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अमेरिकी उपराष्ट्रपति के पाकिस्तान प्रेम पर भड़के रिपब्लिकन सांसद, कतर और इस्लामाबाद के आतंकी इतिहास को लेकर उठाए गंभीर सवाल

स्विट्ज़रलैंड में ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत के बीच अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रशंसा किए जाने के बाद रिपब्लिकन पार्टी के दो वरिष्ठ सांसदों ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए हैं। सांसदों का आरोप है कि दोनों देशों का आतंकवादियों को पनाह देने का एक लंबा इतिहास रहा है और वे निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकते।







रायपुर, 23 जून 2026: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस द्वारा स्विट्ज़रलैंड में पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक रुख दिखाने और इस्लामाबाद के प्रति अपना लगाव व्यक्त करने के बाद अमेरिकी संसद में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के दो प्रमुख सांसदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान और कतर दोनों देशों के पुराने इतिहास का हवाला दिया है। सांसदों का स्पष्ट कहना है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वाले देशों को मध्यस्थ के रूप में देखना रणनीतिक रूप से गलत है।

रिक स्कॉट ने जताई कड़ी आपत्ति, ईरान कनेक्शन पर घेरा

फ्लोरिडा से अमेरिकी सांसद रिक स्कॉट ने इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक समुदाय को अब तक यह पूरी तरह समझ आ जाना चाहिए कि अमेरिका के असली मित्र कौन हैं। स्कॉट के अनुसार, कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को शरण देने का इतिहास बहुत पुराना है।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ये दोनों देश किसी सार्थक और स्थाई शांति को स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकवादी अभियानों को मजबूती देने में अधिक रुचि ले रहे हैं। स्कॉट का यह बयान तब आया जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्ज़रलैंड में पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर ईरान शांति समझौते के तकनीकी पहलुओं पर काम कर रहे थे। स्कॉट ने जोर देकर कहा कि भले ही एक व्यावहारिक समझौते की गुंजाइश बची हो, लेकिन ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की छूट नहीं दी जा सकती।

टिम शीहे ने याद दिलाया ओसामा बिन लादेन का इतिहास

मोंटाना से अमेरिकी सांसद टिम शीहे ने एक प्रसिद्ध समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में पाकिस्तान की भूमिका पर और अधिक गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को लगभग दस साल तक अपने यहां छिपाकर रखा था।

शीहे ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई के माध्यम से विद्रोही गतिविधियों को न केवल वित्तीय मदद दी बल्कि आयतुल्लाह शासन को भी आर्थिक सहायता पहुंचाई। नेवी सील के पूर्व कमांडर रह चुके शीहे ने कतर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह देश दशकों से विभिन्न आतंकवादी संगठनों के लिए धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग का काम करता आ रहा है। ऐसे में इन दोनों देशों को निष्पक्ष मध्यस्थ मान लेना बिल्कुल गलत होगा।

मध्य पूर्व में वास्तविक सहयोगियों को शामिल करने की मांग

सांसद टिम शीहे ने सुझाव दिया कि यदि पाकिस्तान और कतर इस अंतरराष्ट्रीय वार्ता का हिस्सा हैं, तो अमेरिका को तुरंत अपने वास्तविक और भरोसेमंद मित्रों को भी इस मेज पर लाना चाहिए। उन्होंने तीन प्रमुख देशों के नाम सामने रखे:

  • संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
  • इजराइल
  • सऊदी अरब

उनका मानना है कि मध्य पूर्व में केवल ये तीन देश ही अमेरिका के सबसे भरोसेमंद और अग्रणी साझेदार बने रहेंगे, इसलिए अमेरिका को बिना किसी संकोच के इनके साथ पूरी दृढ़ता से खड़े रहना चाहिए।

क्या था उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान

इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का वह बयान है जिसमें उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपने पसंदीदा लोगों में शामिल बताया था। वेंस ने साझा किया था कि जब इस्लामाबाद में उनका स्वागत हुआ, तो उन्होंने मजाक में कहा था कि उनके जीवन में दो बहुत महत्वपूर्ण लोग हैं, जिनमें से एक भारतीय हैं और दूसरे पाकिस्तानी।

भारतीय उनकी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर हैं। वेंस ने यह भी स्वीकार किया था कि पिछले तीन महीनों के दौरान उनकी सबसे ज्यादा बातचीत मुनीर से ही हुई है। इसी बयान के बाद से अमेरिकी सांसदों ने प्रशासन को घेरा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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