नवा रायपुर में 800 करोड़ की महापरियोजना खटाई में पड़ी: टेंडर प्रक्रिया में बड़ी सेंधमारी के बाद एनआरडीए का बड़ा फैसला, पूरी निविदा निरस्त
टाउन डेवलपमेंट स्कीम की तकनीकी और वित्तीय बोलियां एक साथ खुलने से ई-टेंडरिंग की गोपनीयता हुई थी भंग, नईदुनिया के खुलासे के बाद बैकफुट पर आया प्रशासन।

करीब 1,100 एकड़ के विशाल भूभाग क्षेत्र में प्रस्तावित इस महापरियोजना की टेंडरिंग प्रक्रिया के दौरान एक गंभीर तकनीकी खामी और गोपनीयता भंग होने का मामला सामने आया था। तकनीकी और वित्तीय बोलियां रहस्यमयी परिस्थितियों में एक साथ खुल जाने के कारण पूरी निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए थे, जिसके बाद प्राधिकरण प्रबंधन को आनन-फानन में इस संपूर्ण निविदा को रद्द करने का एक बड़ा और कड़ा निर्णय लेना पड़ा है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले के निरस्त होने के बाद से ही छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और निर्माण क्षेत्र से जुड़े गलियारों में हड़कंप मच गया है। करोड़ों रुपये के इस सरकारी काम में शामिल बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों और ठेकेदारों की आपसी प्रतिस्पर्धा के बीच प्रक्रियागत त्रुटि होना कई तरह के संदेहों को जन्म दे रहा है। एनआरडीए के इस कदम को पारदर्शिता बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जानिए क्या थी टू-स्टेज टेंडरिंग प्रक्रिया और कहां हुई सबसे बड़ी चूक
सरकारी नियमों और केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इतनी बड़ी और संवेदनशील परियोजनाओं के लिए हमेशा टू-स्टेज यानी दो चरणों वाली टेंडर प्रक्रिया का पालन किया जाता है। नियमानुसार, इस प्रक्रिया के तहत निविदा भरने वाली कंपनियों के लिए दो अलग-अलग लिफाफे या डिजिटल कवर निर्धारित किए जाते हैं। इनमें से पहले चरण में केवल कवर-ए यानी तकनीकी बोली को खोला जाता है। तकनीकी बोली के माध्यम से यह जांचा जाता है कि निविदा में भाग लेने वाली कंपनियों के पास 800 करोड़ रुपये के इस महाप्रोजेक्ट को पूरा करने का पुराना अनुभव, पर्याप्त मशीनरी, विशेषज्ञ इंजीनियर और आवश्यक वित्तीय टर्नओवर की पात्रता है या नहीं।
नियम यह कहता है कि जो कंपनियां तकनीकी जांच की इस पहली कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती हैं, केवल उन्हीं पात्र कंपनियों की वित्तीय बोली यानी कवर-बी को खोला जाना चाहिए। वित्तीय बोली में कंपनियों द्वारा काम पूरा करने के बदले मांगी जाने वाली दरें या कोटेशन शामिल होते हैं। लेकिन इस मामले में विभागीय स्तर पर एक भयंकर विधिक और तकनीकी चूक हो गई। एनआरडीए के ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में तकनीकी पात्रता की जांच और छंटनी की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कवर-ए और कवर-बी दोनों को एक साथ खोल दिया गया।
इंटरनेट मीडिया पर वित्तीय दरें सार्वजनिक होने से टेंडरिंग की शुचिता पर उठे सवाल
जैसे ही तकनीकी और वित्तीय बोलियां एक साथ खुलीं, कंपनियों की आंतरिक वित्तीय दरें और उनके द्वारा कोट की गई गोपनीय कीमतें पूरी तरह से उजागर हो गईं। इसके तुरंत बाद विभिन्न प्रतिस्पर्धी कंपनियों और ठेकेदारों के व्हाट्सएप ग्रुप तथा अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन वित्तीय बोलियों के गोपनीय आंकड़े और दरें तेजी से प्रसारित होने लगीं। इस लीक ने ई-टेंडरिंग की उस पूरी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और गोपनीयता को पूरी तरह तार-तार कर दिया, जिसके दम पर पारदर्शी निष्पक्षता का दावा किया जाता है।
जब अपात्र कंपनियों को भी यह पता चल गया कि उनके प्रतिद्वंद्वियों ने क्या दरें भरी हैं, तो निविदा की पूरी प्रतिस्पर्धात्मक भावना ही समाप्त हो गई। इस गंभीर गड़बड़ी और टेंडर हैकिंग या सिस्टम की लापरवाही की आशंका को लेकर प्रतिष्ठित समाचार पत्र नईदुनिया ने अपने 27 जून 2026 के अंक में इस पूरे सनसनीखेज सच को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में ई-टेंडरिंग की गोपनीयता पर खड़े हुए बड़े सवालों को उजागर किए जाने के बाद एनआरडीए प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया और आनन-फानन में जांच के बाद इस पूरी प्रक्रिया को शून्य घोषित करने का फैसला लिया गया।
1,100 एकड़ में आकार लेने वाली टाउन डेवलपमेंट स्कीम अब लंबे समय के लिए टली
एनआरडीए के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह 800 करोड़ रुपये की निविदा कोई सामान्य निर्माण कार्य नहीं था, बल्कि यह नवा रायपुर अटल नगर के सुनियोजित विस्तार के लिए मील का पत्थर मानी जाने वाली टाउन डेवलपमेंट स्कीम यानी टीडीएस का मुख्य हिस्सा थी। इस योजना के तहत लगभग 1,100 एकड़ के चिन्हित भूखंड क्षेत्र में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, चौड़ी सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, अंडरग्राउंड बिजली लाइनें, व्यावसायिक परिसर, सर्वसुविधायुक्त पार्क और आवासीय सेक्टरों का बुनियादी ढांचा तैयार किया जाना प्रस्तावित था।
इस भारी-भरकम विकास परियोजना के टेंडर के रद्द हो जाने से अब नवा रायपुर के विकास की गति को एक बड़ा झटका लगा है। नियमानुसार, अब एनआरडीए को इस पूरी 1,100 एकड़ की परियोजना के लिए नए सिरे से नए नियम-शर्तों के साथ दोबारा निविदा आमंत्रित करनी होगी। इस पूरी नई री-टेंडरिंग प्रक्रिया को तैयार करने, विज्ञापन जारी करने, कंपनियों को समय देने और उनकी जांच करने में कम से कम तीन से छह महीने का अतिरिक्त समय लगना तय माना जा रहा है, जिससे यह पूरी योजना अब लंबे समय के लिए खटाई में पड़ती नजर आ रही है।
ब्लैक लिस्टेड कंपनी की एंट्री के विवाद और आधिकारिक कार्य दिवस पर टेंडर खोलने की सफाई
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण ने मीडिया के सामने अपना आधिकारिक पक्ष भी रखा है। एनआरडीए के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात का कड़ा खंडन किया है कि उनके डिजिटल टेंडरिंग सिस्टम को किसी बाहरी सर्वर या हैकर्स द्वारा हैक किया गया था।
प्राधिकरण का कहना है कि यह एक तकनीकी त्रुटि या मानवीय भूल हो सकती है, जिसकी आंतरिक तकनीकी जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही इस निविदा में देश की एक ऐसी बड़ी निर्माण कंपनी की एंट्री को लेकर भी विवाद गहरा रहा था, जिसे पूर्व में किसी अन्य राज्य में ब्लैक लिस्ट या प्रतिबंधित किया जा चुका था।
प्राधिकरण ने अपनी सफाई में यह भी स्पष्ट किया है कि टेंडर खोलने की यह पूरी विवादास्पद प्रक्रिया किसी शासकीय अवकाश या छुट्टी के दिन अंजाम नहीं दी गई थी, बल्कि इसे पूर्णतः आधिकारिक कार्य दिवस यानी 25 जून 2026 को शाम 05 बजकर 13 मिनट पर खोला गया था।
बहरहाल, कारण चाहे जो भी रहे हों, लेकिन करोड़ों रुपये के टेंडर की गोपनीयता बाजार में सरेआम नीलाम होने के बाद अब एनआरडीए के डिजिटल सिक्योरिटी और ई-प्रोक्योरमेंट सेल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नए टेंडर में सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा किया जाना बेहद जरूरी है।



