राहुकाल 23 जून 2026: आज का अशुभ समय, शुभ मुहूर्त और पंचांग का विस्तृत विवरण
आज मंगलवार को राहुकाल दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:38 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत वर्जित है। वहीं अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त आज विशेष रूप से लाभकारी हैं। महेश नवमी का धार्मिक महत्व भी आज के दिन को विशेष बना रहा है।

राहुकाल क्या है और क्यों अशुभ माना जाता है
रायपुर, 23 जून 2026: राहुकाल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का समय होता है जिसे राहु ग्रह नियंत्रित करता है। यह काल अशुभ माना जाता है क्योंकि राहु भ्रम, बाधा और विलंब का कारक है। इस समय में नए कार्य, निवेश, यात्रा या धार्मिक अनुष्ठान शुरू करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि राहुकाल में किए गए शुभ कार्य अपेक्षित सफलता नहीं देते और बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
- राहुकाल: 3:53 PM – 5:38 PM
- यमगण्ड: 8:54 AM – 10:39 AM
- गुलिक काल: 12:23 PM – 2:08 PM
- दुर्मुहूर्त: 8:12 AM – 9:08 AM, 11:23 PM – 12:03 AM
- वर्ज्य: 8:35 PM – 10:20 PM
राहुकाल में क्या न करें:
- नए व्यापार या निवेश की शुरुआत
- विवाह, गृह प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान
- यात्रा या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर
राहुकाल में क्या कर सकते हैं:
- नियमित कार्य, अध्ययन, ध्यान
- पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखना
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 4:04 AM – 4:44 AM
- प्रातः संध्या: 4:24 AM – 5:24 AM
- अमृत काल: 5:31 AM – 7:13 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 11:55 AM – 12:51 PM
- विजय मुहूर्त: 2:43 PM – 3:39 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 7:21 PM – 7:41 PM
- सायाह्न संध्या: 7:22 PM – 8:23 PM
- निशिता मुहूर्त: 12:03 AM – 12:44 AM (24 जून)
विशेष स्थिति: यदि राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ पड़ जाएं तो परंपरागत मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त की शक्ति राहुकाल के दोष को कम कर देती है। ऐसे में शुभ कार्य अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं।
आज का पंचांग
- तिथि: शुक्ल पक्ष नवमी (शाम 4:39 बजे तक), इसके बाद दशमी
- नक्षत्र: हस्त (11:54 AM तक), फिर चित्रा
- योग: वरीयान (10:13 AM तक), फिर परिघ
- करण: कौलव (4:39 PM तक), फिर तैतिल
- वार: मंगलवार
- सूर्योदय: 5:24 AM
- सूर्यास्त: 7:22 PM
- चंद्रमा: कन्या राशि में, रात 12:52 AM के बाद तुला राशि में प्रवेश
आज का धार्मिक महत्व
आज महेश नवमी है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। महेश्वरी समाज की उत्पत्ति इसी दिन से जुड़ी है। भक्त शिव मंदिरों में जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं। “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप आज विशेष फलदायी माना गया है।
डिस्क्लेमर
यह जानकारी पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। समय और परंपराओं में क्षेत्रीय भिन्नता संभव है।



