आज का पंचांग 29 सितंबर 2026: जानें रायपुर में राहुकाल का सही समय, शुभ मुहूर्त और दैनिक चौघड़िया की स्थिति
सनातन परंपरा में किसी भी मांगलिक या नए कार्य को आरंभ करने से पूर्व पंचांग शुद्धि और शुभ मुहूर्त का विचार अनिवार्य माना गया है। 29 सितंबर 2026 मंगलवार के दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, भरणी नक्षत्र और हर्षण योग का निर्माण हो रहा है। दिन के शुभ-अशुभ काल, विशेषकर राहुकाल की सटीक अवधि जानकर आप अपने दैनिक कार्यों को विघ्नमुक्त बना सकते हैं।

वैदिक वांग्मय में समय को काल स्वरूप माना गया है और शुभ मुहूर्त को सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार कहा गया है। जब मनुष्य प्रकृति और ग्रहों की गति के अनुकूल होकर अपने संकल्पों को क्रियान्वित करता है, तो उसे अभीष्ट सिद्धि प्राप्त होती है। इसके विपरीत अशुभ कालखंड में प्रारंभ किए गए कार्य मानसिक तनाव, आर्थिक क्षति और अप्रत्याशित बाधाएं उत्पन्न करते हैं।
पंचांग के पांच मुख्य अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण होते हैं। इन पांचों तत्वों के सूक्ष्म तालमेल से ही दिन के शुभ और अशुभ कालखंडों का निर्धारण होता है। आज का दिन आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि से युक्त है, जिसे अंगारक चतुर्थी का विशेष संयोग भी प्राप्त हो रहा है क्योंकि यह तिथि मंगलवार को पड़ रही है।
राहुकाल क्या होता है और यह क्यों बनता है
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को दिन का सर्वाधिक अशुभ और त्याज्य समय माना गया है। खगोलीय दृष्टिकोण से राहु और केतु कोई भौतिक पिंड नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य और चंद्रमा के परिक्रमा पथ के कटान बिंदु यानी छाया ग्रह हैं। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर आता है, तो दिन के आठवें भाग पर राहु का आधिपत्य स्थापित होता है।
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत वितरित करना प्रारंभ किया, तब स्वरभानु नामक दैत्य छल से देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। सूर्य और चंद्रमा ने इस कपट को पहचानकर भगवान विष्णु को सचेत कर दिया। भगवान विष्णु ने तुरंत अपने सुदर्शन चक्र से उस दैत्य का सिर धड़ से अलग कर दिया।
अमृत की कुछ बूंदें गले से नीचे उतर जाने के कारण वह दैत्य अमर हो चुका था। सिर वाला भाग राहु कहलाया और धड़ वाला भाग केतु के नाम से विख्यात हुआ। स्वरभानु के इस कृत्य के कारण ही राहु का सूर्य और चंद्रमा के प्रति स्वाभाविक बैर भाव माना जाता है। इसी कारण राहु के स्वामित्व वाले कालखंड में सूर्य की सात्विक ऊर्जा मंद पड़ जाती है और तामसिक ऊर्जा प्रभावी हो जाती है।
राहुकाल प्रत्येक दिन सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को आठ बराबर भागों में विभाजित करके निकाला जाता है। सप्ताह के प्रत्येक वार में राहुकाल का समय अलग-अलग पहर में आता है। मंगलवार के दिन राहुकाल सामान्यतः दिन के छठे भाग यानी दोपहर के समय पड़ता है। इस अवधि में किसी भी नए और शुभ कार्य का आरंभ वर्जित माना जाता है क्योंकि राहु का प्रभाव बुद्धि को भ्रमित करता है।
29 सितंबर 2026 रायपुर में राहुकाल का समय
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अक्षांश और देशांतर के आधार पर आज सूर्योदय और सूर्यास्त के समय की गणना के अनुसार राहुकाल दोपहर के समय प्रभावी रहेगा। नीचे रायपुर नगर के लिए आज के राहुकाल की विस्तृत समय सारणी दी गई है:
| विवरण | समय (रायपुर स्थानीय समय) |
|---|---|
| वार | मंगलवार |
| सूर्योदय | प्रातः 05:48 |
| सूर्यास्त | सायं 17:51 |
| राहुकाल प्रारंभ | दोपहर 14:50 |
| राहुकाल समाप्ति | सायं 16:20 |
| कुल अवधि | 01 घंटा 30 मिनट |
रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले सभी नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते समय इस समय सारणी का विशेष ध्यान रखें। इस 90 मिनट की अवधि में कोई भी नया उपक्रम शुरू न करें।
राहुकाल में क्या-क्या कार्य भूलकर भी न करें
शास्त्रों में राहुकाल के दौरान कुछ विशिष्ट कार्यों को करने की सख्त मनाही की गई है। इस समय किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अत्यंत क्षीण हो जाती है और परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं:
- किसी भी नए व्यापार, दुकान, कार्यालय या फर्म का उद्घाटन राहुकाल में कदापि न करें।
- भूमि, भवन, भूखंड, फ्लैट या वाहन का क्रय-विक्रय अथवा अग्रिम राशि का भुगतान इस समय टाल देना चाहिए।
- गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नींव पूजन अथवा किसी भी नए निर्माण कार्य की शुरुआत इस समय वर्जित है।
- विवाह, सगाई, नामकरण, मुंडन, कर्णवेध और जनेऊ जैसे वैदिक संस्कारों का आयोजन राहुकाल में नहीं करना चाहिए।
- शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी बड़ी वित्तीय योजना में धन का निवेश इस अवधि में नहीं करना चाहिए।
- किसी महत्वपूर्ण नौकरी के साक्षात्कार, परीक्षा या व्यावसायिक वार्ता के लिए इस समय घर से प्रस्थान न करें।
- महत्वपूर्ण सरकारी या गैर-सरकारी अनुबंधों और अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर करने से बचें।
- लंबी दूरी की यात्रा, विशेषकर दक्षिण या पश्चिम दिशा की यात्रा की शुरुआत इस कालखंड में न करें।
राहुकाल में क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं
यद्यपि राहुकाल शुभ और नवीन कार्यों के लिए निषिद्ध है, परंतु कुछ ऐसे कार्य भी हैं जिन्हें इस कालखंड में करना न केवल मान्य है बल्कि विशेष रूप से फलदायी भी माना गया है:
- जो कार्य पहले से नियमित रूप से चल रहे हैं, उन्हें सामान्य गति से जारी रखा जा सकता है, उन्हें रोकने की आवश्यकता नहीं है।
- राहु दोष की शांति के लिए वैदिक मंत्रों का जप, राहु स्तोत्र का पाठ और दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है।
- भगवान भैरव, मां दुर्गा और भगवान शिव की आराधना राहुकाल में करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
- तामसिक प्रवृत्तियों और मानसिक भ्रम को दूर करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जप किया जा सकता है।
- जरूरतमंद, कुष्ठ रोगी अथवा दिव्यांग व्यक्तियों को काले तिल, कंबल, काले उड़द या भोजन का दान करना विशेष शुभ होता है।
- अध्ययन, शोध, लेखन, और पुराने अभिलेखों की जांच-पड़ताल जैसे नियमित बौद्धिक कार्य किए जा सकते हैं।
- घर की साफ-सफाई, कबाड़ हटाने और नकारात्मक वस्तुओं के निस्तारण के लिए यह समय उपयुक्त माना गया है।
क्या राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ पड़ सकते हैं?
यह ज्योतिष शास्त्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सूक्ष्म सैद्धांतिक प्रश्न है। अभिजीत मुहूर्त दिन का आठवां मुहूर्त होता है, जो दोपहर में सूर्य के मध्याह्न स्थिति पर आने से लगभग 24 मिनट पूर्व और 24 मिनट बाद तक, कुल 48 मिनट की अवधि का होता है। भगवान विष्णु का यह प्रिय मुहूर्त समस्त दोषों का हरण करने में समर्थ माना गया है।
सप्ताह के अधिकांश दिनों में राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त के समय में पर्याप्त अंतर होता है। परंतु बुधवार के दिन राहुकाल सामान्यतः दोपहर 12 बजे से 01:30 बजे के मध्य पड़ता है, जो प्रायः अभिजीत मुहूर्त के समय के साथ टकरा जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य वारों में स्थानीय सूर्योदय के अंतर के कारण आंशिक ओवरलैप की संभावना बन सकती है।
यदि कभी किसी स्थान पर राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय एक साथ आ जाए, तो स्मृतियों और मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार राहुकाल के दोष का प्रभाव अधिक प्रबल माना जाता है। ऐसी स्थिति में अभिजीत मुहूर्त भी दूषित हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत को टालना ही श्रेयस्कर होता है।
ऐसी परिस्थिति में यदि कोई कार्य अत्यंत अनिवार्य हो और उसे टाला न जा सकता हो, तो व्यक्ति को अमृत चौघड़िया, शुभ चौघड़िया या विजय मुहूर्त का चयन करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान गणेश के 108 नामों का जप करके और भगवान शिव का स्मरण करके ही किसी आपातकालीन कार्य को हाथ में लेना चाहिए।
29 सितंबर 2026 का विस्तृत पंचांग विवरण
आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। नीचे 29 सितंबर 2026 के लिए विस्तृत खगोलीय और पंचांगीय विवरण प्रस्तुत किया गया है:
| पंचांग अंग | विवरण |
|---|---|
| वार | मंगलवार |
| तिथि | चतुर्थी (सायं 18:22 तक, तदुपरांत पंचमी) |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| संवत | विक्रम संवत 2083 (कालयुक्त), शक संवत 1948 |
| मास | आश्विन (पूर्णिमांत एवं अमांत) |
| नक्षत्र | भरणी (दोपहर 13:45 तक, तदुपरांत कृतिका) |
| योग | हर्षण (प्रातः 10:15 तक, तदुपरांत वज्र) |
| करण | बव (प्रातः 07:10 तक), बालव (सायं 18:22 तक), कौलव |
| सूर्य राशि | कन्या |
| चंद्र राशि | मेष (सायं 19:30 तक), तदुपरांत वृषभ |
| ऋतु | शरद |
| अयन | दक्षिणायन |
| सूर्योदय काल | प्रातः 05:48:12 |
| सूर्यास्त काल | सायं 17:51:40 |
| चंद्रोदय काल | रात्रि 20:15 |
| चंद्रास्त काल | प्रातः 08:35 (30 सितंबर) |
29 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
शुभ कार्यों के संपादन के लिए दिन के विभिन्न कालखंडों में शुभ मुहूर्त उपस्थित होते हैं। इन मुहूर्तों में किए गए कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न होते हैं:
| शुभ मुहूर्त | प्रारंभ समय | समाप्ति समय |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | प्रातः 04:18 | प्रातः 05:03 |
| प्रातः संध्या | प्रातः 04:40 | प्रातः 05:48 |
| अभिजित मुहूर्त | पूर्वाह्न 11:26 | दोपहर 12:14 |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 13:50 | दोपहर 14:38 |
| गोधूलि मुहूर्त | सायं 17:51 | सायं 18:15 |
| सायं संध्या | सायं 17:51 | सायं 19:03 |
| अमृत काल | प्रातः 08:40 | प्रातः 10:12 |
| निशिता मुहूर्त | रात्रि 23:25 | रात्रि 00:15 (30 सितंबर) |
| शुभ चौघड़िया (प्रातः) | प्रातः 09:19 | प्रातः 10:49 |
| चर चौघड़िया (दोपहर) | दोपहर 12:20 | दोपहर 13:50 |
| लाभ चौघड़िया (सायं) | सायं 19:22 | रात्रि 20:51 |
29 सितंबर 2026 के अशुभ मुहूर्त
अशुभ मुहूर्तों में किसी भी मांगलिक संस्कार, गृह निर्माण, यात्रा और नवीन व्यापारिक सौदों से पूर्णतः बचना चाहिए:
| अशुभ मुहूर्त | प्रारंभ समय | समाप्ति समय |
|---|---|---|
| राहुकाल (रायपुर) | दोपहर 14:50 | सायं 16:20 |
| यमघण्ट | प्रातः 09:19 | प्रातः 10:49 |
| गुलिक काल | दोपहर 12:20 | दोपहर 13:50 |
| दुर्मुहूर्त | प्रातः 08:12 | प्रातः 09:01 |
| दूसरा दुर्मुहूर्त | रात्रि 22:36 | रात्रि 23:25 |
| वर्ज्य काल | सायं 18:10 | सायं 19:42 |
| भद्रा | इस दिन भद्रा का वास नहीं है (सर्वथा मुक्त) | – |
आज का धार्मिक और पौराणिक महत्व
29 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन और फलदायी है। मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि का पड़ना अंगारक चतुर्थी का महायोग बनाता है। अंगारक चतुर्थी को भगवान श्री गणेश और मंगल देव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में मांगलिक दोष या कर्ज की समस्या है, उनके लिए आज का दिन अत्यंत चमत्कारी प्रभाव दिखा सकता है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है और चतुर्थी तिथि उनकी प्रिय तिथि है। आज के दिन विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने और शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने से समस्त विघ्न दूर होते हैं। इसके साथ ही आज भरणी नक्षत्र का प्रभाव है, जिसके स्वामी यमराज और नक्षत्र अधिपति शुक्र देव हैं। भरणी नक्षत्र में सत्य, संयम और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
आज के दिन लाल वस्त्र धारण करके हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान गणेश को 21 दूर्वा दल और मोदक का भोग लगाने से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। यदि आप पर ऋण का बोझ है, तो आज के दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का तीन बार पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
Disclaimer: यह समाचार पंचांगीय गणनाओं, पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और खगोलीय समय सारणी पर आधारित है। www.the4thpillar.live किसी भी दावे या इसके शत-प्रतिशत सटीक होने की पूर्ण पुष्टि नहीं करता है। किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, शुभ कार्य या मुहूर्त चयन के लिए अपनी कुंडली और स्थानीय परंपराओं के अनुसार योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।



