Transfer: छत्तीसगढ़ प्रशासनिक गलियारे में बड़ा फेरबदल: राज्य सरकार ने जनपद पंचायत प्रभारियों को किया इधर से उधर, देखें पूरी सूची
छत्तीसगढ़ सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल किया है। आदिम जाति विकास विभाग की अवर सचिव कुसुम कुजूर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के तहत राज्य के कई जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) का बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है। चुनावी तैयारियों, प्रशासनिक दक्षता और विकास कार्यों की गति बढ़ाने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से ग्रामीण विकास के मोर्चे पर बड़े बदलाव की उम्मीद है।

इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल को लेकर मंत्रालय महानदी भवन से आधिकारिक आदेश जारी हो चुका है। आदिम जाति विकास विभाग की अवर सचिव कुसुम कुजूर के हस्ताक्षर से जारी इस स्थानांतरण सूची के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। शासन के इस फैसले को ग्रामीण स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए बड़ा निर्णय
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से प्रशासनिक सुदृढ़ता और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने की मंशा बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, काफी समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों और विकास कार्यों की धीमी गति वाले जनपदों में नए चेहरों को मौका देकर काम में कसावट लाने का प्रयास किया जा रहा है।
आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। जनपदों के सीईओ जमीनी स्तर पर सरकार की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने की सबसे अहम कड़ी माने जाते हैं, इसलिए इस प्रशासनिक फेरबदल का सीधा असर ग्रामीण विकास के प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा।
अवर सचिव कुसुम कुजूर ने जारी किया आधिकारिक आदेश
इस बड़े फेरबदल की आधिकारिक पुष्टि तब हुई जब आदिम जाति विकास विभाग की अवर सचिव कुसुम कुजूर द्वारा हस्ताक्षरित सूची सार्वजनिक की गई। इस सूची में राज्य सेवा और विभागीय स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें उनकी कार्यक्षमता और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
आदेश के लागू होते ही संबंधित जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानांतरित प्रभारियों को जल्द से जल्द उनके वर्तमान प्रभार से मुक्त करें, ताकि वे नई जगह पर जॉइनिंग देकर विकास कार्यों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ा सकें।
ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी नई गति
छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मनरेगा (MNREGA), स्वच्छ भारत मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) जैसी कई महत्वकांक्षी योजनाएं चल रही हैं। जनपद पंचायत के सीईओ इन सभी केंद्रीय और राज्य स्तरीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होते हैं।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि कई क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय की कमी की शिकायतें भी शासन तक पहुंच रही थीं। इस फेरबदल के माध्यम से सरकार ने न केवल उन शिकायतों का निपटारा किया है, बल्कि नए वित्तीय वर्ष के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए युवा और ऊर्जावान अधिकारियों को मैदानी स्तर पर तैनात किया है।
चुनावी तैयारियों और कानून व्यवस्था से भी जुड़े हैं तार
छत्तीसगढ़ में आगामी समय में होने वाले स्थानीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के मद्देनजर भी इस प्रशासनिक सर्जरी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले एक निश्चित अवधि से अधिक समय तक एक ही स्थान पर रहने वाले अधिकारियों को स्थानांतरित करना अनिवार्य होता है।
हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पाटन जनपद पंचायत के सीईओ के तबादले पर लगाई गई रोक के बाद से सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। यही वजह है कि इस बार सभी कानूनी पहलुओं और विभागीय अर्हताओं को ध्यान में रखकर ही तबादला सूची तैयार की गई है, ताकि किसी भी तकनीकी खामी के कारण आदेश प्रभावित न हो।
अधिकारियों की नई पदस्थापना सूची की मुख्य बातें
इस प्रशासनिक आदेश के तहत जिन जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को बदला गया है, उनमें बस्तर, बिलासपुर, सरगुजा, दुर्ग और रायपुर संभाग के कई संवेदनशील तथा विकासखंड स्तर पर पिछड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने के लिए आदिम जाति विकास विभाग ने विशेष ध्यान रखा है।
जिन जनपदों में परफॉर्मेंस कमजोर पाई गई थी, वहां के अधिकारियों को हटाकर अपेक्षाकृत लूप लाइन या अन्य विभागीय पदों पर भेजा गया है। वहीं, बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड वाले अधिकारियों को चुनौतीपूर्ण और बड़े विकासखंडों की कमान सौंपी गई है। शासन की इस रणनीति से प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जनता और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएं
राज्य सरकार के इस कड़े और बड़े फैसले का जहां सत्ता पक्ष के विधायकों और स्थानीय नेताओं ने स्वागत किया है, वहीं विपक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ अपनी राजनीतिक गोटियां सेट करने का प्रयास बता रहा है। बहरहाल, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि नए अधिकारियों के आने से पंचायतों में रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नए सीईओ अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर किस तरह काम को संभालते हैं और सरकार की ‘सुशासन’ की कल्पना को जमीनी स्तर पर कितना साकार कर पाते हैं।



