छत्तीसगढ़ में 31 दिसंबर तक हर घर पहुंचेगा नल का जल, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश, कोताही पर होगी सीधी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में 31 दिसंबर तक हर घर पहुंचेगा नल का पानी। मुख्य सचिव विकासशील ने कलेक्टरों को दिए सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई। जानिए योजना का पूरा अपडेट।

समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित राज्यभर के कलेक्टर और विभागीय अफसर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। मुख्य सचिव ने कहा कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अफसरों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि जो योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उनका 31 अगस्त तक शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन कर ठेकेदारों का लंबित भुगतान निपटाया जाए। वहीं अधूरी परियोजनाओं की राह में आ रही तमाम अड़चनों को दूर करते हुए साल के अंत तक काम हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
काम अटकाने वाले या गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों पर अब कड़ी गाज गिरनी तय मानी जा रही है। मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि घटिया काम करने वाली एजेंसियों और लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
निर्माणाधीन योजनाओं में पैसों की किल्लत की वजह से काम न ठप पड़े, इसके लिए स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), विधायक निधि, सांसद निधि और सीएसआर मद से आवश्यक बजट जुटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्रामीण इलाकों में पेयजल की यह व्यवस्था सिर्फ पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं रहेगी। जलस्रोतों को लंबे समय तक जीवित रखने के लिए वाटर रिचार्ज सिस्टम और नए वैकल्पिक जलस्रोतों की पहचान करने पर भी समान जोर दिया जा रहा है। जिन इलाकों में वर्तमान भू-जल स्रोत सूख रहे हैं या पानी की उपलब्धता कम है, वहां तुरंत नए सतही जल स्रोतों से जलापूर्ति की कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। इसके अलावा दूरदराज के गांवों में सोलर आधारित नल-जल योजनाओं की प्रगति का भी बिंदुवार ब्योरा लिया गया।
50 लाख परिवारों तक शुद्ध पानी पहुंचाने की जंग, अब मॉनिटरिंग होगी और सख्त
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत करीब 50 लाख ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल से जोड़ने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया था। अगस्त 2019 में जब केंद्रीय स्तर पर इस फ्लैगशिप योजना की शुरुआत हुई थी, तब राज्य के केवल 13-14 प्रतिशत ग्रामीण घरों में ही नल कनेक्शन उपलब्ध थे। बीते सात वर्षों में चुनौतियों और तकनीकी अड़चनों के बावजूद प्रदेश में लगभग 83 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल का पानी पहुंचाया जा चुका है, जो लगभग 41.7 लाख से ज्यादा घरों का आंकड़ा है।
अंतिम चरण का यह काम सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें पहाड़ी, नक्सल प्रभावित और दुर्गम वनांचल क्षेत्र शामिल हैं। मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अब हर महीने ‘जिला जल एवं स्वच्छता समिति’ की बैठक आयोजित करें और उसकी पूरी कार्यवाही को समय पर विभागीय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें।
ग्राम पंचायतों को इस पूरी कवायद की रीढ़ बनाया जा रहा है। पंचायत स्तर पर जल समितियों को सक्रिय कर पानी के वितरण और रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर सौंपने की तैयारी है।
साफ पानी की सीधी उपलब्धता से न केवल ग्रामीण महिलाओं को सिर पर मटका उठाकर दूर-दूर से पानी लाने के रोजमर्रा के संघर्ष से मुक्ति मिलेगी, बल्कि दूषित पानी से होने वाली जलजनित बीमारियों का प्रकोप भी काफी हद तक कम होगा। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था, नियमित भौतिक सत्यापन और सख्त निगरानी के दम पर इस तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।



