डिजिटल अरेस्ट का खौफ: कोरबा में क्राइम ब्रांच का फर्जी अफसर बनकर डॉक्टर को वीडियो कॉल पर धमकाया, साइबर सेल की मुस्तैदी से बची जीवनभर की गाढ़ी कमाई
कोरबा में क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर डॉक्टर को वीडियो कॉल पर धमकाने वाले साइबर ठगों की साजिश नाकाम। कोरबा पुलिस साइबर सेल की मुस्तैदी से बची डॉक्टर की जिंदगी भर की कमाई। जानें पूरा मामला।

शातिर अपराधियों ने डॉक्टर को पूरी तरह मनोवैज्ञानिक रूप से डराने के लिए एक हाईटेक वीडियो कॉल किया, जिसमें पृष्ठभूमि में बाकायदा पुलिस स्टेशन जैसा माहौल और वर्दीधारी लोग नजर आ रहे थे। इस डरावने माहौल को देखकर पीड़ित डॉक्टर बुरी तरह घबरा गए और अपनी जमापूंजी गंवाने ही वाले थे। लेकिन ऐन वक्त पर कोरबा जिला पुलिस की विशेष साइबर सेल टीम की त्वरित सक्रियता और तकनीकी हस्तक्षेप के कारण इस बड़ी ठगी को होने से रोक लिया गया।
फर्जी वीडियो कॉल से खड़ा किया ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल
मिली जानकारी के अनुसार, कोरबा के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में पदस्थ पीड़ित डॉक्टर के मोबाइल फोन पर अचानक एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने बेहद सख्त लहजे में बात करते हुए कहा कि उनके नाम से ताइवान या किसी अन्य विदेशी मूल से एक संदिग्ध पार्सल बुक हुआ है। उसने दावा किया कि सीमा शुल्क विभाग (Customs Department) और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस पार्सल को जब्त किया है, जिसमें प्रतिबंधित नशीले पदार्थ और कई फर्जी पासपोर्ट मिले हैं।
पीड़ित डॉक्टर ने जब इस बात से पूरी तरह इनकार किया, तो ठगों ने उन्हें कानूनी कार्रवाई और तुरंत गिरफ्तारी का डर दिखाना शुरू कर दिया। इसके बाद ठगों ने स्काइप (Skype) या व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल किया। इस वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और पीछे का हिस्सा बिल्कुल किसी असली पुलिस इन्वेस्टिगेशन रूम जैसा दिखाई दे रहा था। उन्होंने डॉक्टर को निर्देश दिया कि वे किसी से भी बात न करें और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वे अपने कैमरे के सामने ही बैठे रहें, जिसे साइबर अपराध की भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।
बैंक खातों की जानकारी मांगकर दबाव बनाने लगे ठग
मनोवैज्ञानिक रूप से पीड़ित को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने के बाद, ठगों ने असली खेल शुरू किया। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि इस पूरे मामले में उनके नाम का दुरुपयोग वित्तीय हेराफेरी (Money Laundering) के लिए किया गया है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई (RBI) के कथित आदेशानुसार उनके सभी बैंक खातों की जांच की जानी बेहद जरूरी है।
ठगों ने डॉक्टर को डराया कि यदि वे अपने खातों में जमा कुल राशि को पुलिस के बताए गए एक ‘सेफ और सरकारी’ खाते में तुरंत ट्रांसफर नहीं करेंगे, तो उनके सारे अकाउंट हमेशा के लिए सीज कर दिए जाएंगे और उन्हें कई सालों के लिए जेल भेज दिया जाएगा। घबराहट में आकर डॉक्टर अपने नेट बैंकिंग के जरिए बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो गए। वे अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई को अपराधियों के हवाले करने ही वाले थे कि तभी उनके परिवार के एक सदस्य को इस असामान्य व्यवहार पर गहरा शक हुआ।
साइबर सेल की एंट्री और चंद मिनटों में हुआ गेमओवर
डॉक्टर के परिजन ने बिना एक पल गंवाए तुरंत इसकी सूचना कोरबा पुलिस की साइबर सेल टीम को दी। साइबर सेल के नोडल अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञों ने मामले की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। पुलिस टीम ने तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया और उन्हें निर्देश दिया कि वे उस फर्जी वीडियो कॉल को तुरंत काट दें।
साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डॉक्टर के संबंधित बैंकों से संपर्क साधा और उनके खातों पर एक अस्थायी सुरक्षा कवच (Hold) लगवाया ताकि किसी भी प्रकार का ऑटो-डेबिट या अनधिकृत ट्रांजैक्शन न हो सके। पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टर को शांत कराया और समझाया कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है और न ही कोई भी असली जांच एजेंसी या पुलिस अधिकारी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को इस तरह बंधक बनाकर पैसों की मांग करता है। इस त्वरित कार्रवाई की वजह से डॉक्टर की लाखों-करोड़ों की जमापूंजी पूरी तरह सुरक्षित बच गई।
कोरबा पुलिस की आम जनता से अपील: डरें नहीं, तुरंत रिपोर्ट करें
इस बड़ी सफलता के बाद कोरबा पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों, विशेषकर डॉक्टरों, व्यापारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बेहद जरूरी एडवायजरी जारी की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में साइबर अपराधियों द्वारा समाज के पढ़े-लिखे और संभ्रांत वर्ग को निशाना बनाने के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के हथकंडे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन 3 बातों का हमेशा ध्यान रखें:
- कोई भी पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसी (जैसे CBI, ED, Crime Branch) कभी भी किसी को व्हाट्सएप या स्काइप वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती।
- यदि कोई व्यक्ति आपको फोन पर डराता है या आपके बैंक खातों को सीज करने की धमकी देता है, तो तुरंत फोन काटें और अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं।
- किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या तुरंत स्थानीय साइबर सेल को सूचित करें।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जागरूकता और सही समय पर लिया गया फैसला ही साइबर अपराधों से बचने का सबसे अचूक हथियार है। कोरबा साइबर सेल की इस सूझबूझ भरी कामयाबी की सराहना पूरे जिले में की जा रही है, जिसने एक सम्मानित चिकित्सक को आर्थिक रूप से तबाह होने से बचा लिया।



