AdministrationBig BreakingChhattisgarhCrimeFeaturedLawPoliceTechnology
Trending

साइबर ठगी पर पुलिस का बड़ा एक्शन: अब पीड़ितों को तेजी से लौटेगी रकम, साइबर अपराधियों की संपत्ति भी होगी कुर्क

बिलासपुर रेंज में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर ठगी के पीड़ितों को जल्द से जल्द उनकी राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। आई4सी के एनसीआरपी पोर्टल के मनी रेस्टोरेशन और ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पीड़ितों को उनकी ठगी गई रकम वापस दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। साथ ही साइबर अपराधियों की चल एवं अचल संपत्तियों का ब्यौरा न्यायालय में प्रस्तुत कर उन्हें कुर्क कराने की दिशा में भी कार्रवाई तेज की जाएगी।







रायपुर | 8 जुलाई 2026 : देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच अब पीड़ितों को राहत दिलाने की दिशा में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पहल शुरू की है। साइबर ठगी के मामलों में केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि ठगी गई रकम को जल्द से जल्द पीड़ितों के खाते में वापस पहुंचाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी के रूप में सामने आया है। इसी उद्देश्य से मंगलवार को बिलासपुर रेंज में साइबर थाना प्रभारियों और संबंधित अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत संचालित इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के विभिन्न मॉड्यूल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना था, ताकि साइबर ठगी के मामलों में धन की रिकवरी और निर्दोष खाताधारकों को राहत देने की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामकारी बन सके।

बिलासपुर रेंज में साइबर पुलिस को मिला विशेष प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग, बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह तथा मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी उपस्थित रहे।

अधिकारियों को एनसीआरपी पोर्टल के दो महत्वपूर्ण मॉड्यूल मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल तथा ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान साइबर ठगी के मामलों में बैंकिंग प्रक्रिया, कानूनी औपचारिकताओं और न्यायालयीन प्रक्रिया के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

पीड़ितों को पैसा लौटाना अब पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता

आईजी राम गोपाल गर्ग ने प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के मामलों में केवल बैंक खाताधारकों या निचले स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी को सफलता नहीं माना जा सकता। वास्तविक सफलता तब होगी जब पीड़ित व्यक्ति की ठगी गई राशि सुरक्षित रूप से उसके खाते में वापस पहुंच सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बैंक खातों को समय पर फ्रीज कराया जाए। यदि धनराशि खाते में सुरक्षित रहती है तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बैंक के सहयोग से उसे पीड़ित के खाते में वापस भेजा जा सकता है।

मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल से बढ़ेगी रिकवरी की रफ्तार

प्रशिक्षण में अधिकारियों को मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इस मॉड्यूल के माध्यम से जांच अधिकारी यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जिन खातों में साइबर ठगी की राशि पहुंची है और जिन्हें समय रहते फ्रीज कर दिया गया है, वहां से न्यायालय के आवश्यक आदेश प्राप्त कर धनराशि को पीड़ित के खाते में वापस स्थानांतरित कराया जा सके।

भारत सरकार द्वारा विकसित यह व्यवस्था साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय मामलों में धन की रिकवरी को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल से निर्दोष खाताधारकों को मिलेगी राहत

प्रशिक्षण में ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल की भी विस्तार से जानकारी दी गई।

कई मामलों में जांच के दौरान संदिग्ध लेनदेन के कारण ऐसे लोगों के बैंक खाते भी अस्थायी रूप से फ्रीज हो जाते हैं जिनका अपराध से कोई संबंध नहीं होता। इस मॉड्यूल के माध्यम से ऐसे मामलों की समीक्षा कर निर्दोष व्यक्तियों के बैंक खातों को शीघ्र डी-फ्रीज कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।

इससे आम लोगों को बैंक और पुलिस कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी तथा शिकायतों का समयबद्ध निराकरण संभव हो सकेगा।

बिलासपुर एसीसीयू टीम की उपलब्धि बनी मिसाल

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बिलासपुर की एसीसीयू टीम के कार्यों की विशेष सराहना की गई।

टीम ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अब तक साइबर ठगी के पीड़ितों को दो लाख 36 हजार रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। इसके अलावा लगभग 60 अन्य मामलों में धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर आईजी राम गोपाल गर्ग तथा एसएसपी रजनेश सिंह ने एसीसीयू प्रभारी गोपाल सतपति एवं उनकी टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की। अधिकारियों ने कहा कि यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।

मुंगेली का सफल केस स्टडी बना प्रशिक्षण का हिस्सा

मुंगेली के एसएसपी भोजराम पटेल ने अपने जिले में सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए मनी रेस्टोरेशन प्रकरण को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने विस्तार से बताया कि शिकायत दर्ज होने से लेकर बैंक समन्वय, न्यायालयीन प्रक्रिया और अंततः पीड़ित को धन वापस मिलने तक किन-किन चरणों का पालन किया गया।

इस प्रस्तुति से अन्य जिलों के अधिकारियों को भी व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हुआ और भविष्य में समान मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता मिलेगी।

बैंकिंग प्रक्रिया को लेकर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीआईसीआई बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने भी भाग लिया।

उन्होंने अधिकारियों को बताया कि बैंक किन परिस्थितियों में धनराशि वापस कर सकते हैं तथा इसके लिए किन कानूनी दस्तावेजों, जांच प्रतिवेदन और न्यायालय के आदेशों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय को साइबर ठगी के मामलों में धन की शीघ्र रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।

साइबर अपराधियों की संपत्ति भी होगी कुर्क

बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि अब साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी चल एवं अचल संपत्तियों का विस्तृत विवरण भी तैयार किया जाएगा।

इस जानकारी को केस डायरी के साथ न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा ताकि आरोपी मुकदमे के दौरान अपनी संपत्तियों का हस्तांतरण या विक्रय न कर सकें।

अधिकारियों का मानना है कि इससे भविष्य में पीड़ितों को आर्थिक क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी और अपराधियों पर कानूनी दबाव बढ़ेगा।

1930 हेल्पलाइन और एनसीआरपी पोर्टल का करें तुरंत उपयोग

पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि साइबर ठगी होने की स्थिति में समय बिल्कुल भी बर्बाद न करें।

जैसे ही किसी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय ठगी का पता चले, तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय रहते बैंक खाते को फ्रीज करा दिया जाए तो ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

आई4सी लगातार मजबूत कर रहा साइबर अपराध जांच व्यवस्था

भारत सरकार का इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर देशभर में साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच और पुलिस अधिकारियों की क्षमता वृद्धि के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इसी के तहत साइबर पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और प्रमाणन कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिससे डिजिटल वित्तीय अपराधों की जांच अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन सके।

साइबर अपराध के खिलाफ समन्वित अभियान की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध लगातार अधिक संगठित और तकनीकी रूप ले रहे हैं। ऐसे में केवल एफआईआर दर्ज करना या गिरफ्तारी करना पर्याप्त नहीं है। पीड़ितों की आर्थिक क्षति की भरपाई, बैंकिंग समन्वय, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और अपराधियों की संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई जैसे कदम भविष्य की साइबर जांच व्यवस्था को और मजबूत बनाएंगे।

बिलासपुर रेंज में आयोजित यह प्रशिक्षण इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे साइबर अपराध के मामलों में न केवल जांच की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि पीड़ितों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button