AdministrationBig BreakingCareerChhattisgarhEducationEmploymentFeaturedPolitics
Trending

छत्तीसगढ़ के 80 हजार इन-सर्विस शिक्षकों को बड़ी राहत: अब 31 अगस्त 2028 तक पास कर सकेंगे टीईटी परीक्षा

राज्य के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की समय-सीमा में की गई बढ़ोतरी।







रायपुर, 11 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों सेवाकालीन (इन-सर्विस) शिक्षकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत देने वाली खबर सामने आई है। राज्य के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे 80 हजार से अधिक शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए अब अतिरिक्त समय मिल गया है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब ये शिक्षक 31 अगस्त 2028 तक इस अनिवार्य परीक्षा को पास कर सकेंगे।

यह आदेश विशेष रूप से उन शिक्षकों पर प्रभावी होगा जिनकी नियुक्ति 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच हुई थी। इस बढ़ी हुई समय-सीमा के बाद शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी करने और अपनी न्यूनतम व्यावसायिक योग्यता को पूरा करने के लिए एक लंबा अवसर मिल जाएगा, जिससे शिक्षा विभाग के प्रशासनिक हल्कों में चल रही चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

तय समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करना है अनिवार्य, अन्यथा नौकरी पर रहेगा संकट

अनिवार्य योग्यता और सेवा शर्तें: भले ही शासन और न्यायालय की ओर से समय-सीमा को आगे बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया गया है, लेकिन इस नियम की अनिवार्यता में कोई ढील नहीं दी गई है। यदि इस निर्धारित समयावधि के भीतर संबंधित शिक्षक टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहते हैं, तो उनकी नौकरी पर वैधानिक संकट आ सकता है।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (NCTE) के मापदंडों के अनुसार, किसी भी शासकीय शाला में अध्यापन कार्य के लिए टीईटी एक अनिवार्य न्यूनतम योग्यता है। यही वजह है कि तय तारीख तक परीक्षा पास न करने की स्थिति में शिक्षकों की सेवा निरंतरता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने सभी प्रभावित शिक्षकों को आगामी परीक्षाओं में सम्मिलित होने के निर्देश दिए हैं।

50 पार की उम्र में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से बढ़ी शिक्षकों की चिंताएं

व्यावहारिक कठिनाइयां और चुनौतियां: इस नियम के दायरे में आने वाले छत्तीसगढ़ के अधिकांश शिक्षकों की आयु इस समय 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है, जबकि कई वरिष्ठ शिक्षक 54 से 55 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। अपने जीवन के दो से तीन दशक शिक्षण कार्य में बिताने के बाद, उम्र के इस पड़ाव पर आकर पुनः एक छात्र की भांति प्रतियोगी परीक्षा में बैठना इन अनुभवी शिक्षकों के लिए एक कठिन मानसिक और व्यावहारिक चुनौती बना हुआ है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे अंतराल के बाद बाल विकास, भाषा, गणित और पर्यावरण जैसे विषयों के सैद्धांतिक पाठ्यक्रम की तैयारी करना वरिष्ठ शिक्षकों के लिए काफी जटिल साबित हो रहा है। इसके साथ ही, स्कूल के दैनिक शैक्षणिक कार्यों और प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन के साथ-साथ पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय निकालना भी एक बड़ी समस्या है।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में प्रभावित शिक्षकों की सांख्यिकीय स्थिति

जिलावार आंकड़ों का विश्लेषण: स्कूल शिक्षा विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस नियम के तहत पूरे छत्तीसगढ़ में कुल 80,491 शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों में इन शिक्षकों की संख्या में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। इस क्रम में सर्वाधिक प्रभावित जिला बस्तर संभाग का कोंडागांव है, जहां कुल 5,334 शिक्षकों को यह परीक्षा पास करनी होगी।

इसके विपरीत, सबसे कम प्रभावित जिलों में मुंगेली शामिल है, जहां केवल 245 शिक्षकों पर ही यह नियम लागू हो रहा है। अन्य प्रमुख जिलों की बात करें तो बलौदाबाजार-भाटापारा में 4,535, महासमुंद में 4,486, सरगुजा में 4,328, रायगढ़ में 4,207 और सूरजपुर में 4,151 शिक्षक इस दायरे में शामिल हैं। वहीं प्रांतीय राजधानी रायपुर में यह संख्या काफी कम यानी केवल 378 है।

शिक्षक संगठनों की मांग: इन-सर्विस शिक्षकों के लिए आयोजित हो सीमित विभागीय परीक्षा

पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग: वर्तमान टीईटी परीक्षा के कठिन स्तर को देखते हुए शिक्षक प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने वर्तमान व्यवस्था में कुछ व्यावहारिक बदलाव करने की मांग उठाई है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि सामान्य अभ्यर्थियों और वर्षों का अनुभव रखने वाले इन-सर्विस शिक्षकों के लिए एक ही जैसी परीक्षा प्रणाली रखना न्यायसंगत नहीं है।

संगठनों ने सुझाव दिया है कि स्कूल शिक्षा विभाग को इन शिक्षकों की वरिष्ठता और कार्य अनुभव का सम्मान करते हुए उनके लिए एक पृथक, सीमित विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करना चाहिए। इस विशेष परीक्षा का पाठ्यक्रम उनके दैनिक कक्षा-शिक्षण पर आधारित होना चाहिए, ताकि शिक्षक हतोत्साहित हुए बिना अपनी योग्यता सिद्ध कर सकें और उनकी नौकरी पर मंडरा रहा खतरा हमेशा के लिए समाप्त हो सके।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button