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महासमुंद जनदर्शन में फूटा ‘रिकवरी’ का बम: पूर्व सरपंच का दावा 11 लाख दबाकर हुलसी चंद्राकर ने लड़ा चुनाव

पंचायत सचिव से सांठगांठ कर 'अदेय प्रमाण पत्र' लेने का आरोप, कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज।







महासमुंद । जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। हाल ही में उनके द्वारा किए गए एक तथाकथित ‘राजनीतिक स्टंट’ का अब विपरीत असर (दुष्प्रभाव) दिखना शुरू हो गया है। ग्राम पंचायत बेलसोंडा की पूर्व सरपंच भामिनी पोखन चंद्राकर ने ग्रामीण महिलाओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर मोर्चा खोल दिया है। जनदर्शन के माध्यम से उन्होंने जनपद उपाध्यक्ष के खिलाफ फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के सहारे चुनाव आयोग को गुमराह करने और धोखाधड़ी (420) करने के गंभीर आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

क्या है 11 लाख की वसूली का पूरा मामला?

​पूर्व सरपंच भामिनी चंद्राकर ने जनपद पंचायत महासमुंद की जांच रिपोर्ट और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM महासमुंद के आधिकारिक पत्रों का हवाला देते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है। शिकायत के मुताबिक, SDM के आदेशानुसार जनपद उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर पर पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40 (ख)(ग)(1) के प्रावधानों के उल्लंघन का मामला सिद्ध हुआ था।

​इसके तहत धारा 92 के अंतर्गत उनसे 10,81,518 (लगभग 11 लाख रुपये) की सरकारी राशि की वसूली की जानी तय थी। आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि को सरकारी खजाने में जमा किए बिना ही, हुलसी चंद्राकर ने तत्कालीन पंचायत सचिव नेहा उपाध्याय के साथ कथित रूप से सांठगांठ की और एक फर्जी ‘अदेय प्रमाण पत्र’ (No Dues Certificate) हासिल कर लिया। इसी फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर उन्होंने चुनाव आयोग को अंधेरे में रखकर जनपद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

​मीडिया और जनदर्शन में अपनी बात रखते हुए पूर्व सरपंच भामिनी चंद्राकर ने कहा कि लगभग आठ महीने पहले जनपद उपाध्यक्ष के साथ हुई एक दुखद घटना के कारण हम सभी ने मानवीय आधार पर सहानुभूति दिखाई थी और उनके पुराने कारनामों को तूल नहीं दिया। लेकिन हाल ही में उनके द्वारा ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास दिलाने का झूठा झांसा देकर कलेक्टरेट लाया गया। यह केवल एक राजनीतिक स्टंट और प्रपंच था।

​भामिनी चंद्राकर ने आगे कहा कि ऐसे स्वार्थी जनप्रतिनिधि को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना अब जरूरी हो गया है। उनके इसी ‘राजनीतिक स्टंट’ को अब ‘राजनीतिक संकट’ में बदलने और उनके षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए ही 11 लाख की वसूली का यह जिन्न बोतल से बाहर निकाला गया है।

​जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीणों और पूर्व सरपंच ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर से तत्काल 11 लाख की शासकीय राशि वसूल की जाए। साथ ही, चुनाव आयोग को गुमराह करने और धोखाधड़ी के मामले में उन्हें जनपद उपाध्यक्ष के पद से तुरंत बर्खास्त कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी (एफाआईआर) कार्रवाई की जाए।

​इस शिकायत के बाद अब महासमुंद की स्थानीय राजनीति में भूचाल आना तय माना जा रहा है। देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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