हरेली पर छत्तीसगढ़ी रंग में दिखे CM साय, पिंक ऑटो से पहुंचे, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा के बाद लोकधुनों पर झूमे
हरेली तिहार पर CM विष्णु देव साय पिंक ऑटो से पहुंचे। गौमाता और कृषि औजारों की पूजा की। किसानों के लिए सरकारी योजनाओं और आधुनिक खेती पर बात की। लोकधुनों पर भी झूमे।

13 August 2026 | Raipur: छत्तीसगढ़ के प्रथम लोकपर्व हरेली तिहार के मौके पर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में इस बार पूरा माहौल गांव और खेत-खलिहान की संस्कृति से रंगा नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में पहुंचे और भगवान शिव, गौमाता तथा कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी बारिश, बेहतर फसल और किसानों की खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री की एंट्री भी खास रही। वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक संगीता यादव के पिंक ऑटो में कार्यक्रम स्थल पहुंचे। मुख्यमंत्री का यह अंदाज समारोह में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहा।
हरेली के आयोजन में केवल पूजा-पाठ तक कार्यक्रम सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने गौशाला में पहुंचकर गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ और पारंपरिक लोंदी खिलाई। इसके बाद उन्होंने पौधरोपण किया, कृषि विभाग के स्टॉल देखे, आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी ली और लोक कलाकारों के साथ छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत का आनंद लिया।
हरेली तिहार की शुरुआत मुख्यमंत्री निवास में गौरी-गणेश और नवग्रह पूजन से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री साय ने मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक किया। नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती में इस्तेमाल होने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की गई।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के सामने भी नमन किया। हरेली के मौके पर कृषि उपकरणों की पूजा की परंपरा इस बात को दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति में खेती केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन व्यवस्था का अहम हिस्सा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली तक खेती के कई प्रमुख काम पूरे हो चुके होते हैं। ऐसे समय में किसान प्रकृति, कृषि उपकरण और पशुधन के प्रति आभार जताते हुए आने वाले कृषि वर्ष के लिए अच्छी फसल की कामना करता है।
हरेली समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल तक सफर किया।
मुख्यमंत्री का पिंक ऑटो में पहुंचना समारोह की खास तस्वीरों में शामिल रहा। इससे महिला ऑटो चालक की भूमिका भी सामने आई और कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान इस ओर गया।
हरेली जैसे लोकपर्व में मुख्यमंत्री का यह अंदाज सरकारी कार्यक्रम की औपचारिकता से अलग नजर आया। पूरे परिसर में ग्रामीण जीवन और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक दिखाई दी।
मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री निवास परिसर में बनाई गई गौशाला भी पहुंचे। यहां उन्होंने गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक लोंदी खिलाई गई।
छत्तीसगढ़ के गांवों में हरेली के दिन पशुधन को विशेष महत्व दिया जाता है। लोंदी खिलाने की परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उन्हें बीमारियों से बचाने की लोक मान्यता से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन और खेती एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लोक परंपराएं पशुओं के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश देती हैं और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है।
हरेली समारोह के दौरान मुख्यमंत्री साय ने किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि क्षेत्र में किए जा रहे कामों का भी जिक्र किया। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड, सहकारी कृषि ऋण, फसल बीमा, सिंचाई सुविधाओं और आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य में सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार फसल बीमा को आसान बनाने, सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने और आधुनिक तकनीक को खेतों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।
धान खरीदी को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की नीति का उल्लेख किया। उनके अनुसार राज्य में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा फायदा मिल रहा है।
हरेली कार्यक्रम में कृषि और विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए थे। मुख्यमंत्री ने इन स्टॉलों का निरीक्षण किया और किसानों के लिए इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक और कृषि उपकरणों की जानकारी ली।
कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी ली। इसी दौरान रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में मशीनों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से किसानों की लागत और श्रम कम किया जा सकता है। साथ ही उत्पादकता बढ़ाने में भी आधुनिक कृषि यंत्रीकरण की भूमिका अहम है।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के स्टॉल पर ड्रोन दीदी चंद्रकली वर्मा ने मुख्यमंत्री से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करती हैं।
चंद्रकली के मुताबिक उन्हें प्रति एकड़ 300 रुपये पारिश्रमिक मिलता है। वह अब तक 2,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन के जरिए छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में करीब 7 लाख रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना की। कार्यक्रम में इसे खेती में तकनीक के इस्तेमाल और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर से जोड़कर देखा गया।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने किसानों को अरहर और उड़द दाल के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने कृषि मित्रों द्वारा तैयार किए गए ब्रह्मास्त्र और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि उत्पादों की जानकारी भी ली।
कार्यक्रम में मधुमक्खी के मोम से तैयार लिप बाम जैसे उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए। उद्यानिकी विभाग के स्टॉल पर किसान रामविशाल निषाद ने मुख्यमंत्री को नीम का पौधा भेंट किया।
इन स्टॉलों के जरिए पारंपरिक खेती, प्राकृतिक कृषि और आधुनिक तकनीक को एक ही मंच पर दिखाने की कोशिश की गई।
मुख्यमंत्री निवास परिसर को हरेली के अनुरूप सजाया गया था। नीम और आम के पत्तों, गेंदे के फूलों तथा ग्रामीण सजावट ने पूरे परिसर को गांव के पारंपरिक माहौल में बदल दिया।
गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेलों ने खासा आकर्षण पैदा किया। बच्चों और युवाओं के लिए ये खेल केवल मनोरंजन नहीं रहे, बल्कि छत्तीसगढ़ की पुरानी खेल संस्कृति से जुड़ने का मौका भी बने।
गेड़ी पर कलाकारों और प्रतिभागियों ने करतब दिखाए। रहचुली ने भी लोगों का ध्यान खींचा और पूरे आयोजन में गांव के मेले जैसा माहौल बना रहा।
हरेली समारोह का सबसे जीवंत हिस्सा लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा। मांदर, ढोलक और दूसरे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक लोकधुनों पर झूमते नजर आए। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर लोक कलाकारों में भी उत्साह दिखाई दिया।
कार्यक्रम में ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए थे। मुख्यमंत्री ने इन स्टॉलों का अवलोकन किया और नागरिकों तथा कलाकारों से बातचीत कर हरेली की खुशियां साझा कीं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हरेली को छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा, प्रकृति और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बताया। उन्होंने कहा कि कृषि औजारों और गौमाता की पूजा छत्तीसगढ़ की कृतज्ञता की परंपरा को सामने लाती है।
उन्होंने किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य मिलने और महतारी वंदन योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलने का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक किसान का घर मजबूत होगा तो गांव मजबूत होगा और गांव मजबूत होगा तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी हरेली को खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने कहा कि किसान की आर्थिक मजबूती प्रदेश और देश दोनों की समृद्धि से जुड़ी है।
हरेली के प्रकृति संरक्षण से जुड़े संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पौधरोपण किया।
मंत्रीगण और विभिन्न निगम-मंडल तथा आयोगों के पदाधिकारियों ने भी पौधे लगाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली हमें प्रकृति से सिर्फ लेने के बजाय उसे सहेजने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की सीख देती है।
पौधा लगाना पहला कदम है, लेकिन उसे पेड़ बनने तक बचाना भी उतना ही जरूरी है। हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास से दिया गया यह संदेश पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखा गया।
हरेली समारोह में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायकगण, विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, किसान तथा बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
इस पूरे आयोजन में हरेली की पारंपरिक पहचान और आधुनिक कृषि की तस्वीर एक साथ दिखाई दी। एक ओर नांगर, कुदाल, गेड़ी, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन थे, तो दूसरी ओर ड्रोन, हार्वेस्टर और आधुनिक कृषि तकनीक की चर्चा थी।
मुख्यमंत्री साय ने हरेली को छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता और जड़ों से जुड़ा पर्व बताते हुए किसानों, पशुधन, प्रकृति और ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित यह समारोह इस बार पूजा, कृषि, पर्यावरण, महिला सशक्तीकरण और लोक संस्कृति के कई रंगों को एक साथ समेटे नजर आया।


