सेमीकंडक्टर सुपरपावर बनने की राह पर भारत: मोदी सरकार ने 3 नई यूनिट्स को दी हरी झंडी, ₹1.26 लाख करोड़ के निवेश से पैदा होंगे लाखों रोजगार
भारत में सेमीकंडक्टर क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। मोदी सरकार द्वारा स्वीकृत प्रमुख सेमीकंडक्टर यूनिट्स, ₹1.26 लाख करोड़ से अधिक का निवेश, लाखों नौकरियां और भारत के ग्लोबल चिप सुपरपावर बनने का पूरा विजन पढ़ें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद भारत अब केवल सेमीकंडक्टर चिप्स का डिजाइन ही नहीं करेगा, बल्कि इनका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन भी अपने देश की धरती पर करेगा। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 80,000 से अधिक उच्च-तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
3 बड़ी सेमीकंडक्टर यूनिट्स: गुजरात और असम में स्थापित होंगे मेगा प्लांट्स
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, जिन तीन सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मंजूरी दी गई है, वे अत्याधुनिक तकनीक से लैस होंगी। इनमें सिलिकॉन वेफर निर्माण से लेकर चिप्स की टेस्टिंग और पैकेजिंग तक का काम किया जाएगा।
1. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और PSMC (धोलेरा, गुजरात)
टाटा समूह ने ताइवान की दिग्गज चिप निर्माता कंपनी ‘पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन’ के साथ हाथ मिलाया है। यह भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट होगी, जिसे गुजरात के धोलेरा में स्थापित किया जा रहा है।
इस अकेले प्रोजेक्ट में करीब 91,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। इस प्लांट की क्षमता 50,000 वेफर प्रतिमाह होगी, जिससे सालाना लगभग 300 करोड़ चिप्स का निर्माण संभव होगा।
2. टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (मोरीगांव, असम)
पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक इतिहास में एक नया मील का पत्थर गाड़ते हुए असम के मोरीगांव में टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एक अत्याधुनिक असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित की जा रही है।
27,000 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाला यह प्लांट प्रतिदिन 4.8 करोड़ चिप्स तैयार करने की क्षमता रखेगा। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला हाई-टेक सेमीकंडक्टर प्लांट है।
3. सीजी पावर, रेनेसास और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (साणंद, गुजरात)
मुरुगप्पा ग्रुप की कंपनी सीजी पावर ने जापान की ‘रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स’ और थाईलैंड की ‘स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स’ के साथ मिलकर गुजरात के साणंद में एक विशेषज्ञ चिप असेंबली और पैकेजिंग यूनिट लगाने का निर्णय लिया है।
7,600 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस प्रोजेक्ट की उत्पादन क्षमता 1.5 करोड़ चिप्स प्रतिदिन होगी। यह यूनिट मुख्य रूप से ऑटोमोटिव, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए विशेष चिप्स बनाएगी।
माइक्रोचिप्स क्यों हैं बेहद खास और क्या होगा इनका इस्तेमाल
आज के डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर चिप्स को ‘आधुनिक अर्थव्यवस्था का कच्चा तेल’ कहा जाता है। स्मार्टफोन्स, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, लड़ाकू विमान, डेटा सेंटर, एआई सर्वर, मेडिकल उपकरण और ट्रेन इंजन तक दुनिया की हर आधुनिक मशीन बिना सेमीकंडक्टर के एक बेजान लोहे के ढांचे जैसी है।
वैश्विक बाजार में पिछले कुछ सालों से सेमीकंडक्टर की भारी कमी महसूस की जा रही थी। भारत अब तक अपनी चिप आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर था। घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू होने से भारतीय ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को सस्ती, निर्बाध और सुरक्षित सप्लाई चेन मिल सकेगी।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन और ₹76,000 करोड़ की सरकारी संजीवनी
भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ की शुरुआत की थी, जिसका कुल बजट 76,000 करोड़ रुपये रखा गया था।
इस योजना के तहत केंद्र सरकार देश में सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब या असेंबली यूनिट लगाने वाली कंपनियों को प्रोजेक्ट कॉस्ट का 50% तक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। इसके साथ ही विभिन्न राज्य सरकारें भी अतिरिक्त सब्सिडी और इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता दे रही हैं।
इससे पहले अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने भी गुजरात के साणंद में 2.75 बिलियन डॉलर (लगभग ₹22,500 करोड़) का एडवांस्ड पैकेजिंग प्लांट स्थापित करने की घोषणा की थी, जहां कमर्शियल प्रोडक्शन की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ चुका है। माइक्रोन और केन्स सेमीकॉन जैसी कंपनियों के आने से भारत में एक मजबूत ‘इकोसिस्टम’ आकार ले चुका है।
रोजगार के द्वार: 20,000 टेक जॉब्स और 60,000 अप्रत्यक्ष अवसर
इन तीनों यूनिट्स के शुरू होने से भारत के युवाओं के लिए रोजगार का एक नया क्षितिज खुलने जा रहा है। सरकार के अनुमान के मुताबिक:
- प्रत्यक्ष रोजगार: लगभग 20,000 एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जॉब्स का सृजन होगा।
- अप्रत्यक्ष रोजगार: निर्माण, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, मेंटेनेंस और सर्विसेज सेक्टर में 60,000 से अधिक अप्रत्यक्ष अवसर पैदा होंगे।
इसके अलावा, सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए कुशल प्रतिभा तैयार करने के उद्देश्य से सरकार ने देश के 300 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सेमीकंडक्टर डिजाइन और चिप टेक्नोलॉजी के विशेष कोर्स शुरू किए हैं। इसका लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में 85,000 से अधिक प्रशिक्षित वीएलएसआई और एम्बेडेड सिस्टम इंजीनियर्स तैयार करना है।
आत्मनिर्भर भारत और चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और वैश्विक सप्लाई चेन में आ रहे बदलावों के बीच भारत खुद को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित कर रहा है। ताइवान और चीन पर दुनिया की अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए प्रमुख वैश्विक टेक कंपनियां अब ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति पर काम कर रही हैं, जिसमें भारत सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरा है।
चौथी औद्योगिक क्रांति का आधार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G/6G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ऑटोमेशन हैं और ये सभी तकनीकें सेमीकंडक्टर्स के बिना संभव नहीं हैं। भारत का लक्ष्य अगले एक दशक के भीतर दुनिया के शीर्ष 5 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग नेशन्स में शामिल होना है।



