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नवा रायपुर का ‘शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय’ बना वैश्विक आकर्षण, 2 माह में 72 हजार दर्शकों ने रचा इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समर्पित संग्रहालय में उमड़ रही भीड़, नीदरलैंड तक के पर्यटक पहुंचे देखने









रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित ‘शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ अपने स्थापना के उद्देश्यों को तेजी से सार्थक कर रहा है। उद्घाटन के महज दो महीनों के भीतर 72 हजार से अधिक दर्शकों की आमद ने यह साबित कर दिया है कि यह संग्रहालय न केवल शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है।

प्रधानमंत्री के विजन से मिली नई ऊंचाई

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के रजत जयंती वर्ष पर 01 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य संग्रहालय को जनता को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम के सतत मार्गदर्शन में निर्मित यह संग्रहालय अपनी डिजिटल विशिष्टताओं और ऐतिहासिक गहराई के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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डिजिटल अनुभव और वैश्विक प्रशंसा

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि संग्रहालय को पूरी तरह डिजिटल और इंटरैक्टिव बनाया गया है। यहां क्यूआर कोड स्कैनिंग, माइक्रोफोन व्यवस्था और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से सेनानियों की शौर्य गाथाएं जीवंत हो उठती हैं। उन्होंने कहा कि संग्रहालय का धरातल पर आना नई पीढ़ी को अपने पुरखों के साहस की याद दिलाता रहेगा।

​संग्रहालाध्यक्ष डॉ. अनिल वीरूलकर के अनुसार, हाल ही में नीदरलैंड के पर्यटकों और राष्ट्रीय डीजीपी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए शीर्ष अधिकारियों ने इस डिजिटल संग्रहालय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है।

पर्यटक सुविधाओं का विशेष ध्यान

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संग्रहालय परिसर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है:

  • सुविधाएं: दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर, शिशुवती महिलाओं के लिए केयर रूम और प्राथमिक उपचार केंद्र की व्यवस्था।
  • कोयतूर बाजार: परिसर में स्थित इस बाजार के माध्यम से जनजातीय महिलाएं हस्तशिल्प और आभूषणों का विक्रय कर रही हैं, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।
  • सुरक्षा: पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों से लैस है और दर्शकों की सहायता के लिए प्रशिक्षित गाइड तैनात हैं।

दर्शकों की जुबानी: “लगता है जैसे हम उसी कालखंड में पहुंच गए”

झारखंड से आए पर्यटक इस्लाम अंसारी ने झांकियों को ‘जीवंत’ बताया, वहीं धमतरी के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ऑडियो-वीडियो माध्यमों से ऐसा महसूस होता है जैसे हम स्वतंत्रता संग्राम के मैदान में ही खड़े हैं। स्थानीय विद्यार्थियों मयंक और आयुष के लिए यह मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

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​नवा रायपुर का यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के बलिदान को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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