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छत्तीसगढ़ में 5 जुलाई से राशन दुकानों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, पीडीएस संचालक संघ ने दी चेतावनी

​20 साल से नहीं बढ़ा मार्जिन मनी; पॉस मशीन की खराबी और अधिकारियों के दबाव से त्रस्त संघ ने मुख्यमंत्री व मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन।







राशन दुकानदारों का हल्लाबोल: 9 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ में ठप हो सकती है सरकारी राशन व्यवस्था

रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य के शासकीय उचित मूल्य (पीडीएस) दुकान संचालकों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं और मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘छ.ग. पी.डी.एस. संचालक संघ, रायपुर’ के बैनर तले संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को एक 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए 05 जुलाई 2026 से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का कड़ा निर्णय लिया गया है।

​संघ का स्पष्ट कहना है कि अनेक बार आवेदन और निवेदन किए जाने के बावजूद भी शासन-प्रशासन द्वारा उनकी समस्याओं का कोई ठोस निराकरण नहीं किया गया है, जिसके चलते दुकानदार अब दुकानें बंद करने पर मजबूर हो रहे हैं।

राशन दुकान संचालकों की मुख्य 9 सूत्रीय मांगें और समस्याएं:

  1. आर्थिक संकट और कम मार्जिन मनी: राशन दुकानदार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। समय पर बारदाना राशि, मार्जिन मनी, आधार प्रमाणित वितरण राशि और वित्तीय पोषण राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। मार्जिन राशि पिछले लगभग 20 वर्षों से नाममात्र भी नहीं बढ़ाई गई है। वर्तमान में CGFSA में ₹30 प्रति क्विंटल और NFSA में ₹90 प्रति क्विंटल मार्जिन दिया जा रहा है, जो कि बेहद कम है। संघ ने दोनों में समान मेहनत का हवाला देते हुए इसे कम से कम ₹150 प्रति क्विंटल करने और दुकान संचालकों व विक्रेताओं का बीमा कराने की मांग की है। (नोट में उल्लेख है कि नवंबर 2025 के बाद से पिछले 7 महीनों की NFSA मार्जिन मनी अभी तक नहीं मिली है)।
  2. आवंटन की ‘M² पद्धति’ का विरोध: राशन के आवंटन में भारी अनियमितता बरती जा रही है। वर्तमान में लागू ‘M² पद्धति’ के कारण पूरा आवंटन नहीं मिल पाता है, जिससे ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना का औचित्य ही खत्म हो रहा है। इसके कारण दुकानदारों और उपभोक्ताओं के बीच आए दिन विवाद व शिकायतें होती हैं। इस पद्धति को तुरंत बंद करने की मांग की गई है।
  3. 1% क्षतिपूर्ति की मांग: गोदामों (भंडारण) से राशन दुकानदारों को धर्मकांटा से वजन करके राशन दिया जाता है, लेकिन दुकान संचालक उपभोक्ताओं को 1-1 किलो तौलकर राशन बांटते हैं, जिससे स्टॉक में स्वाभाविक रूप से कमी (घटती) आती है। दुकानदारों ने इसके लिए कम से कम 1% क्षतिपूर्ति (सूखत/कमी) दिए जाने की मांग रखी है।
  4. शक्कर वितरण कमीशन में सुधार: शक्कर वितरण पर मिलने वाला कमीशन वर्तमान में महज 4 पैसा प्रति राशन कार्ड प्रति किलो है, जो कि व्यावहारिक नहीं है। इसे बढ़ाकर कम से कम ₹100 प्रति क्विंटल करने और शक्कर का बिक्री मूल्य ₹17 के स्थान पर ₹20 करने की मांग की गई है ताकि चिल्हर (छुट्टे पैसों) को लेकर होने वाला विवाद समाप्त हो सके।
  5. बकाया कमीशन का तत्काल भुगतान: अगस्त 2016 से नवंबर 2016 के बीच की बढ़ी हुई कमीशन राशि आज दिनांक तक लंबित है, जिसे तत्काल जारी करने का आग्रह किया गया है।
  6. चावल की विभिन्न योजनाओं का विवाद: अलग-अलग योजनाओं (जैसे APL, CGFSA, NFSA) का चावल होने के कारण उपभोक्ताओं और दुकानदारों में भ्रम व विवाद की स्थिति बनती है। उपभोक्ता को लगता है कि स्टॉक होने के बावजूद राशन नहीं दिया जा रहा है। संघ की मांग है कि माह के अंत में कुल वितरित चावल की गणना कर एक ही ‘घोषणा पत्र’ संधारित किया जाए।
  7. झूठे मुकदमों और FIR पर रोक: राजनीतिक दबाव (मंत्रियों व विधायकों) के चलते अधिकारियों द्वारा कई बार दुकान संचालकों पर झूठे प्रकरण बनाकर FIR दर्ज करा दी जाती है। संघ की मांग है कि पी.डी.एस. संघ के पदाधिकारियों से चर्चा और निष्पक्ष जांच के बाद ही उचित होने पर ही कोई कानूनी कार्रवाई की जाए।
  8. 3 माह के एकमुश्त वितरण का विरोध: राज्य में तीन महीने का राशन एक साथ बांटने की व्यवस्था को अव्यावहारिक बताया गया है। इससे ‘नान’ (नागरिक आपूर्ति निगम) द्वारा समय पर भंडारण नहीं हो पाता, दुकानदारों की मेहनत और समय तीन गुना बढ़ जाता है, उपभोक्ताओं को लंबी लाइनों में लगना पड़ता है और गरीब उपभोक्ताओं के घर कच्चे होने के कारण अनाज खराब होने का डर रहता है। अतः 3 माह के एकमुश्त वितरण की अनुमति न दी जाए।
  9. पॉस (POS) मशीन और सर्वर की समस्या: राशन वितरण के दौरान पॉस मशीन में कभी लिंक फेल होने, कभी सर्वर डाउन रहने तो कभी उपभोक्ताओं के अंगूठे का निशान (बायोमेट्रिक) न लेने के कारण घंटों लाइनें लगी रहती हैं। इससे मजदूरों की दिहाड़ी छूटती है और समय व पैसे दोनों का नुकसान होता है। इस अव्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

​संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना ने ज्ञापन के माध्यम से साफ कर दिया है कि यदि शासन स्तर पर उनकी इन उचित मांगों पर 25 जून तक सकारात्मक विचार कर इन्हें लागू नहीं किया, तो पूरे प्रदेश के राशन दुकानदार 5 जुलाई से अपनी दुकानें बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस तालाबंदी से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की जन-अव्यवस्था और विषम परिस्थितियों की समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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