छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली का कहर, दो साल में 434 मौतें; सरकार ने 17.28 करोड़ रुपये दिए

छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, मृतकों के परिवारों को 17.28 करोड़ रुपये की राहत राशि दी गई।





रायपुर, 11 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं लगातार गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। राज्य विधानसभा में मंगलवार को सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में आकाशीय बिजली गिरने से प्रदेश में 434 लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को राज्य सरकार द्वारा 17 करोड़ 28 लाख रुपये की राहत राशि प्रदान की गई है।

यह जानकारी राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधानसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। भारतीय जनता पार्टी के विधायक आशाराम नेताम ने वर्ष 2024–25 और 2025–26 के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से हुई मौतों और मृतकों के परिजनों को दी गई राहत राशि के संबंध में जानकारी मांगी थी।

कई जिलों में हुई बड़ी संख्या में मौतें

राजस्व मंत्री द्वारा सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। इनमें सबसे अधिक 51 मौतें बलरामपुर जिले में दर्ज की गईं। इसके अलावा सरगुजा में 37, जशपुर, कोरबा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 26-26, कोरिया में 22, बलौदाबाजार में 18, कबीरधाम में 17 तथा सूरजपुर में 16 लोगों की मौत हुई है।

इसी अवधि में बिलासपुर, रायगढ़ और बस्तर जिलों में 13-13 मौतें दर्ज की गईं, जबकि रायपुर जिले में 9 और नारायणपुर में एक व्यक्ति की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हुई।

प्राकृतिक आपदाओं में सबसे बड़ा खतरा आकाशीय बिजली

विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली प्राकृतिक आपदाओं में सबसे घातक साबित हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में प्राकृतिक कारणों से होने वाली मौतों में बिजली गिरने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा है। वर्ष 2023 में ही प्रदेश में 180 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई थी, जो प्राकृतिक आपदाओं से हुई कुल मौतों का लगभग 78 प्रतिशत था।

विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रदेश के बस्तर पठार और उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान तेज आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं। खेतों और जंगलों में काम करने वाले ग्रामीण तथा आदिवासी समुदाय के लोग अक्सर खुले स्थानों में होने के कारण इन घटनाओं की चपेट में आ जाते हैं।

बिजली से बचाव के लिए सुरक्षा परियोजना

सरकार ने विधानसभा में यह भी जानकारी दी कि आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर कुछ जिलों में विशेष सुरक्षा परियोजना लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके तहत जांजगीर-चांपा, जशपुर, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर जिलों में बिजली गिरने से बचाव के लिए तकनीकी उपाय और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही चुनौती

प्रदेश में हर साल मानसून और प्री-मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई मामलों में किसान खेतों में काम करते समय या ग्रामीण लोग खुले मैदान में होने के कारण इसकी चपेट में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते मौसम चेतावनी, सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की जानकारी और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राहत व्यवस्था के साथ-साथ सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को भी मजबूत किया जा रहा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button