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राठी निवास बना ‘अयोध्या’: ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा के साथ हुआ नन्हे ‘राम’ का अभिनंदन

बेटी गरिमा लक्ष्मी एवं नाती के रूप में पधारे नारायण, कुबेर राठी ने दुल्हन की तरह सजाया घर





रायपुर । त्रेतायुग में जब प्रभु श्री राम का अयोध्या आगमन हुआ था, तब पूरी नगरी दीपों से जगमगा उठी थी। कुछ वैसा ही दृश्य और भक्तिमय उल्लास आज राजधानी रायपुर के समाजसेवी एवं ‘श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति’ के संस्थापक कुबेर राठी के निवास पर देखने को मिला। अवसर था उनके आंगन में नन्हे नाती के प्रथम आगमन का।

बीते 10 मई को कुबेर राठी की सुपुत्री गरिमा माहेश्वरी ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म देकर राठी और माहेश्वरी परिवार को धन्य किया। 12 मई को जब गरिमा अपने पति अंकित माहेश्वरी और नवजात शिशु के साथ पहली बार अपने पीहर (पिता के घर) पहुंचीं, तो वातावरण उत्सव में बदल गया।

एक पिता के लिए उसकी पुत्री लक्ष्मी का स्वरूप होती है और उस लक्ष्मी के बालक का आगमन किसी देव-आगमन से कम नहीं होता। कुबेर राठी ने इस अवसर को केवल एक पारिवारिक मिलन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव बना दिया। उन्होंने पूरे घर को किसी दुल्हन की भांति सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की सजावट ऐसी थी मानो अयोध्या में भगवान राम का स्वागत हो रहा हो।

जैसे ही बिटिया गरिमा और दामाद अंकित ने नन्हे बालक के साथ देहरी पर कदम रखा, आकाश आतिशबाजी से गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप और पुष्प वर्षा के बीच बालक का अभिनंदन किया गया। समाजसेवी कुबेर राठी ने अपनी धर्मपत्नी मंजू राठी के साथ मिलकर परंपरा अनुसार अपने नाती, पुत्री और दामाद की नजर उतारी और भावुक होकर उनका आत्मीय स्वागत किया।

इस भावुक क्षण पर समाजसेवी कुबेर राठी की आंखें खुशी से सजल थीं। उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरे जीवन का अत्यंत शुभ और पुण्यशाली अवसर है। जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आगमन पर अयोध्या प्रफुल्लित थी, आज मेरे घर की किलकारियां मुझे उसी आनंद की अनुभूति करा रही हैं। यह बालक हमारे परिवार के लिए सौभाग्य का प्रतीक है।

इस पावन अवसर पर नवजात के मामा अंकित राठी का उत्साह और आनंद देखते ही बनता था। जैसे ही उन्होंने अपने भांजे को गोद में लिया, उनकी खुशी का पारावार न रहा। मामा बनने के गौरवमयी क्षण पर अंकित राठी ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरे लिए अत्यंत हर्ष का दिन है, क्योंकि हमारे आंगन में खुशियों का नया सवेरा हुआ है। जिस प्रकार कृष्ण के आगमन पर गोकुल में आनंद छाया था, आज भांजे के रूप में साक्षात देव-स्वरूप ने हमारे घर में कदम रखा है। मामा के रूप में मेरी जिम्मेदारी और स्नेह अब इस नन्हे बालक के साथ सदैव बना रहेगा। यह हमारे पूरे परिवार के लिए ईश्वर का अनमोल आशीर्वाद है।

परिवार की खुशियों को दोगुना करते हुए नवजात शिशु की मासी भामिका तिवारी एवं मौसा अभय तिवारी ने गरिमा और अंकित को माता-पिता बनने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की । भावुक होते हुए भामिका ने कहा कि आज मेरा मातृत्व भाव और भी प्रगाढ़ हो गया है। मेरी बेटी प्रियांशी को न केवल एक भाई, बल्कि जीवनभर के लिए एक रक्षक और साथी मिल गया है। यह बालक कुल की कीर्ति और सौभाग्य को बढ़ाने वाला सिद्ध होगा।

 

इस मंगलकारी अवसर पर केवल राठी निवास ही नहीं, बल्कि गरिमा का ननिहाल पक्ष , गरिमा के मामा विजय माहेश्वरी,मामी सोनल माहेश्वरी और पूरा माहेश्वरी परिवार भी आनंद के सागर में सराबोर नजर आया। उपस्थित सभी परिजनों और शुभचिंतकों ने नवजात को अपना शुभाशीष प्रदान करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सभी ने एक स्वर में कहा कि नन्हे ‘राम’ के कदम इस आंगन में सुख, शांति और समृद्धि का नया अध्याय लिखेंगे।

आज राठी निवास पर केवल उत्सव नहीं था, बल्कि एक नाना का अपनी पुत्री और नाती के प्रति अगाध प्रेम और श्रद्धा का प्रदर्शन था। पूरा क्षेत्र इस भव्य स्वागत और खुशियों का साक्षी बना।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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