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विधायक रामकुमार टोप्पो की गिरफ्तारी की मांग तेज, ठप हो सकते हैं राजस्व कार्य

राजस्व और कोर्ट के काम ठप होने के आसार; विधायक पक्ष का आरोप- अधिकारी ने किया था दुर्व्यवहार







रायपुर । अंबिकापुर में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच हुआ विवाद अब एक बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन में तब्दील हो चुका है। नायब तहसीलदार के साथ हुई कथित मारपीट और बदसलूकी के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज ‘छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ’ ने सोमवार से राज्यव्यापी मोर्चा खोल दिया है। संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सोमवार से ‘कलमबंद, कामबंद’ और सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों के इस बड़े कदम से पूरे छत्तीसगढ़ में राजस्व, न्यायालयीन और सरकारी कामकाज पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। संघ ने जिला प्रशासनों को ज्ञापन सौंपते हुए साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।

कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बीते 27 अप्रैल को हुई इस घटना के बाद भी पुलिस प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अधिकारियों में भारी आक्रोश है। संघ ने विधायक रामकुमार टोप्पो की तत्काल गिरफ्तारी और ऑन-ड्यूटी प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा पुख्ता करने की मांग की है। इस आंदोलन को राज्य के कई अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी अपना नैतिक समर्थन दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो इस प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा है कि वे कानून का पूरा सम्मान करते हैं और अपनी गिरफ्तारी देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विधायक ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह का हंगामा न करें और न ही भीड़ इकट्ठा करें। उन्होंने कहा कि यह सुशासन की सरकार है और वे कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, विधायक टोप्पो सरगुजा रेंज के आईजी (IG) के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने की तैयारी में हैं। खबर है कि उनके साथ उनके कुछ समर्थक भी गिरफ्तारी दे सकते हैं।

क्या है पूरा विवाद?

मामले की शुरुआत तब हुई जब विधायक रामकुमार टोप्पो की बहन किसी शासकीय कार्य के सिलसिले में नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंची थीं। वहां किसी बात को लेकर उनकी अधिकारी से कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।

बाद में, नायब तहसीलदार की शिकायत पर पुलिस ने विधायक सहित करीब 10 से 12 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। वहीं, विधायक पक्ष ने भी पासा पलटते हुए प्रशासनिक अधिकारी पर महिलाओं से दुर्व्यवहार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर (शिकायत) दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों की बेमियादी हड़ताल ने अब इस प्रशासनिक विवाद को प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बना दिया है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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