भक्ति, गऊ सेवा और महाभंडारा:समाजसेवी कुबेर राठी के नेतृत्व में प्रति शनिवार सजता है महाप्रसाद का दिव्य दरबार
मौसम बदला, साल बदले, पर नहीं बदला बजरंगबली के भक्तों को तृप्त करने का यह महासंकल्प।


रायपुर। राजधानी के हृदय स्थल रायपुर रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर इन दिनों केवल श्रद्धा का केंद्र ही नहीं, बल्कि मानवता और अटूट भक्ति के एक महातीर्थ के रूप में उभर कर सामने आया है। ‘नर सेवा ही नारायण सेवा है’ के मूलमंत्र को चरितार्थ करते हुए, सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति द्वारा प्रति शनिवार की भांति इस शनिवार भी एक भव्य और अलौकिक महाभंडारे का आयोजन किया गया। भक्ति का यह विहंगम अनुष्ठान कोई नया नहीं है, बल्कि सन् 2009 से बिना किसी बाधा के अविरल और अनवरत जारी है।
शनिवार के इस पावन भोर की शुरुआत सेवा समिति के संस्थापक और ख्यातिलब्ध समाजसेवी कुबेर राठी द्वारा पवनपुत्र श्री बजरंगबली जी की विशेष पूजा-अर्चना और दिव्य आरती के साथ हुई। हमारी सनातनी परंपरा में गौ-सेवा को सर्वोपरि माना गया है, इसी पौराणिक सोच को जीवंत करते हुए संस्थापक कुबेर राठी ने महाभंडारे से पूर्व श्रद्धाभाव से गौ-माता का पूजन किया। उन्होंने गऊ माता को खीरा, हरी पालक, चना, गुड़, रोटी और चावल सहित विभिन्न पौष्टिक खाद्य सामग्रियां अपने हाथों से भोग स्वरूप अर्पित कीं। तत्पश्चात, रामदूत हनुमान जी को भोग लगाकर महाभंडारे का शंखनाद किया गया।
इस पावन अवसर पर समिति के संस्थापक कुबेर राठी ने भावविह्वल होकर कहा कि यह सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर कोई साधारण स्थान नहीं, बल्कि एक जाग्रत और सिद्ध पीठ है। यहाँ जो भी भक्त सच्चे अंतःकरण और निर्मल मन से अपनी अर्जी लगाता है, महाबली हनुमान उसकी हर मुराद, हर मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। यह मेरा सौभाग्य है और प्रभु बजरंगबली जी की असीम अनुकंपा है, जो उन्होंने मुझे इस पुनीत कार्य के लिए निमित्त मात्र बनाया है।
इस महायज्ञ की सबसे विस्मयकारी और अलौकिक बात यह है कि सन् 2009 से शुरू हुआ यह सिलसिला आज तक थमा नहीं है। चाहे झुलसा देने वाली गर्मी हो, हाड़ कँपाने वाली ठंड हो या फिर मूसलाधार बारिश—प्रभु की रसोई कभी बंद नहीं हुई। प्रति शनिवार को आयोजित होने वाले इस महाभंडारे में लगभग 5,000 से 6,000 भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। इतना ही नहीं, दूर-दराज से आने वाले यात्री और श्रद्धालु अपने परिवारजनों के लिए भी इस पावन प्रसाद को अत्यंत सम्मानपूर्वक साथ लेकर जाते हैं।
संस्थापक एवं समाजसेवी कुबेर राठी ने हनुमान जी की महिमा और संकटों को हरने की उनकी अलौकिक शक्ति को पौराणिक ग्रंथों में इस श्लोक के माध्यम से बेहद सुंदर ढंग से वर्णित किया गया है, जो इस मंदिर की महिमा को भी दर्शाता है :
आदित्यवर्णं कञ्जाक्षं संसारातपवारणम्।
कपिराजं नमस्यामि मारुतिं गंधमादनम्॥
इसका अर्थ है कि मैं उन वानरराज मारुति (हनुमान जी) को बारंबार प्रणाम करता हूँ, जिनकी कांति सूर्य के समान दैदीप्यमान है, जिनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं, जो इस संसार के दुखों और कष्टों रूपी धूप (ताप) को हरने वाले छायादार छाते के समान हैं और जो गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं।
निश्चित रूप से, रायपुर का यह सिद्ध हनुमान मंदिर और समिति के सेवादार कुबेर राठी का यह प्रयास कलयुग में साक्षात हनुमान जी की उपस्थिति और उनकी असीम कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण है।



