छत्तीसगढ़ में जेल व्यवस्था का ऐतिहासिक बदलाव: बेमेतरा में देश की अत्याधुनिक ‘ओपन जेल’ तैयार, सरकार ने जारी किया आदेश, परिवार संग रहेंगे 200 कैदी
छत्तीसगढ़ की पहली खुली जेल (Open Jail) बेमेतरा के पथर्रा में बनकर तैयार। सरकार ने जारी किया आधिकारिक आदेश। 200 कैदी परिवार के साथ रहकर करेंगे खेती और व्यवसाय। जेलों में भीड़ कम करने और कैदियों को सुधारने की ऐतिहासिक पहल।

हाईकोर्ट की हालिया सख्ती और जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की दमघोटू भीड़ (Overcrowding) को कम करने के प्रयासों के बीच यह आदेश जारी हुआ है। अब तक छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों को सीमित दायरे में रहना पड़ता था, लेकिन बेमेतरा की इस नई व्यवस्था के बाद कैदियों की जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। यह न केवल जेलों का प्रशासनिक बोझ कम करेगी, बल्कि अपराधियों के भीतर मानवीय संवेदनाओं को जगाने का एक जीवंत माध्यम बनेगी।
चारदीवारी का खौफ खत्म: आलीशान ‘घर’ में परिवार के साथ रहेंगे कैदी
इस खुली जेल की सबसे बड़ी और मानवीय विशेषता यह है कि यहाँ कैदियों को किसी अंधेरी कोठरी या सलाखों के पीछे बंद नहीं रखा जाएगा। पथर्रा में निर्मित इस विशेष परिसर में कैदियों को अपने परिवार और बच्चों के साथ रहने की अनूठी आजादी मिलेगी। इसके पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि कैदी खुद को समाज से कटा हुआ महसूस न करें और उनके भीतर का अपराधी हमेशा के लिए खत्म हो सके।
हालांकि, इस आलीशान और खुली जेल में रहने की पात्रता हर किसी को नहीं मिलेगी। जेल प्रशासन के कड़े नियमों के मुताबिक, यह सुविधा केवल उन्हीं कैदियों को दी जाएगी जिन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली है, जिन्होंने अपनी आधी से ज्यादा सजा काट ली है और जेल के भीतर जिनका आचरण (बिहेवियर) बेहद अनुशासित और सराहनीय रहा है। गंभीर और आदतन अपराधियों को इस खुली जेल की परिधि से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
30 एकड़ में फैला परिसर, 22.17 करोड़ की लागत से हुआ कायाकल्प
बेमेतरा जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर पथर्रा और चोरभट्टी के बीच करीब 30 एकड़ की विशाल शासकीय भूमि पर इस ओपन जेल का निर्माण किया गया है। इस पूरे सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक परिसर को तैयार करने में राज्य सरकार ने लगभग 22 करोड़ 17 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की है। परिसर के भीतर कैदियों के परिवारों के रहने के लिए स्वतंत्र आवास, बच्चों के लिए खेलने की जगह और प्रशासनिक भवन तैयार किए गए हैं।
जेलों में सुधार को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच द्वारा लगातार की जा रही सुनवाई के बाद जेल प्रशासन ने इस कार्य में अत्यधिक तेजी दिखाई। डायरेक्टर जनरल (जेल) द्वारा कोर्ट में पेश किए गए शपथ पत्र के अनुसार, यह ओपन जेल ‘मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016’ के सभी कड़े अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिससे यह देश की सबसे बेहतरीन खुली जेलों में से एक बन गई है।
सिर्फ सजा काटना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़ेंगे बंदी
पथर्रा की इस खुली जेल का मुख्य दर्शन कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए जेल परिसर के भीतर ही बड़े-बड़े वर्कशॉप भवन, डेयरी शेड, पोल्ट्री फार्म (मुर्गी पालन), गौर शेड (पशुपालन) और बकरी पालन केंद्र स्थापित किए गए हैं। कैदियों को उनकी रुचि और कौशल के अनुसार कृषि, हॉर्टिकल्चर (बागवानी) और फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) से सीधे जोड़ा जाएगा।
इस पहल के जरिए कैदी जेल के भीतर रहकर ही सम्मानजनक तरीके से पैसे कमा सकेंगे, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। सरकार की योजना इन कैदियों को ‘जॉब ओरिएंटेड कोर्स’ कराने की भी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब ये कैदी अपनी पूरी सजा काटकर समाज के बीच वापस लौटेंगे, तो उनके हाथों में हुनर होगा और वे अपराध का रास्ता छोड़कर एक सम्मानित नागरिक की तरह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर सकेंगे।
छत्तीसगढ़ की अन्य जेलों का भी होगा पूरी तरह से कायाकल्प
बेमेतरा में प्रदेश की पहली ओपन जेल शुरू होने के साथ ही छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में भी जेलों की दमघोटू भीड़ को खत्म करने के लिए मेगा प्लान तैयार किया गया है। कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के बैमा नगोई में एक अत्याधुनिक मॉडल जेल का निर्माण कार्य अंतिम चरणों में है।
इसके साथ ही, राजधानी रायपुर के गोड़ी गांव में एक विशाल और सर्वसुविधायुक्त मेगा जेल बनाने का भी खाका तैयार कर लिया गया है। इस मेगा जेल की शुरुआती क्षमता 1000 कैदियों की होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 4000 कैदियों तक किया जा सकेगा। सरकार के इन चौतरफा प्रयासों से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ अब अपराधियों को केवल प्रताड़ित करने वाली पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़कर, उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने वाली ‘सुधारात्मक न्याय प्रणाली’ (Reformative Justice System) को अपना रहा है।



