छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती पर सियासत तेज, टीएस सिंहदेव ने जताई अंतरराष्ट्रीय गिरोह की आशंका

बलरामपुर में करोड़ों की अफीम बरामद होने के बाद राजनीतिक विवाद गहराया। कांग्रेस नेताओं ने सरकार और प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल, पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर NDPS एक्ट के तहत भेजा जेल।





रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। बलरामपुर जिले में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले में सरकार और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसके जरिए प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।


टीएस सिंहदेव ने जताई अंतरराष्ट्रीय गिरोह की आशंका

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता T. S. Singh Deo ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में अलग-अलग क्षेत्रों में अफीम की खेती होना सामान्य घटना नहीं है।

उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ड्रग्स तस्करी गिरोह का हाथ हो सकता है। सिंहदेव के अनुसार इतनी बड़ी अवैध खेती सरकार, प्रशासन और पुलिस की जानकारी या संरक्षण के बिना संभव नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने और लगातार निगरानी रखने की मांग की है।


कांग्रेस ने सरकार पर लगाए संरक्षण के आरोप

पूर्व मंत्री Dhanendra Sahu ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में छत्तीसगढ़ में अपराध लगातार बढ़े हैं और अब राज्य का नाम अवैध अफीम उत्पादन से भी जुड़ने लगा है।

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती सरकार के संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकती। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।


फार्म हाउस और गिरदावरी प्रक्रिया पर उठे सवाल

धनेन्द्र साहू ने कहा कि बड़े फार्म हाउस में आम लोगों या बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक होती है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि वहां किस तरह की खेती हो रही है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण कर गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं या केवल कागजों पर ही रिपोर्ट बनाई जा रही है।

साहू के अनुसार राजस्व और पुलिस विभाग के बीच सांठगांठ के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खेती संभव नहीं है। उन्होंने ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की।


बलरामपुर में 3.67 एकड़ में अफीम की खेती का खुलासा

बलरामपुर जिले के त्रिपुरी क्षेत्र में प्रशासन की शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान करीब 3.67 एकड़ जमीन पर अफीम की फसल पाई गई।

पुलिस और प्रशासन ने मौके से कुल 4 हजार 344 किलोग्राम अफीम जब्त की है। इसमें पौधों के तने, फूल और फल सहित पूरी फसल शामिल है। अधिकारियों के अनुसार जब्त की गई अफीम की अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.75 करोड़ रुपये आंकी गई है।


सात आरोपी गिरफ्तार, NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई

इस मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ मादक पदार्थों से संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की गई है।

उन पर NDPS Act के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसके तहत अवैध मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन और तस्करी पर कठोर सजा का प्रावधान है।


पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

इससे पहले दुर्ग जिले के समोदा क्षेत्र में भी अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया था, जिसमें एक भाजपा नेता को गिरफ्तार किया गया था। उस घटना के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य भारत के कुछ हिस्सों में अफीम की अवैध खेती धीरे-धीरे बढ़ रही है और इसे रोकने के लिए प्रशासन को कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।


विधानसभा में भी गूंजा मुद्दा

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया है। विपक्ष ने सरकार से पूछा है कि प्रदेश में अवैध अफीम की खेती को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या रणनीति बनाई गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।


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Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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