छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण क्षण: रायपुर की बेटी महिमा राजपूत का ‘शक्तिसैट’ वैश्विक अंतरिक्ष मिशन में चयन, अब दिल्ली में बनाएंगी चांद पर जाने वाला सैटेलाइट
सबटाइटल समरी: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की 14 वर्षीय होनहार छात्रा महिमा राजपूत ने वैश्विक स्पेस प्रोग्राम 'शक्तिसैट' (ShakthiSAT) में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। दुनिया भर के 108 देशों की 12,000 छात्राओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा को पार कर देश की इस बेटी का चयन चंद्र मिशन से जुड़ी राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए हुआ है, जहां वह दिल्ली में दो लाइव सैटेलाइट्स का निर्माण करेंगी और आगामी 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से इसकी ऐतिहासिक लॉन्चिंग का गवाह बनेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस असाधारण उपलब्धि पर महिमा को बधाई दी है।

इस गौरवशाली वैज्ञानिक अभियान के अंतर्गत महिमा राजपूत ने 365 जटिल ऑनलाइन लेसन, 21 विस्तृत शैक्षणिक मॉड्यूल और हर स्तर पर होने वाले कठिन टेस्ट व असाइनमेंट की अग्निपरीक्षा को सफलतापूर्वक पार किया है। इस कड़ी चयन प्रक्रिया को पार करने के बाद अब उन्होंने चंद्रमा मिशन से संबंधित आगामी राष्ट्रीय कार्यशाला और सैटेलाइट निर्माण दल में अपना स्थान पक्का कर लिया है, जो पूरे छत्तीसगढ़ राज्य और देश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
स्कूल से मिली पहली प्रेरणा और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ती जिज्ञासा
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के सफर के बारे में बात करते हुए दसवीं की छात्रा महिमा राजपूत बताती हैं कि इस विशेष स्पेस मिशन और कोर्स के बारे में उन्हें सबसे पहले जानकारी उनके स्कूल की प्रधानाचार्या (प्रिंसिपल) से प्राप्त हुई थी। इसके तुरंत बाद, स्कूल की विज्ञान शिक्षिका और महिमा की गाइड मेंटर योगेश्वरी लहरी ने उन्हें इस पूरे प्रोग्राम की महत्ता को विस्तार से समझाया और आवेदन करने के लिए लगातार प्रेरित किया।
शुरुआत में महिमा को यह केवल एक नया अवसर या सामान्य प्रतियोगिता जैसा लगा था, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने इसका ऑनलाइन पाठ्यक्रम पढ़ना शुरू किया, अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) और खगोल भौतिकी के प्रति उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा और रुचि गहरी होती चली गई। महिमा के अनुसार, कोर्स के दौरान सैटेलाइट बनाने के बुनियादी सिद्धांत, अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं और इंजीनियरिंग के नियमों को बहुत ही सरल व व्यावहारिक तरीके से समझाया गया था। उन्हें गणित और विज्ञान जैसे विषय पहले से ही बेहद पसंद थे, इसलिए हर नए अध्याय को पूरा करने के साथ उनका उत्साह दोगुना होता गया।
कठिन ऑनलाइन प्रशिक्षण और समय का कुशल प्रबंधन
शक्तिसैट का यह पूरा एडवांस साइंटिफिक प्रशिक्षण पूरी तरह से डिजिटल यानी ऑनलाइन माध्यम पर आधारित था। इस उच्च स्तरीय कोर्स में कुल 21 वैज्ञानिक मॉड्यूल और 365 दैनिक लेसन शामिल किए गए थे। इस कार्यक्रम की सबसे कठिन शर्त यह थी कि प्रत्येक लेसन को पूरा करने के तुरंत बाद छात्रों को एक अनिवार्य ऑनलाइन मूल्यांकन टेस्ट देना होता था, जिसमें बेहतर स्कोर करने पर ही अगला मॉड्यूल अनलॉक होता था।
स्कूल की नियमित पढ़ाई, बोर्ड परीक्षा की तैयारी और दैनिक गृहकार्य के साथ-साथ इस भारी-भरकम वैज्ञानिक पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। इसके लिए महिमा ने अपने दैनिक समय का बेहद कुशल प्रबंधन (Time Management) किया। उन्होंने हर दिन अपने खेल-कूद और मनोरंजन के समय में से कुछ घंटे बचाकर अंतरिक्ष विज्ञान के इस कोर्स को दिए। रोजाना गहन पढ़ाई, असाइनमेंट तैयार करने और टेस्ट देने के बीच एक बेहतरीन संतुलन बिठाते हुए उन्होंने सफलतापूर्वक सभी कड़े चरणों को रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया।
मिशन की एंबेसडर विंग कमांडर डॉ. जया तारे ने लिया फाइनल इंटरव्यू
सभी 21 डिजिटल मॉड्यूल और लिखित परीक्षाओं को उच्चतम अंकों के साथ उत्तीर्ण करने के बाद महिमा को अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव का सामना करना पड़ा। इस अंतिम चरण में इस वैश्विक मिशन की आधिकारिक एंबेसडर विंग कमांडर डॉ. जया तारे ने खुद महिमा राजपूत का आमने-सामने एक कड़ा तकनीकी और तार्किक साक्षात्कार (Interview) लिया।
इस साक्षात्कार के दौरान महिमा की वैज्ञानिक समझ, अंतरिक्ष के प्रति उनके दृष्टिकोण और संकट प्रबंधन की क्षमता को परखा गया। इस कठिन मौखिक परीक्षा में भी महिमा ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और हाजिरजवाबी से चयनकर्ताओं को बेहद प्रभावित किया। इस अंतिम साक्षात्कार को सफलतापूर्वक पास करते ही महिमा राजपूत का चयन ‘नेशनल फाइनलिस्ट’ और भारत के आधिकारिक प्रतिनिधि समूह के रूप में अगले स्तर के लिए सुरक्षित हो गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई, कहा- युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं महिमा
रायपुर की इस नन्हीं वैज्ञानिक की असाधारण सफलता की गूंज प्रशासनिक गलियारों तक भी पहुंची है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर महिमा राजपूत को इस बड़ी उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महज 14 वर्ष की अल्पायु में दुनिया के 108 देशों के हजारों मेधावी छात्रों के बीच खुद को साबित कर वैश्विक स्तर पर देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण है। यह महिमा की असाधारण प्रतिभा, अटूट लगन और कठिन मानसिक मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि महिमा की यह सफलता छत्तीसगढ़ की अन्य बेटियों और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के युवाओं के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक महान प्रेरणास्रोत का कार्य करेगी।
मेहनत, तार्किक क्षमता और प्रतिभा से हासिल किया यह मुकाम
महिमा की मार्गदर्शक और स्कूल की विज्ञान शिक्षिका योगेश्वरी लहरी ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि इस वैश्विक प्रतियोगिता में देश-विदेश से हजारों प्रतिभाशाली छात्राओं के आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी आवेदनों में से छात्रों की वैज्ञानिक सोच, शैक्षणिक रिकॉर्ड, तार्किक क्षमता (Logical Reasoning) और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी गहरी रुचि के आधार पर देश भर से बेहद चुनिंदा मेधावी छात्रों का चयन किया गया है।
शिक्षिका योगेश्वरी लहरी के अनुसार, महिमा शुरू से ही कक्षा में बेहद खोजी प्रवृत्ति की छात्रा रही हैं और उन्होंने अपनी इसी मेहनत व अनूठी प्रतिभा के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। इस मुख्य चयन प्रक्रिया के बाद महिमा ने एडवांस अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट इंजीनियरिंग (Satellite Engineering), मिशन संचालन की रणनीतियों और नैनो-सैटेलाइट तकनीक से जुड़े कई विशेष वर्चुअल सत्रों का एडवांस प्रशिक्षण भी बहुत ही कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। राजनांदगांव निवासी कीर्ति सिंह की पुत्री महिमा का स्वयं भी यही मानना है कि यदि देश के विद्यार्थियों को सही उम्र और सही समय पर सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं, तो वे दुनिया के किसी भी बड़े लक्ष्य को आसानी से भेद सकते हैं।
23 अगस्त को दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यशाला और 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग
अब महिमा राजपूत के इस सफर का सबसे रोमांचक और व्यावहारिक चरण शुरू होने जा रहा है। रायपुर के गुढ़ियारी स्थित आत्मानंद स्कूल की यह होनहार छात्रा आगामी 23 अगस्त 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाली एक विशेष उच्च-स्तरीय व्यावहारिक कार्यशाला (Hands-on Workshop) में हिस्सा लेने दिल्ली जाएंगी। इस कार्यशाला में भारत और दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों से चुनी गई अन्य शीर्ष छात्राएं भी शामिल होंगी।
नई दिल्ली की इस कार्यशाला में सभी चयनित छात्र मिलकर प्रत्यक्ष रूप से दो अत्याधुनिक नैनो-सैटेलाइट्स (Two Satellites) के निर्माण और असेंबलिंग की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि तैयार किए जा रहे इन दो उपग्रहों में से एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा (Lunar Orbit) में लगातार परिक्रमा करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जबकि दूसरा सैटेलाइट सीधे चंद्रमा की सतह (Lunar Surface) पर सॉफ्ट लैंडिंग करने और वहां के वातावरण का अध्ययन करने के लिए तैयार किया जाएगा। इन दोनों लाइव अंतरिक्ष मिशनों की पूरी निगरानी और ग्राउंड कंट्रोल संचालन भी स्वयं विद्यार्थियों की इस चुनिंदा टीम द्वारा किया जाएगा, जिससे इन्हें एक वास्तविक अंतरिक्ष वैज्ञानिक की तरह काम करने का लाइव अनुभव प्राप्त होगा। इन छात्र-निर्मित सैटेलाइट्स की अंतिम लॉन्चिंग आगामी 11 अक्टूबर 2026 को भारत के प्रसिद्ध अंतरिक्ष केंद्र ‘सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा’ से की जाएगी।
क्या है वैश्विक पहल ‘शक्तिसैट’ और इसके मुख्य उद्देश्य?
‘शक्तिसैट’ (Mission ShakthiSAT) भारतीय एयरोस्पेस अनुसंधान संगठन ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी, अभूतपूर्व और दुनिया की सबसे बड़ी ऑल-गर्ल्स ग्लोबल स्पेस पहल है, जिसका नेतृत्व मिशन डायरेक्टर डॉ. श्रीमथी केसन कर रही हैं। इस वैश्विक अभियान का प्राथमिक उद्देश्य दुनिया भर के 108 देशों की लगभग 12,000 मेधावी छात्राओं को सीधे तौर पर अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट इंजीनियरिंग और स्टेम (STEM – Science, Technology, Engineering, and Math) शिक्षा के व्यावहारिक ढांचे से जोड़ना है।
वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से काफी कम (लगभग 11 प्रतिशत) रही है। इसी लैंगिक अंतर (Gender Gap) को पाटने और पारंपरिक रूढ़ियों को तोड़कर महिला सशक्तिकरण को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने के लिए शक्तिसैट का आयोजन किया जा रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में 108 देशों की संख्या को चुने जाने के पीछे भी एक दिलचस्प वैज्ञानिक कारण है; खगोल विज्ञान में पृथ्वी से सूर्य और चंद्रमा की दूरी उनके संबंधित व्यासों की तुलना में लगभग 108 गुना है, जो इस ज्यामितीय ब्रह्मांडीय संतुलन को दर्शाती है। यह मिशन न केवल उन्नत चंद्र सतह मानचित्रण (Lunar Surface Mapping) और जल-बर्फ जैसे संभावित संसाधनों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, बल्कि दुनिया भर की किशोरियों को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनने के लिए एक सशक्त मंच भी प्रदान करेगा। रायपुर की महिमा अब इसी वैश्विक बदलाव और भारत की वैज्ञानिक प्रगति का एक चमकता हुआ चेहरा बन चुकी हैं।



