रायपुर तक बनेगी 2500 करोड़ की 6 लेन सड़क, केंद्र सरकार ने दी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को मंजूरी
केंद्र सरकार ने जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और रायपुर तक 6 लेन मार्ग को मंजूरी दी, छत्तीसगढ़ हिस्से पर खर्च होंगे 2500 करोड़ रुपये।

13 अगस्त 2026 | रायपुर: छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच सफर अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाला है। केंद्र सरकार ने जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तथा जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा-कवर्धा-सिमगा-रायपुर 6 लेन मार्ग परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस बड़े फैसले के बाद राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर उनका आभार जताया। सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस परियोजना के लिए धन्यवाद दिया।
सांसद संतोष पांडेय के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पूरी परियोजना के लिए करीब 15 हजार करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। यह रकम पूरे कॉरिडोर के निर्माण पर खर्च होगी, जो मध्य प्रदेश के भोपाल से शुरू होकर छत्तीसगढ़ के रायपुर तक जाएगा। इसमें से करीब 2500 करोड़ रुपये सिर्फ छत्तीसगढ़ हिस्से के डेवलपमेंट पर खर्च किए जाने की बात कही गई है, जिससे साफ है कि केंद्र सरकार का फोकस इस बार छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी सुधारने पर खासतौर से रहा है।
लंबे समय से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क कनेक्टिविटी को लेकर मांग उठती रही है। भोपाल और रायपुर जैसे दो बड़े शहरों के बीच व्यापार, नौकरी और पर्यटन के लिहाज से आवागमन तो लगातार बढ़ा है, लेकिन सड़क ढांचे में उस रफ्तार से सुधार नहीं हो पाया था। मौजूदा मार्गों पर सफर में लगने वाला ज्यादा समय व्यापारियों और आम यात्रियों दोनों के लिए परेशानी की वजह बना रहा है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और 6 लेन मार्ग की योजना तैयार की गई है।
परियोजना के तहत प्रस्तावित कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भोपाल से निकलकर सागर, दमोह, जबलपुर और मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा तक पहुंचेगा। इसके बाद यह मार्ग चिल्फीघाटी, कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा से गुजरते हुए रायपुर तक पहुंचेगा। सांसद संतोष पांडेय ने बताया कि जबलपुर से छत्तीसगढ़ सीमा, चिल्फीघाटी, कवर्धा होते हुए रायपुर तक जाने वाला यह हिस्सा पूरी तरह 6 लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी सिर्फ चौड़ी सड़क ही नहीं बल्कि आधुनिक एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाएं भी इस रूट पर मिलेंगी।
इस मौके पर संतोष पांडेय ने कहा कि यह इंटर-स्टेट कॉरिडोर मध्य भारत की कनेक्टिविटी को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि इससे व्यापार, पर्यटन और आवागमन तीनों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटकों को भी काफी सुविधा होगी। सांसद ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में विकसित हो रहा मजबूत सड़क अधोसंरचना तंत्र विकसित भारत के संकल्प को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।
अब बात करें इस परियोजना से छत्तीसगढ़ को होने वाले सीधे फायदे की, तो यह सफर के समय में आने वाली भारी कमी सबसे बड़ा बदलाव साबित होगी। मौजूदा समय में भोपाल से रायपुर तक का सफर करीब 14 से 15 घंटे में पूरा होता है। एक्सप्रेसवे और 6 लेन मार्ग बनने के बाद यह समय घटकर सिर्फ 6 से 7 घंटे रह जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी तरह जबलपुर से रायपुर के बीच अभी 7 से 8 घंटे का सफर तय करना पड़ता है, जो नई सड़क बनने के बाद घटकर करीब साढ़े तीन से चार घंटे में सिमट सकता है।
इस बदलाव का सीधा असर कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा जैसे इलाकों पर भी पड़ेगा, क्योंकि यह पूरा रूट इन्हीं शहरों से होकर गुजरेगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का मतलब है कि यहां व्यापार और उद्योग के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी, स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा और रोजगार के नए मौके भी बन सकते हैं। साथ ही रायपुर आने-जाने वाले पर्यटकों और कारोबारियों को भी अब लंबी दूरी तय करने में पहले जैसी थकान और समय की बर्बादी नहीं झेलनी पड़ेगी।
राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय की मुलाकात और उनके धन्यवाद ज्ञापन के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि परियोजना जमीन पर कब उतरती है। किसी भी बड़े हाईवे प्रोजेक्ट की तरह इसे भी डीपीआर तैयार होने, जमीन अधिग्रहण और टेंडर जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, जिसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। फिलहाल केंद्र सरकार की मंजूरी और बजट स्वीकृति को छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर उन इलाकों के लिए जो अब तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से वंचित रहे हैं।
कुल मिलाकर, जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और रायपुर तक प्रस्तावित 6 लेन मार्ग परियोजना छत्तीसगढ़ के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से एक बड़ा कदम है। 2500 करोड़ रुपये के इस निवेश से न सिर्फ सफर आसान होगा बल्कि राज्य के व्यापार और पर्यटन को भी नई ताकत मिलने की उम्मीद है।


