोई और दीप धनोरिया को दबोचा गया। पुलिस की तलाशी में उनके कब्जे से एक सफेद पॉलीथिन में पैक की हुई करीब 27.58 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली एमडीएमए ड्रग बरामद की गई, जिसकी तात्कालिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी गई थी।
गिरफ्तार आरोपियों को जब पुलिस ने रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपने बयानों में ड्रग्स की मुख्य सप्लायर के रूप में मुंबई की रहने वाली और मूल रूप से रायपुर के कटोरा तालाब क्षेत्र की निवासी नव्या उर्फ नाविया अख्तर मलिक के नाम का खुलासा किया। इस अहम इनपुट के आधार पर रायपुर पुलिस की एक विशेष टीम तुरंत मुंबई के लिए रवाना हुई और वहां से दबिश देकर नव्या मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया।
इंटीरियर डिजाइनिंग की आड़ में रसूखदारों को जाल में फंसाने का खेल
पुलिस और एसआईटी की जांच में नव्या मलिक के बैकग्राउंड को लेकर बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। करीब 22 वर्षीय नव्या मलिक ने महानगर से इंटीरियर डिजाइनिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। अपनी इसी कॉपोरेट प्रोफाइल और आकर्षक जीवनशैली का उपयोग उसने समाज के उच्च वर्ग तक अपनी पैठ बनाने के लिए किया। जांच अधिकारियों के अनुसार नव्या रायपुर के रसूखदार परिवारों, बड़े उद्योगपतियों, राजनेताओं और रसूखदार प्रशासनिक अधिकारियों के बच्चों के सीधे संपर्क में रहती थी।
शुरुआती दौर में वह रायपुर के नामी नाइट क्लबों, फार्म हाउसों में होने वाली निजी रेव पार्टियों और हाई-प्रोफाइल आयोजनों में खुद शामिल होती थी। वहां वह बड़े घरानों के युवक-युवतियों को पहले दोस्ती के जाल में फंसाती थी और उन्हें शुरुआत में मुफ्त में एमडीएमए जैसी महंगी सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन करने के लिए उकसाती थी। जब वे युवा इस खतरनाक नशे के पूरी तरह से आदी यानी एडिक्ट हो जाते थे, तब उनसे मोटी रकम वसूल कर नशीले पदार्थों की व्यावसायिक सप्लाई शुरू कर दी जाती थी।
डिजिटल नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का मिला सुराग
जांच के दौरान पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों ने नव्या मलिक के पास से तीन महंगे स्मार्टफोन और लैपटॉप जब्त किए थे। इन डिजिटल उपकरणों के डेटा एक्सट्रैक्शन और व्हाट्सएप चैट के विश्लेषण से जो जानकारियां बाहर आईं, उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। नव्या के मोबाइल फोन में करीब 850 ऐसे प्रभावशाली लोगों के नंबर और चैट मिले हैं, जो सीधे तौर पर इस सिंडिकेट के उपभोक्ता या मददगार रहे हैं।
इसके अलावा उसके मोबाइल से कुछ ऐसी वीडियो क्लिपिंग और चैट रिकॉर्ड भी बरामद हुए हैं, जो इसके तार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई और गोवा के बड़े ड्रग माफियाओं से जोड़ते हैं। कुछ खुफिया इनपुट्स में यह भी दावा किया गया है कि नव्या हर साल नियमित रूप से विदेश दौरों पर जाती थी और उसके संपर्कों के तार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संदिग्ध नशीले पदार्थों के नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से पूर्व में जांच एजेंसियों द्वारा उसके नार्को टेस्ट कराने की दिशा में भी विधिक प्रयास किए जा रहे थे।
ड्रग सिंडिकेट से जुड़े अब तक के बड़े खुलासे और कानूनी कार्रवाई
| आरोपी का नाम | गिरफ्तारी/केस स्टेटस | सिंडिकेट में प्रमुख भूमिका |
|---|---|---|
| नव्या मलिक | न्यायिक रिमांड पर जेल में | मुख्य मास्टरमाइंड, मुंबई-दिल्ली से सप्लाई चेन प्रबंधन |
| विधि अग्रवाल | न्यायिक रिमांड पर जेल में | स्थानीय स्तर पर रसूखदार नेटवर्क में वितरण |
| हर्ष आहूजा | न्यायिक रिमांड पर जेल में | परिवहन और रायपुर में पहली खेप की डिलीवरी |
| मोनू बिश्नोई | न्यायिक रिमांड पर जेल में | स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा संभालना |
| दीप धनोरिया | न्यायिक रिमांड पर जेल में | परिवहन और ग्राहकों से संपर्क साधना |
| अयान परवेज | माननीय उच्च न्यायालय से जमानत स्वीकृत | सह-आरोपी, सिंडिकेट से जुड़े वित्तीय तार |
रायपुर पुलिस इस पूरे मामले में अब तक की विस्तृत विवेचना के बाद न्यायालय में कुल नौ प्रमुख आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ के समक्ष भी इस मामले की सुनवाई हुई है, जहां आरोपियों की ओर से लगाई गई नियमित जमानत याचिकाओं पर गंभीरता से विचार करते हुए अपराध की प्रकृति और समाज पर पड़ने वाले इसके घातक प्रभावों को देखते हुए कड़े रुख अपनाए गए हैं। हालांकि, एक सह-आरोपी अयान परवेज को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुख्य सरगना नव्या मलिक और अन्य सात आरोपी अभी भी रायपुर केंद्रीय जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद हैं।
युवाओं और समाज के लिए सुरक्षात्मक चेतावनी व प्रशासनिक सुझाव
इस बड़े और भयावह ड्रग्स स्कैंडल के उजागर होने के बाद सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। पुलिस प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने आम नागरिकों, विशेषकर अभिभावकों के लिए एक व्यापक सुरक्षात्मक चेतावनी और आवश्यक सुझाव जारी किए हैं:
- अभिभावक अपने कॉलेज और स्कूल जाने वाले बच्चों की बदलती जीवनशैली, अचानक बढ़ने वाले खर्चों और देर रात तक चलने वाली पार्टियों पर कड़ी नजर रखें।
- यदि बच्चों के व्यवहार में अचानक चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, वजन का अत्यधिक कम होना या एकांतप्रिय होना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञों से परामर्श लें।
- युवाओं को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया या पब-क्लबों में अनजान लोगों से अत्यधिक घनिष्ठता बढ़ाने से बचें और किसी के बहकावे में आकर किसी भी संदिग्ध टैबलेट या पाउडर का सेवन न करें।
- किसी भी संदिग्ध नशीले पदार्थ की बिक्री या क्लबों में होने वाली अवैध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस के हेल्पलाइन नंबरों पर दें, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।



