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विवाहित महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, महतारी वंदन योजना के नए रजिस्ट्रेशन का रास्ता हुआ साफ, बस्तर से होगी शुरुआत

महिला सशक्तिकरण की दिशा में साय सरकार का ऐतिहासिक कदम, जल्द ही खुलेगा महतारी वंदन योजना का आधिकारिक पोर्टल, वंचित पात्र महिलाओं को हर महीने मिलेगी एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता।







रायपुर, 30 जून 2026 : छत्तीसगढ़ की विवाहित महिलाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत देने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार की सबसे लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ लेने से जो पात्र महिलाएं पहले चरण में वंचित रह गई थीं, उनके लिए बहुत जल्द नए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस निर्णय से प्रदेश की लाखों महिलाओं को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और वे मुख्यधारा से जुड़ सकेंगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस संबंध में बड़े संकेत दिए हैं। उनके अनुसार आगामी 15 दिनों के भीतर महतारी वंदन योजना का आधिकारिक वेब पोर्टल नए आवेदनों को स्वीकार करने के लिए दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। सरकार ने इस बार एक विशेष रणनीति तैयार की है जिसके तहत नए चरण का शुभारंभ सबसे पहले बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और ग्रामीण अंचलों से किया जाएगा।

बस्तर संभाग को प्राथमिकता देने के पीछे का मुख्य कारण

सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नए पंजीकरण के इस चरण में बस्तर संभाग को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। इसके पीछे एक बेहद ठोस और व्यावहारिक कारण है। बस्तर के कई अंदरूनी, घने जंगलों से घिरे और संवेदनशील क्षेत्रों में भौगोलिक दूरी, जागरूकता की कमी या फिर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क जैसी तकनीकी दिक्कतों के कारण पहले चरण में बहुत सी पात्र शादीशुदा महिलाएं अपना नामांकन नहीं करवा पाई थीं।

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी संवेदनशील या पिछड़ा इलाका इस वित्तीय सहायता से अछूता न रहे। इसी वजह से इस बार विशेष शिविरों और स्थानीय मैदानी अमले के माध्यम से बस्तर संभाग के हर कोने तक पहुंच बनाने की योजना बनाई गई है ताकि प्रत्येक जरूरतमंद महिला को उसका अधिकार मिल सके।

योजना के माध्यम से अब तक दी गई विशाल वित्तीय सहायता

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश की सभी पात्र विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। यह राशि सीधे तौर पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड एकल बैंक खातों में जमा की जाती है।

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत नवीनतम और आधिकारिक आंकड़ों को देखें तो इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 28 किस्तों का भुगतान बेहद सफलतापूर्वक और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा चुका है। इन किस्तों के माध्यम से अब तक कुल 18,165.19 करोड़ रुपये की एक बहुत बड़ी राशि सीधे तौर पर महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है, जो कि अपने आप में एक बड़ा कीर्तिमान है।

ग्रामीण परिवेश में आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की अद्भुत सफलता

यह योजना केवल एक मासिक नकद सहायता या सरकारी वजीफा बनकर नहीं रह गई है, बल्कि इसने ग्रामीण परिवेश की महिलाओं की सोच और जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है। यह राशि अब उनके स्वावलंबन और आर्थिक आजादी का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। राज्य के अलग-अलग जिलों से इसके कई बेहतरीन उदाहरण सामने आ रहे हैं।

उदाहरण के लिए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की रहने वाली हेमा सिंह ने हर महीने मिलने वाले इन पैसों की सूझबूझ से बचत की और अपने पैर पर खड़ी होने के लिए एक छोटी सी किराना दुकान स्थापित कर ली। इसी तरह सरगुजा जिले की एक ग्रामीण महिला करियो ने इस राशि का सदुपयोग करते हुए बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया, जिससे आज उनके परिवार को एक मजबूत आर्थिक संबल मिला है।

उच्च शिक्षा और बच्चों के सुनहरे भविष्य का बना आधार

आर्थिक सहायता की यह रकम केवल व्यवसाय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के क्षेत्र में भी नई क्रांति ला रही है। मुंगेली जिले की रहने वाली गौरी राजपूत जैसी कई युवतियां और महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी आगे की उच्च शिक्षा को जारी रखने और उसकी फीस भरने के लिए कर रही हैं।

इसके साथ ही सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे घोर आदिवासी बाहुल्य और दूरस्थ जिलों में रहने वाली माताएं इस पैसे से अपने बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन, स्कूल की कॉपियां, किताबें और यूनिफॉर्म आदि का खर्च आसानी से उठा पा रही हैं। इससे बच्चों के कुपोषण स्तर में सुधार हो रहा है और उनका भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साड़ी की राशि सीधे बैंक खातों में होगी ट्रांसफर

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय कामकाज की समीक्षा करते हुए पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक और बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शासकीय कार्यों और पहचान के लिए दी जाने वाली साड़ी की राशि अब किसी अन्य माध्यम के बजाय सीधे उनके स्वयं के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

पूर्व में विभागीय स्तर पर इस व्यवस्था में कुछ बदलाव किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाली कार्यकर्ताओं की सहूलियत, पसंद और पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से साफ-सुथरा व भ्रष्टाचार मुक्त रखने के लिए सरकार ने पुरानी डायरेक्ट पेमेंट व्यवस्था को ही फिर से बहाल करने का एक बड़ा संवेदनशील निर्णय लिया है।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज और पात्रता की शर्तें

पोर्टल दोबारा खुलने की खबर के बीच महिलाओं को अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी जा रही है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए महिला का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आवेदिका की आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष होनी चाहिए।

आवेदन करते समय महिलाओं को अपना आधार कार्ड, विवाह का प्रमाण पत्र या स्थानीय स्तर पर मान्य घोषणा पत्र, निवास प्रमाण पत्र या राशन कार्ड और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपना स्वयं का व्यक्तिगत बैंक पासबुक जमा करना होगा जो कि आधार कार्ड से लिंक हो और जिस पर डीबीटी सक्रिय हो। संयुक्त बैंक खाते इस योजना के लिए मान्य नहीं होते हैं।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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