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500 रुपये की रिश्वत से नाराजगी जताने वाला IPS अब 1 करोड़ के कथित रिश्वत कांड में घिरा

IPS राहुल बंसल पर एक करोड़ की कथित रिश्वत का आरोप लगा है। इसी बीच 500 रुपये की घूस पर नाराजगी वाला उनका पुराना मॉक इंटरव्यू वायरल है।





13 August 2026 | Raipur: छत्तीसगढ़ कैडर के 2022 बैच के IPS अधिकारी राहुल बंसल इन दिनों एक गंभीर कथित रिश्वत मामले को लेकर चर्चा में हैं। उन पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा है और इसी बीच उनका कई साल पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह 500 रुपये की रिश्वत मांगे जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं।

राहुल बंसल पर आरोप से जुड़ा मामला दिल्ली की एक स्पेशल CBO कोर्ट तक पहुंच चुका है। शिकायत में उनके साथ सहायक उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार राठौर और कांस्टेबल अंशुल शर्मा के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि एक साइबर फ्रॉड केस को रफा-दफा करने के लिए एक करोड़ रुपये की रकम मांगी और ली गई।

इस मामले में शिकायतकर्ता ने अदालत के सामने डिजिटल सबूत भी पेश किए हैं। इनमें WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग शामिल होने की बात कही गई है, जिन्हें कथित तौर पर पैसों के लेनदेन और पूरे मामले से जुड़ा बताया गया है।

शिकायत के मुताबिक, कथित एक करोड़ रुपये का भुगतान एक साथ नहीं हुआ था। आरोप है कि मई 2026 के दौरान हवाला चैनलों के जरिए 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में रकम दी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ के DGP और CBI निदेशक से Action Taken Report यानी ATR तलब की है। इसका मतलब यह है कि अदालत ने संबंधित जांच और अब तक की गई कार्रवाई की स्थिति की जानकारी मांगी है।

इस पूरे मामले के बीच वायरल हो रहा पुराना वीडियो कहानी को और ज्यादा चर्चा में ले आया है। वीडियो में राहुल बंसल सिविल सेवा की तैयारी के दौर के एक मॉक इंटरव्यू में बैठे दिखाई देते हैं और उनसे भ्रष्टाचार, प्रशासनिक व्यवस्था तथा पुलिस सुधारों से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।

मॉक इंटरव्यू के दौरान बंसल ने अपने परिवार से जुड़ा एक अनुभव साझा किया था। उन्होंने बताया था कि उनके भाई IIT Kanpur में पढ़ाई के दौरान एक रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन के लिए अमेरिका जाने वाले थे और इसके लिए तत्काल जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत थी।

उनके मुताबिक, उस समय संबंधित दस्तावेज जल्दी तैयार कराने के लिए एक पंचायत अधिकारी ने 500 रुपये की रिश्वत मांगी थी। बंसल ने इंटरव्यू में इस रकम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और कहा था कि उन्हें 500 रुपये की घूस देने में बहुत बुरा लगा था।

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उसी बातचीत में उन्होंने यह बात भी रखी थी कि व्यवस्था में कुछ लोग भ्रष्ट हो सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से पूरी व्यवस्था को गलत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने प्रशासनिक कमियों और पुलिस सुधारों पर भी अपनी राय रखी थी।

अब जब उसी अधिकारी पर एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का आरोप सामने आया है, तो सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। वायरल वीडियो के साथ लोग उनके पुराने बयानों और वर्तमान आरोपों के बीच तुलना कर रहे हैं।

हालांकि, मौजूदा मामले में एक जरूरी कानूनी पहलू यह है कि राहुल बंसल पर अभी आरोप लगे हैं और मामले की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी है। किसी अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने से पहले आरोपों को अंतिम सत्य मानना कानूनी रूप से सही नहीं होगा।

राहुल बंसल की सेवा यात्रा भी इस मामले को चर्चा में लाने वाली एक वजह है। IPS बनने से पहले वह Income Tax Inspector के रूप में काम कर चुके थे और बाद में UPSC सिविल सेवा के जरिए IPS में आए।

IPS बनने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में City Superintendent of Police यानी CSP के रूप में पहली मैदानी पोस्टिंग मिली थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा विवाद इसी पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान सामने आया।

मामला साइबर फ्रॉड से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप की प्रकृति यह है कि संबंधित मामले को खत्म करने या रफा-दफा करने के लिए कथित तौर पर बड़ी रकम की मांग की गई और भुगतान की व्यवस्था हवाला चैनलों के जरिए की गई।

अगर शिकायत में लगाए गए आरोप और पेश किए गए डिजिटल सबूत जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल रिश्वत लेने के आरोप तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें कथित तौर पर साइबर फ्रॉड केस की जांच को प्रभावित करने, पुलिस पद का इस्तेमाल करने और हवाला चैनल के जरिए रकम के लेनदेन जैसे पहलुओं की भी जांच हो सकती है।

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फिलहाल अदालत की ओर से मांगी गई Action Taken Report इस मामले में अगला अहम कदम मानी जा रही है। रिपोर्ट से यह साफ हो सकता है कि शिकायत के बाद संबंधित एजेंसियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है और मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है।

मामले में WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग का जिक्र भी अहम है। ऐसे डिजिटल सबूतों की जांच में यह देखा जाता है कि बातचीत किन लोगों के बीच हुई, किस समय हुई और उसमें पैसों या कथित सौदे को लेकर क्या बात हुई।

हवाला के जरिए 50-50 लाख रुपये की दो कथित किस्तों में भुगतान का आरोप भी जांच का अहम हिस्सा बन सकता है। एक करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम के कथित लेनदेन में पैसे के स्रोत, मध्यस्थों और रकम की आवाजाही से जुड़े सवाल जांच एजेंसियों के सामने रहेंगे।

इस मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी अलग तरह से सामने आई है। मूल विवाद से अलग राहुल बंसल का पुराना मॉक इंटरव्यू तेजी से शेयर होने लगा, जिससे मामला केवल कानूनी आरोपों तक सीमित न रहकर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।

वायरल वीडियो में भ्रष्टाचार को लेकर उनकी स्पष्ट नाराजगी अब सोशल मीडिया यूजर्स के लिए सबसे बड़ा चर्चा बिंदु है। एक तरफ पुराना वीडियो है, जिसमें वह 500 रुपये की रिश्वत के अनुभव को खराब बताते हैं, दूसरी तरफ मौजूदा शिकायत में उन पर एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का आरोप है।

सोशल मीडिया पर की जा रही इस तुलना का असर अधिकारी की सार्वजनिक छवि पर भी पड़ रहा है। लेकिन किसी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट से आरोप साबित नहीं होते और मौजूदा मामले में वास्तविक स्थिति जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगी।

राहुल बंसल के साथ शिकायत में जिन दो पुलिसकर्मियों के नाम हैं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। ASI प्रवीण कुमार राठौर और कांस्टेबल अंशुल शर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई भी जांच के दौरान सामने आनी है।

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इस मामले में एक और सवाल पुलिस सिस्टम की जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। यदि किसी अधिकारी पर साइबर फ्रॉड जैसे गंभीर मामले को कथित तौर पर पैसे लेकर प्रभावित करने का आरोप लगता है, तो इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और पुलिसिंग पर सीधे सवाल खड़े होते हैं।

वहीं दूसरी तरफ, यदि आरोप जांच में गलत साबित होते हैं तो यह भी उतना ही जरूरी होगा कि अधिकारी को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले। इसलिए इस मामले में आरोप, जांच और दोषसिद्धि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

राहुल बंसल का पुराना इंटरव्यू इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया साझा की थी। उस समय वह सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अपने विचार मॉक इंटरव्यू पैनल के सामने रख रहे थे।

अब उसी वीडियो को उनके मौजूदा विवाद के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है कि एक अधिकारी के पुराने सार्वजनिक विचार और वर्तमान में लगाए गए आरोपों के बीच कितना बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

फिलहाल मामले की कानूनी दिशा अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर निर्भर है। विशेष अदालत द्वारा छत्तीसगढ़ के DGP और CBI निदेशक से ATR मांगे जाने के बाद आने वाले समय में जांच की स्थिति को लेकर ज्यादा स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।

यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी संवेदनशील है, क्योंकि आरोप एक ऐसे अधिकारी पर लगे हैं जो 2022 बैच के IPS अधिकारी हैं और जिनकी पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान ही यह विवाद सामने आया। आगे की जांच यह तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित लेनदेन में किन लोगों की भूमिका रही।

फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा 500 रुपये की उस पुरानी कहानी और एक करोड़ रुपये के मौजूदा आरोप के बीच बने विरोधाभास की हो रही है। लेकिन इस पूरे मामले का अंतिम सच वायरल वीडियो नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले सबूत और अदालत की प्रक्रिया तय करेगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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