साय सरकार में खाद की किल्लत और बिजली बिल का ‘आतंक’, जन-आक्रोश से घिरी भाजपा: भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री ने बिजली, खाद संकट, बस्तर में मलेरिया की वापसी और युवाओं पर कार्रवाई को लेकर राज्य व केंद्र सरकार को घेरा; स्वामी आत्मानंद और हाट-बाज़ार क्लिनिक योजना बंद करने का लगाया आरोप।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने राज्य की विष्णुदेव साय सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बघेल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बिजली, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। साय सरकार के शासन में प्रदेश का हर वर्ग परेशान है और सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बिजली व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अंग्रेजी हुकूमत में ईस्ट इंडिया कंपनी थी और अब भाजपा राज में ‘वेस्ट इंडिया कंपनी’ हावी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री साय की योजना, अडानी के स्मार्ट मीटर और उसमें लगी अंबानी की चिप मिलकर जनता से संगठित लूट मचा रही है।
उन्होंने खुलासा किया कि रायपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार को इस महीने 9 लाख रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया है। गर्मी से ज्यादा बिजली के बिल बारिश में आ रहे हैं। इस अत्याचार से तंग आकर कवर्धा के पांडातराई में जनता जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर फेंक रही है। उन्होंने चिंता जताई कि मीटर रीडरों की नौकरियां छीनी जा रही हैं, जिससे वे भी आंदोलन की राह पर हैं।
किसानों की बदहाली पर बात करते हुए बघेल ने कहा कि प्रदेश में खंड वर्षा से खेती प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार के पास कोई कार्ययोजना नहीं है। गरियाबंद से लेकर कवर्धा तक किसानों को यूरिया और डीएपी खाद नहीं मिल रही है। खाद की दोगुने-तिगुने दामों पर खुलेआम कालाबाजारी हो रही है, और जब कवर्धा में अधिकारी जांच करने पहुंचे तो वहां विवाद की स्थिति बनी।
केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि देश में विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं पर दमनकारी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि समझौता करने के बावजूद बिहार और बंगाल में सैकड़ों युवाओं को जेलों में ठूंस दिया गया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि राजनीतिज्ञों और उद्योगपतियों के बाद अब ‘जैन समुदाय के बच्चों’ को टारगेट किया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने 12 सालों में जिस कटु भाषा का प्रयोग किया, आज की युवा पीढ़ी उसी भाषा में जवाब दे रही है, हालांकि वे ऐसी भाषा का समर्थन नहीं करते।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई ‘हाट-बाजार क्लीनिक’ और ‘शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना’ को साय सरकार ने दुर्भावनापूर्वक बंद कर दिया है। इसका दुष्परिणाम यह है कि बस्तर में मलेरिया और डायरिया का प्रकोप फिर लौट आया है। बीते 6 महीनों में बस्तर में 8,226 मलेरिया के मामले सामने आए हैं और कांकेर में 10 दिनों के भीतर 3 लोगों की मौत हो चुकी है। ‘मलेरिया मुक्त अभियान’ अब सिर्फ कागजों पर चल रहा है और मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण ठप है।
शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि 16 जून से स्कूल खुलने के बावजूद बच्चों को आज तक ड्रेस और बस्ते नहीं मिले हैं। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके साथ ही, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का न केवल नाम बदला जा रहा है, बल्कि वहां अब गरीबों से फीस भी वसूली जा रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।



