लापरवाही की हद: खेत में मौत का करंट दौड़ाने वाले बेरहम किसान को कोर्ट ने दी दर्दनाक सजा, 10 साल तक काटेगा जेल की हवा
छत्तीसगढ़ के मरवाही वनक्षेत्र के करगीकला गांव में खेत की रखवाली के नाम पर अवैध रूप से कटीले तारों में बिजली का हाई-वोल्टेज करंट प्रवाहित करने वाले दोषी किसान स्वरूप सिंह धुर्वे को कोर्ट ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की कड़ी सजा सुनाई है। इस जानलेवा फेंसिंग की चपेट में आने से 28 अगस्त 2025 को खेलते-खेलते एक मासूम बालक गीतराम सारथी की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिस पर द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने यह ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया।

रायपुर, 26 जून 2026: छत्तीसगढ़ में फसलों की सुरक्षा के नाम पर इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ करने वाले लापरवाह लोगों के खिलाफ न्यायपालिका ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। खेतों की घेराबंदी करके उसमें अवैध और जानलेवा तरीके से बिजली का करंट दौड़ाने वाले एक मामले में माननीय अदालत ने दोषी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह अहम फैसला समाज के उन लोगों के लिए एक बड़ा और कड़ा सबक है जो अपने निजी स्वार्थ के लिए मासूमों और मूक पशुओं की जान को दांव पर लगा देते हैं।
यह पूरा हृदयविदारक मामला छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के मरवाही वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम करगीकला का है। फसलों को जंगली जानवरों और मवेशियों से बचाने के बहाने बिछाए गए नंगे बिजली के तारों ने एक हंसते-खेलते मासूम बच्चे की जान ले ली थी। इस अत्यंत संवेदनशील और गंभीर आपराधिक मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए न्यायालय ने आरोपी को पूरी तरह दोषी पाया और उसे कानून के तहत सबसे कड़ी सजा से दंडित किया।
खेलते-खेलते कटीले तारों की फेंसिंग में आ गया था मासूम गीतराम सारथी
इस बेहद दर्दनाक हादसे की शुरुआत पिछले वर्ष 28 अगस्त 2025 को हुई थी। अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए गए प्रामाणिक दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार, मरवाही क्षेत्र के ग्राम करगीकला में दोपहर के करीब 2:30 बजे रोज की तरह कुछ बच्चे अपने घरों के पास खेल रहे थे। इसी दौरान खेलते-खेलते खेल-खेल में 7-8 वर्षीय मासूम बालक गीतराम सारथी अपने घर से कुछ ही दूरी पर स्थित स्वरूप सिंह धुर्वे के खेत की तरफ चला गया।
मासूम गीतराम को इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि खेत की सुरक्षा के लिए लगाया गया वह साधारण सा दिखने वाला कटीला तार दरअसल साक्षात मौत का फंदा है। जैसे ही खेलते समय बच्चे का शरीर उस लोहे के कटीले तार से अनजाने में छुआ, वैसे ही तार में पूरी ताकत से दौड़ रहे हाई-वोल्टेज बिजली के करंट ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। करंट का झटका इतना भीषण और घातक था कि तड़प-तड़पकर मौके पर ही मासूम गीतराम सारथी की दर्दनाक मौत हो गई।
बिजली विभाग की अनुमति के बिना सीधे घर से खींचा था जानलेवा सर्विस वायर
पुलिस द्वारा की गई विस्तृत विवेचना और विद्युत विभाग की तकनीकी टीम की जांच रिपोर्ट से यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी किसान स्वरूप सिंह धुर्वे ने अपने खेत की फसलों की रखवाली के लिए एक अत्यंत खतरनाक और गैरकानूनी तरीका अपनाया था। उसने छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी या संबंधित बिजली विभाग से किसी भी प्रकार की लिखित अनुमति या तकनीकी मंजूरी नहीं ली थी।
आरोपी ने सीधे अपने घरेलू बिजली कनेक्शन के मीटर बोर्ड से एक लंबा सर्विस वायर खींचा और उसे पूरे खेत के चारों तरफ सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के कटीले तारों (electric fencing) में लपेट दिया। जांच अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने इस जानलेवा फेंसिंग को लेकर न तो कोई चेतावनी बोर्ड या लाल झंडी लगाई थी और न ही पड़ोस के ग्रामीणों को इस बात की कोई पूर्व सूचना दी थी। उसने पूरी तरह से कानून को ताक पर रखकर इस जानलेवा कृत्य को अंजाम दिया था।
द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने खारिज की आरोपी की दलीलें
इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की लंबी और गहन न्यायिक सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय के अंतर्गत पूरी की गई। मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की प्रतिष्ठित अदालत ने 25 जून 2026 को अपना बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में आरोपी स्वरूप सिंह धुर्वे द्वारा स्वयं को निर्दोष बताने की तमाम दलीलों और बचाव के तर्कों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने इसे महज एक अनजानी दुर्घटना और सामान्य लापरवाही साबित करने का हरसंभव प्रयास किया था। लेकिन द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से पूर्ण सहमति जताते हुए कानून की धाराओं के तहत आरोपी को सख्त संदेश दिया। अदालत ने साफ तौर पर माना कि आरोपी स्वरूप सिंह धुर्वे एक वयस्क और समझदार नागरिक है और उसे इस बात की भली-भांति जानकारी थी कि एक खुले विद्युत तार में सीधे घरेलू करंट प्रवाहित करने से वहां से गुजरने वाले किसी भी निर्दोष व्यक्ति, राहगीर या मूक जीव-जंतु की जान तत्काल जा सकती है।
जानते-बूझते हुए गंभीर कृत्य के लिए 10 वर्ष का कठोर कारावास
माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपी के इस कृत्य को केवल एक सामान्य भूल या असावधानी नहीं माना जा सकता, बल्कि यह जानते-बूझते हुए किया गया एक अत्यंत गंभीर और आपराधिक कृत्य है। न्यायालय ने आरोपी स्वरूप सिंह धुर्वे को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं (गैर-इरादतन हत्या यानी गैर-इरादतन मानव वध) के तहत पूरी तरह दोषी करार दिया।
इस अंतिम और कड़े फैसले के तहत दोषी स्वरूप सिंह धुर्वे को 10 वर्ष के सश्रम (कठोर) कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी अधिरोपित किया है, जिसे समय पर अदा न करने की स्थिति में उसकी जेल की अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने दोषी को अदालत कक्ष से ही अपनी हिरासत में ले लिया और उसे कड़ी सुरक्षा के बीच केंद्रीय जेल दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की।
खेतों में बिजली करंट दौड़ाने पर छत्तीसगढ़ सरकार के कड़े दिशा-निर्देश
छत्तीसगढ़ के विभिन्न ग्रामीण और विशेष रूप से वन क्षेत्रों से लगे संवेदनशील इलाकों में फसलों को जंगली सुअरों, हाथियों और आवारा मवेशियों से बचाने के लिए किसानों द्वारा इस तरह के अवैध ‘झटका तार’ या सीधे मुख्य विद्युत लाइनों से हुकिंग कर करंट दौड़ाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इस जानलेवा आदत के कारण न केवल मासूम ग्रामीणों और बच्चों की मौतें होती हैं, बल्कि राज्य में अब तक दर्जनों दुर्लभ वन्यजीवों और हाथियों की भी तड़पकर मौत हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ विद्युत विभाग और वन विभाग के संयुक्त नियमों के अनुसार, खेतों की सुरक्षा के लिए केवल और केवल प्रमाणित ‘सोलर फेंसिंग’ या कम क्षमता वाले बैटरी चालित ‘झटका मशीनों’ के उपयोग की ही अनुमति प्रदान की जाती है, जो केवल एक हल्का और सुरक्षित पल्स (झटका) देती हैं जिससे जानवर या इंसान दूर हट जाते हैं, लेकिन उनकी जान नहीं जाती। सीधे घरेलू बिजली लाइन या मुख्य ट्रांसफार्मर से नंगा तार जोड़ना पूरी तरह से गैरकानूनी और एक गैर-जमानती गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें कड़ी जेल की सजा का प्रावधान है।
यह ऐतिहासिक अदालती फैसला समाज के उन तमाम लोगों के लिए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश है जो कानून को ताक पर रखकर दूसरों की जान को भारी जोखिम में डालते हैं।



