जशपुर का ‘मयाली’ बनेगा प्रदेश का प्रमुख ईको-टूरिज्म हब, पर्यटन मंत्री ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
नील गगन और सघन वनों के बीच बसा मयाली पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र,मंत्री ने परखीं सुविधाएं।

रायपुर । छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की सुरम्य वादियों में स्थित मयाली नेचर कैंप अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने की राह पर है। आज प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस मनोहारी स्थल का औचक निरीक्षण किया और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता के बीच पर्यटन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
मयाली केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और प्राकृतिक ऊर्जा का केंद्र है। एक ओर जहाँ दर्पण की तरह चमकता विशाल जलाशय है, वहीं दूसरी ओर विराट प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में सुशोभित मधेश्वर पर्वत आस्था का केंद्र बना हुआ है। सघन वनों और शीतल बयार के बीच बसे इस स्थल का निरीक्षण करते हुए मंत्री श्री अग्रवाल ने यहाँ की शांति और हरियाली की मुक्तकंठ से सराहना की।
मंत्री अग्रवाल ने कैंप में उपलब्ध आवासीय सुविधाओं (टेंट हाउस), स्वच्छता, भोजन प्रबंध और साहसिक गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा और अनुभव को और अधिक सुखद बनाने के लिए मूलभूत ढांचा विकसित करें। मयाली को राज्य के प्रमुख ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में प्रोजेक्ट किया जाए । पर्यटन गतिविधियों के विस्तार में स्थानीय युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें घर के पास ही रोजगार मिल सके।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने जलाशय में बोटिंग का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि मयाली की धरा पर प्रकृति का संगीत गुंजायमान है। यहाँ का स्वच्छ वातावरण पर्यटकों को एक ऐसा अनूठा अनुभव प्रदान करता है, जो आधुनिक भागदौड़ के बीच मानसिक शांति के लिए अनिवार्य है।
वर्तमान में मयाली नेचर कैंप में पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग, बोटिंग और स्थानीय व्यंजनों की उत्तम व्यवस्था है। मधेश्वर पर्वत के दर्शन के साथ-साथ यहाँ की जैव विविधता और घने जंगल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
राज्य सरकार के इस सक्रिय हस्तक्षेप से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में मयाली न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों के रूप में स्थापित होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के नए द्वार खुलेंगे।



