खौफनाक वारदात: मजदूरी न बढ़ाने और गाली-गलौज से भड़के कर्मचारियों ने रची खूनी साजिश, मछली कारोबारी को जंगल के रास्ते में रोककर 40 से अधिक बार चाकू से गोदा, पुलिस ने 48 घंटे में किया पर्दाफाश
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सघन वन मार्ग में एक बेहद ही सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाला हत्याकांड सामने आया है। यहां एक फिश फार्म के संचालक व मुंशी विप्लव मंडल की उनके ही पांच कर्मचारियों ने पुरानी रंजिश और विवाद के चलते बेरहमी से हत्या कर दी। मजदूरी बढ़ाने की मांग को ठुकराए जाने और लगातार किए जा रहे दुर्व्यवहार तथा गाली-गलौज से आक्रोशित होकर इन मजदूरों ने पूरी प्लानिंग के साथ इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर महज 48 घंटों के भीतर दो नाबालिगों सहित पांचों हत्यारों को धर दबोचा और सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य वयस्कों और दो विधि से संघर्षरत बालकों (नाबालिगों) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार, डंडे, लूटी गई नकदी और मृतक का मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया गया है।
मजदूरी बढ़ाने के विवाद और अपमान का बदला लेने की थी रंजिश हत्याकांड के पीछे की असली वजह का हुआ खुलासा
पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वे सभी मृतक विप्लव मंडल के अधीन संचालित होने वाले फिश फार्म में काम करते थे। मृतक विप्लव मंडल, उम्र लगभग 55 वर्ष, जो मूल रूप से कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के रहने वाले थे, वर्तमान में गरियाबंद जिले के बोइरगांव में रहकर एमएम फिश कंपनी में मुंशी और संचालक के रूप में कार्य संभाल रहे थे। वे सिहावा रोड पर भी अपनी गतिविधियों का संचालन करते थे। फार्म में काम करने वाले स्थानीय मजदूर पिछले काफी समय से अपनी दैनिक मजदूरी में बढ़ोतरी करने की मांग मुंशी विप्लव मंडल से लगातार कर रहे थे।
मजदूरी बढ़ाने की बजाय मालिक करता था गाली-गलौज और दुर्व्यवहार
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि विप्लव मंडल उनकी मजदूरी बढ़ाने की जायज मांग को लगातार अनसुना कर रहे थे। इतना ही नहीं, जब भी मजदूर इस विषय पर बात करने का प्रयास करते, तो वे उनके साथ गाली-गलौज करते थे और उनका जमकर सामाजिक अपमान करते थे। मालिक द्वारा लगातार किया जा रहा यह दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना सभी मजदूरों के दिलों में गहरे से चुभ रही थी। बार-बार मिलने वाले इस अपमान का बदला लेने के लिए मजदूरों के भीतर गहरे आक्रोश ने जन्म ले लिया और उन्होंने अपने ही मालिक को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की एक बेहद ही खौफनाक व सुनियोजित साजिश रच डाली।
सघन वन मार्ग में फिल्मी अंदाज में घेराबंदी कर किया जानलेवा हमला भैंसामुड़ा मार्ग के घने जंगल में रची गई खूनी साजिश
सुनियोजित योजना के मुताबिक, 27 जून की रात जब विप्लव मंडल अपने एक व्यावसायिक साथी चुम्मन यादव के साथ नगरी से अपना काम खत्म करके रोजाना की तरह मोटरसाइकिल से वापस बोइरगांव लौट रहे थे, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने गोरेगांव से लगभग तीन किलोमीटर आगे नगरी-गरियाबंद सघन वन मार्ग पर उनका रास्ता रोक लिया। रास्ता रोकते ही आरोपियों ने सबसे पहले विप्लव के साथी चुम्मन यादव की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया। मिर्च पाउडर आंखों में गिरते ही चुम्मन पूरी तरह असहाय हो गया और अपनी जान बचाने के लिए घने जंगल और बोइरगांव की ओर भाग निकला।
शरीर पर 40 से अधिक जगहों पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर ली जान
साथी के भाग जाने के बाद पांचों आरोपियों ने अकेले पड़े विप्लव मंडल को चारों तरफ से घेर लिया। आरोपियों ने भारी लकड़ी के डंडों से उनके सिर पर वार किया जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उन पर धारदार चाकू से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के अनुसार विप्लव के सिर, गर्दन, पेट और छाती सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों पर 40 से अधिक बार चाकू से प्रहार किए गए। अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण विप्लव मंडल ने तड़प-तड़प कर मौके पर ही दम तोड़ दिया।
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद लूटपाट कर हुए फरार लूट के माल और आरोपियों की गिरफ्तारी का विवरण
विप्लव मंडल को मौत के घाट उतारने के बाद आरोपी केवल हत्या करके ही शांत नहीं हुए। उन्होंने मृतक की जेब और बैग में रखे हुए लगभग 7,000 रुपये नकद और उनका व्यक्तिगत मोबाइल फोन भी लूट लिया, ताकि घटना को पूरी तरह से एक सामान्य लूटपाट का रूप दिया जा सके। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी घने जंगल के रास्तों का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने बाद में तत्परता दिखाते हुए तीनों मुख्य आरोपियों टंकेश्वर नेताम उर्फ मयंक नेताम (उम्र 19 वर्ष), सुरेंद्र यादव (उम्र 26 वर्ष), और जगदीश विश्वकर्मा (उम्र 50 वर्ष), जो सभी ग्राम बोइरगांव जिला गरियाबंद के निवासी हैं, को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों नाबालिग आरोपियों को भेजा गया बाल सुधार गृह
इस पूरे मामले में कानून का उल्लंघन करने वाले दो नाबालिग लड़कों को भी पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए तीनों वयस्क अपराधियों को स्थानीय न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। वहीं, दोनों नाबालिगों को कानून के प्रावधानों के अनुरूप किशोर न्याय बोर्ड (जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड) के समक्ष प्रस्तुत कर बाल सुधार गृह भेजने की वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने इस त्वरित सफलता के लिए पूरी पुलिस टीम और साइबर सेल की सराहना की है।
घटना के बाद से क्षेत्र के व्यापारियों और ग्रामीणों में गहरा रोष कानून व्यवस्था और श्रमिक विवादों पर उठे गंभीर सवाल
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड के बाद से पूरे नगरी और गरियाबंद के सीमावर्ती इलाकों के व्यापारियों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने इस क्रूरतम घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। समाजशास्त्रियों और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्यस्थलों पर मालिकों और मजदूरों के बीच बढ़ते आपसी विवाद, संवादहीनता और गाली-गलौज की प्रवृत्तियां इस प्रकार के हिंसक अपराधों को जन्म दे रही हैं। पुलिस ने क्षेत्र के सभी फिश फार्म और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों को अपने कर्मचारियों का अनिवार्य रूप से चरित्र सत्यापन कराने के निर्देश जारी किए हैं।



