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आज है हरितालिका तीज:आज होगी शिव-पार्वती की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

रायपुर सहित देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा तीज का त्योहार, शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक है यह पर्व







रायपुर । देशभर में हरितालिका तीज का पावन पर्व कल श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखा जाता है, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की स्मृति का प्रतीक है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और विधान

तीज के दिन व्रतधारी महिलाएं अलग-अलग शुभ मुहूर्तों में पूजा-अर्चना करेंगी।
  • प्रातःकालीन पूजा: सुबह 05:40 बजे से 08:31 बजे तक।
  • प्रदोष काल पूजा: शाम 06:49 बजे से 07:11 बजे तक।
  • रात्रिकालीन जागरण: रात 12:01 बजे से 12:45 बजे तक।
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व्रत के विधान

व्रत के विधान के अनुसार, महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर निर्जला व्रत का संकल्प लेंगी। इसके बाद, वे मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें लाल वस्त्र से सजी चौकी पर स्थापित करेंगी। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की जाएगी। इस दौरान हरितालिका तीज की पौराणिक कथा का पाठ भी किया जाएगा, और रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ जागरण होगा। अगले दिन व्रत का पारण ब्राह्मणों या सुहागिन स्त्रियों को भोजन और दान देकर किया जाएगा।

पूजन सामग्री और पौराणिक कथा का महत्व

पूजा में गीली मिट्टी, बेलपत्र, शमी, केले के पत्ते, धतूरा, आक, तुलसी, दूर्वा जैसी वनस्पतियों का उपयोग होगा। सोलह श्रृंगार की सामग्री, जिसमें मेहंदी, चूड़ी, बिंदी और सिंदूर प्रमुख हैं, माता को अर्पित की जाएगी। भोग में फल, मिठाई, भीगे चने और सत्तू चढ़ाए जाएँगे।

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हरितालिका व्रत क्यों मनाया जाता?

इस पर्व का नाम “हरितालिका” दो शब्दों से मिलकर बना है— हरित (हटा लेना) और आलिका (सखी)। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती के पिता हिमालय ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया था, जबकि पार्वती भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं। उनकी सखियों ने उन्हें विवाह से बचाने के लिए वन में ले जाकर छुपा दिया, जहाँ उन्होंने कठोर तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया। अंततः महादेव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी घटना की याद में यह व्रत मनाया जाता है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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