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छत्तीसगढ़ में पक्के मकान का सपना होगा सच: पीएम आवास योजना 2.0 में 11,477 नए घरों को मंजूरी, हर परिवार को मिलेंगे ₹2.82 लाख

छत्तीसगढ़ के शहरी गरीबों के लिए बड़ी खुशखबरी। पीएम आवास योजना शहरी 2.0 के तहत 11,477 नए पक्के मकानों को मिली मंजूरी। हितग्राहियों को मिलेंगे 2.82 लाख रुपये, तय समय पर काम पूरा करने पर बोनस भी।







15 जुलाई 2026, रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ियों और किराए के कमरों में रहकर पक्के मकान का सपना संजोने वाले हजारों परिवारों के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर आई है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के अंतर्गत, राज्य के विभिन्न निकायों में कुल 11,477 नए पक्के आवासों के निर्माण को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी गई है। यह कदम राज्य के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए सरकार उन लोगों की सुध ले रही है, जो आर्थिक तंगहाली के कारण अपने सिर पर एक मजबूत छत खड़ी करने में असमर्थ थे। इस बार की योजना को न केवल अधिक पारदर्शी बनाया गया है, बल्कि निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए इसमें कई आकर्षक प्रोत्साहन भी जोड़े गए हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से राज्य के शहरी विकास को एक नई गति मिलेगी और बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।

चार चरणों में सीधे बैंक खाते में आएगी ₹2,82,850 की मदद

इस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसकी वित्तीय संरचना है, जिसे बेहद व्यावहारिक बनाया गया है। सरकार द्वारा प्रत्येक चिन्हित हितग्राही को अपने मकान के निर्माण के लिए कुल 2,82,850 रुपये की बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि किसी बिचौलिए के जरिए नहीं, बल्कि सीधे निर्माण कार्य की प्रगति के आधार पर हितग्राही के बैंक खाते में डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी। इससे भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति को बनाए रखने के लिए इस सहायता राशि को चार अलग-अलग चरणों में बांटकर जारी करने का प्रावधान किया गया है। योजना के नियमों के मुताबिक, सबसे पहले मकान की नींव (फाउंडेशन) की खुदाई और उसे तैयार करने के लिए पहली किस्त के रूप में पूरे 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके बाद, जब दीवारें लिंटल स्तर तक खड़ी हो जाएंगी, तो दूसरी किस्त के रूप में 50,000 रुपये जारी होंगे। मकान पर पक्की छत डलने (रूफ कास्टिंग) के समय तीसरी किस्त के 50,000 रुपये और अंत में फिनिशिंग व पूरा काम मुकम्मल होने पर आखिरी किस्त के रूप में 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

तय समय पर घर बनाने वाले परिवारों को ₹32,000 से ज्यादा का स्पेशल बोनस

इस बार की योजना में छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी ओर से एक बेहद अनूठी और सराहनीय पहल जोड़ी है, जिसका नाम ‘मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना’ रखा गया है। अमूमन देखा जाता है कि पैसों की कमी या ढिलाई के कारण सरकारी मकानों का निर्माण सालों-साल लटका रहता है। इसी सुस्ती को खत्म करने के लिए सरकार ने हितग्राहियों के सामने एक बेहतरीन ऑफर रखा है।

अगर कोई भी परिवार अपने मकान के निर्माण कार्य को सरकार द्वारा निर्धारित की गई समय-सीमा यानी अधिकतम 18 महीनों के भीतर पूरी तरह से मुकम्मल कर लेता है, तो उसे एक विशेष इनाम दिया जाएगा। ऐसे जागरूक और सक्रिय हितग्राहियों को सरकार की तरफ से 32,850 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि (बोनस) दी जाएगी। यह बोनस राशि सीधे उनके खाते में ट्रांसफर होगी, जिससे वे अपने नए घर की साज-सज्जा या गृह प्रवेश के कार्यक्रमों का खर्च आसानी से उठा सकेंगे।

सख्त नियमों का पालन है अनिवार्य, कारपेट एरिया का रखना होगा ध्यान

पक्के मकान के सपने को हकीकत में बदलने के लिए सरकार ने कुछ कड़े और स्पष्ट नियम भी तय किए हैं, जिनका पालन करना हर हितग्राही के लिए बेहद जरूरी है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों, नगर निगमों और नगर पंचायतों को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन नियमों में सबसे महत्वपूर्ण मानक मकान के आकार (कारपेट एरिया) को लेकर है।

नियमों के मुताबिक, योजना के तहत बनने वाले प्रत्येक आवास का वास्तविक कारपेट क्षेत्रफल न्यूनतम 30 वर्गमीटर से लेकर अधिकतम 45 वर्गमीटर के बीच ही होना अनिवार्य है। यदि कोई हितग्राही लालच में आकर या अज्ञानतावश इस तय मानक से छोटा या बहुत बड़ा निर्माण करवाता है, तो उसकी अगली किस्तों को तुरंत रोक दिया जाएगा। जियो-टैगिंग और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बाद ही अधिकारी हर चरण की राशि को आगे बढ़ाने की मंजूरी देंगे।

जानिए कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 का लाभ उठाने के लिए पात्रता के कुछ बेहद जरूरी मापदंड तय किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • स्थानीय निवासी: आवेदक का संबंधित शहरी निकाय या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र का वैध और स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
  • पक्के मकान का अभाव: सबसे बड़ी शर्त यह है कि आवेदक या उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर पूरे देश में कहीं भी कोई दूसरा पक्का मकान पंजीकृत नहीं होना चाहिए।
  • भूमि का मालिकाना हक: हितग्राही के पास उस शहरी क्षेत्र में घर बनाने के लिए खुद की वैध भूमि (जमीन) होनी चाहिए या फिर सरकार द्वारा जारी किया गया वैध पट्टा होना चाहिए।
  • आय वर्ग की सीमा: यह योजना मुख्य रूप से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों को अपने आधार कार्ड, वैध आय प्रमाण पत्र, जमीन या पट्टे के कानूनी दस्तावेज और अपने बैंक खाते का पूरा विवरण (पासबुक) नजदीकी नगर निगम या नगर पालिका कार्यालय में जमा करना होगा, जहां स्क्रूटनी के बाद अंतिम सूची तैयार की जाती है।

सूडा की निकायों को हिदायत: पारदर्शिता से हो हर काम

राज्य सरकार इस बार योजना के क्रियान्वयन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले इंजीनियर और सर्वेक्षक नियमित रूप से निर्माण साइट्स का दौरा करेंगे। हर चरण की तस्वीर ऐप पर अपलोड होने के बाद ही राशि ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होगी, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दो सालों के भीतर छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों को पूरी तरह से झुग्गी-मुक्त बनाया जा सके और हर गरीब परिवार के पास अपनी खुद की एक पक्की और सुरक्षित छत हो। 11,477 नए मकानों की यह मंजूरी इसी बड़े और दूरदर्शी लक्ष्य की ओर बढ़ाया गया एक मजबूत कदम है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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