बस्तर के 44 हजार किसानों का धान नहीं खरीदा गया ; विधानसभा में गूंजा मुद्दा, सरकार-विपक्ष आमने-सामने
बजट सत्र में कांग्रेस विधायकों ने उठाया बड़ा सवाल; सरकार ने कहा केंद्र तक नहीं पहुंचे किसान, असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से किया बहिर्गमन।

रायपुर, 11 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बस्तर संभाग के हजारों किसानों से धान खरीदी नहीं होने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि बस्तर क्षेत्र के 44 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों का धान इस बार नहीं खरीदा जा सका। इस मुद्दे को लेकर सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने अंततः सदन से बहिर्गमन कर दिया।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को राज्य की सबसे बड़ी कृषि नीतियों में से एक माना जाता है। प्रदेश में हर वर्ष लाखों किसान समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचते हैं और सरकार इस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करती है।
प्रश्नकाल में उठा धान खरीदी का मुद्दा
बस्तर के कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल और कोंटा के विधायक कवासी लखमा ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से पूछा कि बस्तर संभाग के हजारों किसानों का धान आखिर क्यों नहीं खरीदा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में पंजीकृत किसानों के बावजूद धान खरीदी पूरी नहीं हो सकी, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा गया कि जिन किसानों ने धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों तक पहुंचकर प्रक्रिया पूरी नहीं की, उनका धान नहीं खरीदा जा सका। सरकार ने यह भी कहा कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी।
धान खरीदी की अवधि बढ़ाई गई थी
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में धान खरीदी की प्रक्रिया 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक संचालित की गई थी। किसानों की मांग को देखते हुए सरकार ने खरीदी की समय सीमा बढ़ाने का फैसला भी किया था।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों का धान निर्धारित अवधि में नहीं बिक पाया था, उनके सत्यापन के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच और छह फरवरी 2026 को भी अतिरिक्त दिनों में धान खरीदी की गई।
सरकार का दावा, कांग्रेस शासनकाल से ज्यादा खरीदी
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस शासनकाल की तुलना में अधिक धान खरीदी हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार धान खरीदी का आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ा है।
हालांकि इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि कितने किसानों का रकबा समर्पण कराया गया है। मंत्री ने इस पर कहा कि यह मूल प्रश्न का हिस्सा नहीं है, इसलिए इस पर जवाब देना उचित नहीं है।
कांग्रेस का आरोप, हजारों किसानों का भुगतान अटका
कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 32 हजार किसानों के टोकन कटने के बावजूद उनका धान नहीं खरीदा गया। उन्होंने दावा किया कि इससे करीब 206 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को नहीं मिल पाया।
लखमा ने कहा कि बस्तर के कई किसान मजबूरी में अपना धान ओडिशा और आंध्र प्रदेश में कम कीमत पर बेचने को मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया हुआ है और धान नहीं बिकने से उनके सामने कर्ज चुकाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
भूपेश बघेल और खाद्य मंत्री के बीच तीखी बहस
धान खरीदी के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। भूपेश बघेल ने पूछा कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया, क्या सरकार अब उनकी खरीदी करेगी और क्या उनका कर्ज माफ किया जाएगा।
इस पर खाद्य मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब भी कई पंजीकृत किसान अपना धान नहीं बेच पाए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय समय सीमा समाप्त होने के बाद धान खरीदा गया था या किसानों का कर्ज माफ किया गया था।
मंत्री ने दोहराया कि जो किसान धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंचे, उनका धान नहीं खरीदा गया। मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महत्व
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में से एक है और इसे धान का कटोरा भी कहा जाता है। राज्य सरकार हर वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कर किसानों को भुगतान करती है। इस वर्ष भी सरकार ने लाखों किसानों से धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया था और कई जिलों में रिकॉर्ड स्तर पर खरीदी होने का दावा किया गया है।
हालांकि बस्तर क्षेत्र के किसानों से धान खरीदी नहीं होने के आरोपों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और प्रमुखता से उठ सकता है।
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